यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 14, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उत्तराखंड में सत्ता परिवर्तन से अफसरशाही में हलचल
नई सरकार की आहट से ही प्रदेश की अफसरशाही में हलचल मचनी शुरू हो गई है। विशेषकर कांग्रेस सरकार में ...और पढ़ें

देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: प्रदेश में चुनाव नतीजों के बाद अब जल्द भाजपा की सरकार अस्तित्व में आने जा रही है। नई सरकार की आहट से ही प्रदेश की अफसरशाही में हलचल मचनी शुरू हो गई है। विशेषकर कांग्रेस सरकार में सत्ता के नजदीक माने जाने वाले अधिकारी अपनी विदाई तय मान रहे हैं।
चर्चा यह है कि भाजपा नेताओं ने ऐसे अधिकारियों की सूची भी आलाकमान को भेजी है। वहीं, जोड़-तोड़ में माहिर अधिकारी अभी से भाजपा में गोटी फिट करने के लिए जुगत बिठाने की कोशिशों में जुट गए हैं।
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प्रदेश में राजनीति और अफसरशाही का पुराना गठजोड़ रहा है। प्रदेश में आने वाली हर नई सरकार अपने हिसाब से अधिकारियों की तैनाती करती रही है। जाहिर है इसके पीछे मंशा अधिकारियों से अपने हिसाब से काम लेने के साथ ही पुरानी सरकार के वफादारों को बाहर करना होता है।
इस बार भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। भाजपा ने अपने पांच वर्षों के कार्यकाल के दौरान तमाम अधिकारियों को भ्रष्टाचार के मामले पर निशाने में लिया है। चुनाव से पहले प्रदेश में अफसरशाही के फेरबदल पर भी भाजपा ने सवाल उठाया था।
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इन अधिकारियों में शासन में वर्षों से मलाईदार पदों पर बैठे अधिकारियों के साथ ही जिलों में तैनात कुछ जिलाधिकारी भी शामिल हैं। कानून व्यवस्था को भी भाजपा ने सरकार की असफलता के रूप में उठाया है। पुलिस मुख्यालय से लेकर जनपदों में तैनात अधिकारियों की कार्यशैली पर अंगुली उठाई गई है।
इस समय प्रदेश में शासन व पुलिस में ऐसे कई नाम है जिन्हें सीधे कांग्रेस से जोड़कर देखा जाता रहा है। इनमें से कई अधिकारी तो चुनाव के दौरान कांग्रेस का महिमामंडन करने के साथ ही भाजपा को गरियाने से भी नहीं चूके थे।
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शासन में तैनात कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यशैली भी भाजपा के मिजाज से मेल खाती नजर नहीं आती। ऐसे अधिकारियों की सूची भाजपा में पहले ही बननी शुरू हो गई थी। यह सूची ऊपर भी भेजी जा चुकी है। इस कारण अफसरशाही में फेरबदल तय नजर आ रहा है।
इस बात को अधिकारी भी समझ रहे हैं। पहले से ही भाजपा के नजदीकी रहे अधिकारी खुश हैं और अच्छे विभाग पाने की उम्मीद पाले हैं तो वहीं, अन्य अधिकारी भाजपा में अपने संपर्कों के जरिए खुद को गुड बुक में लाने का प्रयास कर रहे हैं।