यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 12, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मोदी लहर ने देवभूमि में खिलाया कमल
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 में तो नरेंद्र मोदी के नाम का अंडरकरंट इस कदर दौड़ा कि इससे पैदा सियासी सुनामी में कांग्रेस की चुनावी नैया तिनके-तिनके होकर बिखर गई।

देहरादून, [विकास धूलिया]: मोदी लहर का असर देवभूमि उत्तराखंड में 2014 के लोकसभा चुनाव में भी दिखा था मगर इस विधानसभा चुनाव में तो नरेंद्र मोदी के नाम का अंडरकरंट इस कदर दौड़ा कि इससे पैदा सियासी सुनामी में कांग्रेस की चुनावी नैया तिनके-तिनके होकर बिखर गई। कांग्रेस तो इसे भांपने में नाकाम रही ही, भाजपा को भी शायद उम्मीद नहीं थी कि उत्तर प्रदेश की ही तरह उत्तराखंड में भाजपा इतने प्रचंड बहुमत से सत्ता हासिल करेगी। पिछले चुनाव में महज 0.66 प्रतिशत मतों के अंतर से सत्ता गंवाने वाली भाजपा इस बार 13 प्रतिशत अधिक वोट पाकर सत्ता पर काबिज हुई। सीटों की बात करें तो इस बार भाजपा के हिस्से पिछले चुनाव के मुकाबले फिलहाल 25 सीटें ज्यादा आई हैं।
यूं तो उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में राज्य गठन के बाद से ही जनादेश हमेशा सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ आता रहा है और इस लिहाज से इस बार भाजपा को ही सत्ता का प्रबल दावेदार समझा जा रहा था लेकिन यह किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि 2014 के लोकसभा चुनाव की तर्ज पर ही भाजपा विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस पर एकतरफा जीत दर्ज करेगी। हालांकि तब भी भाजपा नमो लहर पर सवार थी और इस दफा भी मोदी मैजिक के सम्मोहन से मतदाता भाजपा की ओर खिंचे चले आए। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनावों की घोषणा से ऐन पहले देहरादून में हुई जनसभा में डबल इंजन की जो बात कही थी, उसमें निहित संदेश को उत्तराखंड के मतदाताओं ने गहराई से लिया।
मोदी ने डबल इंजन की बात उत्तराखंड के विकास के संदर्भ में केंद्र व राज्य में एक ही पार्टी के सरकार की जरूरत को रेखांकित करते हुए कही थी। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में अपनी चार चुनावी सभाओं में विकास का जो रोडमैप रखा, मतदाता ने उस पर अपना पूरा विश्वास दिखाया। पर्यटन, तीर्थाटन, उद्योग, रोजगार जैसे विषयों पर मोदी द्वारा दी गई गारंटी और वन रैंक वन पेंशन, सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर उनकी साफगोई देवभूमि के बाशिंदों को भा गई।
'अटल ने बनाया, मोदी संवारेंगे' स्लोगन के जरिये भाजपा ने उत्तराखंड के अलग राज्य के गठन के बाद अब उसके विकास की जो उम्मीद जगाई, मतदाता उससे अभिभूत हो गया। उस पर, प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की स्वच्छ छवि और भ्रष्टाचारमुक्त शासन की कार्यशैली ने उत्तराखंड को उनका मुरीद बना दिया।
ये ही वे तमाम कारण रहे, जिनकी मौजूदगी में भाजपा उत्तराखंड में ऐतिहासिक सफलता हासिल करने में कामयाब रही और उसके हिस्से 46 प्रतिशत से ज्यादा जनमत आया। पिछले तीन विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच ढाई फीसद से भी कम मतों का अंतर रहा है। वर्ष 2002 के पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा से 1.46 प्रतिशत ज्यादा वोट पाकर 36 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा 19 पर सिमट गई।
2007 के दूसरे विधानसभा चुनाव में भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले 2.31 प्रतिशत ज्यादा मत मिले, जबकि उसकी सीटें रहीं 34 और कांग्रेस के हिस्से आई 21 सीटें। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा से केवल 0.66 प्रतिशत ज्यादा मत लिए और 32 सीटों के साथ सत्ता तक पहुंची। भाजपा 31 सीट लेकर केवल एक सीट के अंतर से सत्ता से बेदखल हो गई। इस बार भाजपा ने कांग्रेस से 13.0 प्रतिशत ज्यादा वोट हासिल कर सीटों का आंकड़ा 56 तक पहुंचा दिया, जबकि कांग्रेस 11 पर ही सिमट गई। लोहाघाट सीट के एक बूथ पर पुनर्मतदान के कारण परिणाम फिलहाल रोका गया है।
उत्तराखंड में हासिल मत प्रतिशत
विस चुनाव-----भाजपा-----कांग्रेस
2002-------25.45-------26.91
2007-------31.90-------29.59
2012-------33.13-------33.79
2017-------46.50-------33.50