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    हद हो गई..आखिर कौन है बड़ा, सचिन या भारतीय क्रिकेट?

    By Edited By:
    Updated: Mon, 02 Sep 2013 10:11 PM (IST)

    कहते हैं भगवान गलत नहीं होने देते, फिलहाल क्रिकेट के खेल में तो ऐसा होता बिल्कुल नहीं दिख रहा है..हां, यह सच है कि भारतीय क्रिकेट में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के योगदान को नकारा नहीं जा सकता, एक ऐसा क्रिकेटर जिसने देश-विदेश में टीम इंडिया को वह हासिल कराया जिसकी याद भर फैंस को इस दिग्गज को

    (शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। कहते हैं भगवान गलत नहीं होने देते, फिलहाल क्रिकेट के खेल में तो ऐसा होता बिल्कुल नहीं दिख रहा है, क्योंकि इस खेल के भगवान के सामने कुछ चीजें गलत हो रही हैं, जिसका हिस्सा वह खुद भी हैं..हां, यह सच है कि भारतीय क्रिकेट में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के योगदान को नकारा नहीं जा सकता, एक ऐसा क्रिकेटर जिसने देश-विदेश में टीम इंडिया को वह हासिल कराया जिसकी याद भर फैंस को इस दिग्गज को सलाम करने पर मजबूर कर देती है, लेकिन पिछले कुछ सालों में जिस हिसाब से बीसीसीआइ द्वारा टीम इंडिया से जुड़े फैसले सचिन तेंदुलकर के करियर को नजर में रखते हुए लिए जाते रहे हैं उससे कुछ सवाल रह रहकर उठते चले आए हैं, इस मामले में क्यों चुप हैं सचिन, आखिर किसका कद ऊंचा है और आखिर कौन है बड़ा..सचिन रमेश तेंदुलकर या फिर भारतीय क्रिकेट..

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    पढ़ें: 200वां टेस्ट होगा सचिन का गुडबाय मैच!

    बीसीसीआइ ने रविवार को बोर्ड की बैठक में भारत को दक्षिण अफ्रीकी दौरे से ठीक पहले वेस्टइंडीज के खिलाफ एक घरेलू सीरीज खेलने का प्रस्ताव तैयार कर दिया है..या यह कहें कि टीम को एक बार फिर झोंकने की तैयारी की जा चुकी है। सब इस बात से वाकिफ हैं कि भारतीय टीम के कई खिलाड़ी जल्द शुरू होने वाली चैंपियंस लीग टी20 में खेलने उतरेंगे, ठीक उसके बाद अक्टूबर-नवंबर में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम भारत में सात वनडे मैचों की सीरीज और एक टी20 मैच खेलने आएगी..और इसके बाद भारत को दक्षिण अफ्रीका के लंबे चौड़े दौरे के लिए रवाना होना था, लेकिन इसी बीच बोर्ड के जहन में वेस्टइंडीज को भारत बुलाने का विचार कहां से आ गया?

    पढ़ें: ऑपरेशन के बाद सचिन ट्रेनिंग में फिर से जुटे

    कहा जा रहा है कि यह सिर्फ इसलिए है कि मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर अपना 200वां टेस्ट भारतीय फैंस के सामने खेल सकें और फिर वह खेल को आराम से अलविदा कह सकें..चलिए माना कि वेस्टइंडीज भारत दौरे के लिए तैयार हो जाती है, 198 टेस्ट के आंकड़े पर अटके सचिन दो टेस्ट खेलकर अपने 200 टेस्ट भी पूरे कर लेते हैं (फिर चाहे वह संन्यास लें या ना लें) लेकिन क्या कोई यह नहीं सोच रहा कि इस बीच मौजूदा टीम इंडिया का क्या हाल होगा? बिना रुके, बिना थके आखिर एक खिलाड़ी कब तक मैदान पर पसीना बहाता रहेगा? और क्या यह थकान और इससे टीम इंडिया के फॉर्म को होने वाले नुकसान का जिम्मेदार बोर्ड या खुद सचिन नहीं ठहराए जाएंगे? इस बात का अंदाजा सबको है कि दक्षिण अफ्रीकी दौरा भारत के लिए कितना अहम, कितना लंबा और कितना चुनौतीपूर्ण होने वाला है, फिर उसके ठीक बाद अगले साल भी भारत को न्यूजीलैंड और इंग्लैंड का दौरा करना है...ऐसे में इतने व्यस्त कार्यक्रम के बीच वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज का यह सुहाना सपना आखिर बोर्ड के जहन में आया कैसे..क्या सचिन की विदाई को नजर में रखते हुए टीम इंडिया के मौजूदा फॉर्म को छेड़ना सही होगा? क्या यह खिलाड़ियों की सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं होगा और क्या उम्मीदों और लगातार हो रही सीरीज के बीच हर मैच जीतने की लालसा बेइमानी नहीं होगी..बड़ा सवाल यही है कि आखिर सचिन और भारतीय क्रिकेट में कौन बड़ा है... क्या सचिन हैं इसलिए भारतीय क्रिकेट है.. या फिर भारतीय क्रिकेट है, इसीलिए सचिन हैं?

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