यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 23, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
इबोला से मुकाबले के लिए वैक्सीन तैयार
वैक्सीन को आरवीएसवी-जेबोव नाम दिया गया है। इसका अफ्रीका के इबोला प्रभावित देश गिनी में 5,837 लोगों पर परीक्षण किया गया।

अफ्रीका महाद्वीप में जानलेवा बने इबोला वायरस से मुकाबले के लिए वैक्सीन तैयार हो गई है। यह परीक्षण में 100 फीसद खरी पाई गई है। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि वैक्सीन सुरक्षित और बीमारी के खिलाफ पूरी तरह प्रभावी पाई गई है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, वैक्सीन को आरवीएसवी-जेबोव नाम दिया गया है। इसका अफ्रीका के इबोला प्रभावित देश गिनी में 5,837 लोगों पर परीक्षण किया गया। टीकाकरण के बाद इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया। इस टीके का परीक्षण विश्व स्वास्थ संगठन (डब्ल्यूएचओ) और गिनी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मिलकर किया गया था। डब्ल्यूएचओ की सहायक महानिदेशक (हेल्थ सिस्टम) डॉ. मैरी-पॉल किनी ने कहा कि यह उत्साहजनक नजीजे काफी देर से आए। क्योंकि पश्चिम अफ्रीका में इस वायरस के प्रकोप से बड़ी संख्या में लोग मारे गए। उन्हें हम बचा नहीं सके।
गौरतलब है कि इबोला वायरस की सबसे पहले 1976 में पहचान की गई थी। उस समय अफ्रीका में इसका प्रकोप देखने को मिला था। इसके बाद 2013 से 2016 के दौरान फिर इसका प्रकोप सामने आया। नतीजन 11,300 से ज्यादा लोग मारे गए। इसके बाद यह नई वैक्सीन विकसित करने की जरूरत पड़ी।
