यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 14, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उत्तराखंड: इस बार जमानत भी नहीं बचा पाए उक्रांद के शीर्ष नेता
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 में राज्य निर्माण के आंदोलन में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने वाली उत्तराखंड क्रांति दल लगातार हाशिए में चले गई है।

चंपावत, [चंद्रशेखर द्विवेदी]: राज्य निर्माण के आंदोलन में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने वाली उत्तराखंड क्रांति दल लगातार हाशिए में चले गई है। हाल यह कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस विधानसभा चुनाव में अपनी जमानत तक नहीं बचा पाया।
इस बार विधानसभा चुनाव में उक्रांद प्रदेश में एक भी सीट नहीं जीत सकी। उसके शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी डीडीहाट विस क्षेत्र से चुनाव लड़े और मात्र 2896 मत हासिल कर पाए। वह अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए।
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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 में यही हाल उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष पुष्पेश त्रिपाठी का भी रहा। वह द्वाराहाट विस सीट से मैदान में थे। वह सिर्फ 6581 मत के साथ अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। कई सीटों पर तो यूकेडी को नोटा से कम मत मिले। जनादेश ने साफ कर दिया कि उक्रांद जनता के दिलों में अपनी छाप छोड़ने में पूरी तरह असफल साबित हो गया है।
राज्य निर्माण की अवधारणा के उद्देश्य से उत्तराखंड क्रांति दल का गठन हुआ। लंबे संघर्षों के बाद राज्य बना। राज्य बनने के बाद यूकेडी क्षेत्रीय दल के रूप में स्थापित हुआ। तब लगा था कि यूकेडी जिन मुद्दों के लिए अलग राज्य की मांग के लिए अपने संघर्षों से खड़ी हुई थी उसे पूरा करने का समय आ गया था।
उक्रांद की सियासी परीक्षा 2002 में शुरू उसने 62 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए। जीत चार पर ही हासिल हुई। 2007 में हुए चुनावों में उसे सिर्फ तीन सीटें ही मिली। इसके बाद भी यूकेडी ने सबक नही लिया। राजीनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते उक्रांद तब बहुमत से बनी सरकार के साथ गठबंधन करते और सत्ता समझौता करते हुए दिखायी दिया।
2012 के चुनावों में यूकेडी के खते में केवल एक सीट आ पाई। पहले चुनावों के 5.49 मत प्रतिशत के मुकाबले अब उसका मत प्रतिशत केवल एक प्रतिशत ही रह गया था।