जिया खुदकुशी मामला: सूरज पंचोली पर लग सकती है धारा 315
फिल्म अभिनेत्री जिया खान की खुदकुशी की सीबीआइ जांच में आदित्य पंचोली के बेटे सूरज पंचोली का घृणित चेहरा सामने आने पर माना जा रहा है कि उस पर धारा 315 भी लगाई जा सकती है।
मुंबई। फिल्म अभिनेत्री जिया खान की खुदकुशी की सीबीआइ जांच में आदित्य पंचोली के बेटे सूरज पंचोली का घृणित चेहरा सामने आने पर माना जा रहा है कि उस पर धारा 315 भी लगाई जा सकती है। आइपीसी की यह धारा बच्चे के जन्म को रोकने या उसे गर्भ में ही जान से मारने या जन्म के बाद हत्या करने पर लगाया जाता है।
3 जून 2013 में मुंबई के जुहू स्थित सागर संगीत बिल्डिंग में अभिनेत्री जिया खान की लाश फांसी के फंदे पर झूलती मिली थी। उसी कमरे में जिया के हाथ से लिखा सुसाइड नोट भी था, जिसे तब जुहू पुलिस ने अनजाने में जानबूझकर अनदेखा कर दिया था। सूरज पंचोली के नाम लिखा जिया का यह नोट उस पर ढाए गए जुल्म की कहानी बयां करता है। जिया ने खुदकुशी से पहले अपने इस लंबे-चौड़े सोसाइड नोट में अपनी दिल दहला देने वाली आपबीती बताई थी। जिया के सुसाइड नोट के एक अंश के मुताबिक वह गर्भवती होने से डरती थी, फिर भी वह सूरज के लिए समर्पित थी।
सूरज से मिले दर्द ने उसे पूरी तरह से खत्म कर दिया था। बहुत तकलीफ के बावजूद उसने सूरज के बच्चे का गर्भपात करा दिया था। जनवरी 2013 में जिया पेट में दर्द की शिकायत के साथ डॉ. राहुल दत्ता के क्लीनिक गई थी, जहां उसकी सोनोग्राइफ और ब्लड टेस्ट से उसकी गर्भवती होने की पुष्टि हुई थी। सीबीआइ के पास वह रिपोर्ट भी है जिससे पता चलता है कि 16 जनवरी, 2013 को जिया और सूरज पंचोली एक साथ डॉ. राहुल दत्ता के क्लीनिक गए थे।
सीबीआइ जांच में यह बात भी सामने आई है कि यह गर्भपात भी सूरज ने हैवानियत भरे अंदाज में खुद ही अंजाम दिया था। पहले तो उसने गर्भपात के लिए जिया को अस्पताल ले जाने के बजाय खुद ही जिया को गर्भपात की दवा दी। जब चार महीने का भ्रूण गर्भाशय से नीचे सरक गया तो सूरज पंचोली ने उस भ्रूण को जिया के शरीर से खुद ही बाहर खींचा और उसका शव शौचालय में ही फ्लश करके बहा दिया।
इसलिए मुंबई के एक वकील वाईपी सिंह का कहना है कि सूरज के इस घृणित अपराध के लिए उस पर आइपीसी की धारा 315 लगाई जानी चाहिए। हालांकि सीबीआइ ने आरोप पत्र में अभी तक इस धारा को शामिल नहीं किया है। इस धारा को लगाने के लिए अब पर्याप्त सुबूत मौजूद हैं। सिंह का कहना है कि चूंकि अविवाहित महिला को खुदकुशी के लिए मजबूर करने के लिए उसके साथी पर इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872 की धारा 113ए के तहत सजा दिलाना बहुत मुश्किल है। क्योंकि यह केवल विवाहित महिलाओं के लिए है। इसके तहत शादी के सात साल के अंदर महिला के खुदकुशी करने पर उसके पति को जेल हो सकती है। इसलिए अगर सरकारी वकील सूरज के खिलाफ केस पुख्ता करना चाहते हैं तो उन्हें धारा 306 विफल रहने की सूरत में धारा 315 लगानी चाहिए।
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