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    दिल्ली के इस बड़े कॉलेज ने उठाया बीड़ा, अब स्लम एरिया तक पहुंचेगी सेनेटरी नैपकिन

    By Amit MishraEdited By:
    Updated: Mon, 30 Oct 2017 07:56 PM (IST)

    सेनेटरी नैपकिन मुफ्त में भी वितरित की जाएंगी। छात्राओं ने वजीरपुर गांव को गोद लिया है व यहां भी नैपकिन का वितरण किया जाएगा।

    दिल्ली के इस बड़े कॉलेज ने उठाया बीड़ा, अब स्लम एरिया तक पहुंचेगी सेनेटरी नैपकिन

    नई दिल्ली [अभिनव उपाध्याय]। दिल्ली विश्वविद्यालय का रानी लक्ष्मीबाई कॉलेज राजधानी के स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन का वितरण करेगा। कॉलेज इसे स्लम में भी पहुंचाएगा व स्वच्छता व स्वास्थ्य के अभियान में सहायक बनेगा। महिला सशक्तिकरण को दिशा देने के लिए कॉलेज की छात्राएं खुद ही इसका उत्पादन करेंगी व मामूली दरों में वितरण करेंगी।

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    कॉलेज की प्रिंसिपल डा. प्रत्यूष वत्सला ने बताया कि सेनेटरी नैपकिन के लिए कॉलेज में उत्पादन केंद्र है। यहां नैपकिन का बड़े पैमाने पर निर्माण कर उसे अन्य कॉलेजों व स्कूलों में मामूली दरों में पहुंचाने पर विचार किया जा रहा है। यह योजना रेड डॉट कैंपेन के तहत बनाई गई है। कुछ जगहों पर सेनेटरी नैपकिन मुफ्त में भी वितरित की जाएंगी। छात्राओं ने वजीरपुर गांव को गोद लिया है व यहां भी नैपकिन का वितरण किया जाएगा।

    सामाजिक सरोकार से है जुड़ा है मसला

    प्रिंसिपल ने बताया कि यह अति स्वच्छता से जुड़ा मसला है जिसका सामाजिक सरोकार से सीधा संबंध है। इसमें हमारे यहां एनएसएस से जुड़ी छात्राएं भी पूरा सहयोग देंगी। हमारी कोशिश है कि हम अधिक से अधिक सेनेटरी नैपकिन का उत्पादन करें और इसे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाएं। रानी लक्ष्मीबाई कॉलेज परिसर में छात्राओं की सुविधा के लिए सेनेटरी नैपकिन की वेंडिंग मशीन उपलब्ध है।

    कॉमर्स की छात्राएं करेंगी प्रायोगिक प्रशिक्षण

    प्रिंसिपल ने बताया कि उत्पादन यूनिट का संचालन बीकॉम की छात्राएं करेंगी। यह उनके लिए प्रायोगिक प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) जैसा होगा। वह इस उत्पादन को लेकर प्रबंधन, बाजार प्रचार (मार्केटिंग) व वितरण का काम देखेंगी। नैपकिन की लागत अगर 2 रुपये आएगी तो इसकी बिक्री 3 रुपये में की जाएगी। इसके लिए निश्चित स्कूल-कॉलेज को लक्ष्य किया जाएगा।

    ऐसे पड़ी इसकी बुनियाद 

    लक्ष्मीबाई कॉलेज में फिलॉसफी ऑनर्स अंतिम वर्ष की छात्रा स्पृहा रॉय ने बताया कि डीयू में दाखिले के बाद इनोवेशन प्रोजेक्ट (महिला सशक्तिकरण कम पैसों में) के तौर पर यह अभियान शुरू किया गया था। एक सर्वे में सामने आया कि महिलाओं-छात्राओं में सेनेटरी नैपकिन को लेकर जागरूकता नहीं है व कई लोग इसे बुरी बात मानते हैं। हमने इसे उन लोगों के बीच पहुंचाने की ठानी है जो इसका प्रयोग नहीं करती हैं। इसी प्रोजेक्ट से जुड़ी डा.अमृता शिल्पी बताती हैं कि इस प्रोजेक्ट में अभी 50 छात्राएं काम कर रही हैं। सभी का उद्देश्य शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकार का भी है। 

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