नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। जम्मू-कश्मीर से Article 370 खत्म करने का सबसे ज्यादा मातम पाकिस्तान मना रहा है। पाकिस्तान का ये मातम, बुधवार (14 अगस्त 2019) को उसके 72वें स्वतंत्रता दिवस (72th Independence Day of Pakistan) समारोह में भी देखने को मिला। राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने इस दौरान अपने भाषण में केवल कश्मीर मुद्दे की बात की। उन्होंने भारत के खिलाफ सबसे बड़ा युद्ध छेड़ने का भी एलान कर दिया है। उन्होंने अपनी आवाम से भारत के खिलाफ सबसे बड़े युद्ध में साथ देने की अपील की है। पढ़ें- राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के भाषण के प्रमुख बिंदु...

भारतीय सेनाएं कई बार पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे कर चुकी हैं। पाकिस्तान ने जब भी भारत के खिलाफ अपने सैनिकों का इस्तेमाल किया, उसे शिकस्त का मुंह देखना पड़ा। पाकिस्तान भी भारत की सैन्य शक्ति, आर्थिक ताकत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी पहुंचे से भी अच्छे से वाकिफ है। लिहाजा वह अच्छे से जानता है कि भारत से हथियारों के बल पर सैन्य ताकत से नहीं जीता जा सकता। लिहाजा पाकिस्तान कभी आतंकवादियों के जरिए तो कभी कश्मीरी अलगाववादियों के जरिए हमेशा छद्म युद्ध छेड़े रहता है। अब पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने भी अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण से भारत के खिलाफ इसी तरह के एक छद्म युद्ध की घोषणा की है। उन्होंने अपने देश की आम जनता से अपील की है कि वह भी भारत के खिलाफ इस सबसे बड़े युद्ध में बढ़-चढ़कर योगदान दें।

पाक राष्ट्रपति आरिफ अल्वी का भाषण और उसका सच -
1. एक बड़ा काम आप लोग (पाकिस्तानी जनता) भी कर सकते हैं, मैं आम पाकिस्तानी नागरिकों से अपील करना चाहता हूं कि अगर वह भी कश्मीर का हल चाहते है तो सोशल मीडिया के जरिए आप भारत की भयानक चीजें दुनिया के सामने लाएं। दुनिया को वो फोटो दिखाई जाएं, जो कश्मीर से निकल रही हों। ये हमारे लिए सबसे बड़ी जंग है। ये मैं पाकिस्तानी सिविलियन से अपील करना चाहता हूं कि इस रास्ते को अख्तियार करें।
ये है सचः मालूम हो कि पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ तमाम फर्जी फोटो वायरल कर रहा है।

2. पाकिस्तानी राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने कहा, 'हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से मांग करते हैं कि वह कश्मीरियों पर हो रहे जुल्मों की जांच के लिए एक जांच कमेटी भेजे।'
ये है सचः यूएनएससी समेत किसी भी अन्य देश या अंतरराष्ट्रीय संगठन से पाकिस्तान को अब तक कोई मदद नहीं मिली है। सभी ने इसे भारत का आंतरिक मामला बता, उसकी आवाज को अनसुना कर दिया है।

3. आज का दिन कश्मीर के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। पूरी दुनिया देख रही है कि आज पूरी पाकिस्तानी कौम, अपने भाईयों के साथ खड़ी है। पाकिस्तान तब तक कश्मीरियों की मदद करता रहेगा, जब तक उन्हें उनके अधिकार वापस नहीं मिल जाते। राष्ट्रपति ने कहा, 'कश्मीरी हमारे और हम कश्मीरियों के हैं। हम इनकी तकलीफ को अपनी तकलीफ समझते हैं। इनका दुख हमारा दुख है।'
ये है सचः घाटी को अशांत करने और वहां के युवाओं का भविष्य करने के लिए केवल पाकिस्तान ही जिम्मेदार है।

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4. भारत ने इस एकतरफा फैसले से न केवल पाकिस्तान के खिलाफ साजिश की है, बल्कि शिमला समझौते को भी रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। जम्मू-कश्मीर पर भारत की मनमानी पाकिस्तान किसी तौर पर कुबूल नहीं करता। हम इनके साथ थे, साथ हैं और इंशा अल्लाह हमेशा साथ रहेंगे।
ये है सचः घाटी में आतंकी हमला हो या पत्थरबाजी, पाकिस्तान हमेशा भारत के खिलाफ साजिश रचता रहा है।

5. शिमला समझौते में तय हुआ था कि कश्मीर के मसले को दोनों देश बातचीत से हल करेंगे। कोई भी मुल्क एकतरफा फैसले से कश्मीर के मौजूदा सूरत-ए-हाल में कोई परिवर्तन नहीं करेगा। भारत का ये कदम शिमला समझौतों की तमाम शर्तों का उल्लंघन करता है।
ये है सचः पाकिस्तान इस मुद्दे को बातचीत के जरिए हल करने को लेकर कभी गंभीर नहीं रहा। पाकिस्तान हमेशा इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाता रहा है। हाल में उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने का रोना रोया था।

6. पाकिस्तान एक अमन पसंद मुल्क है और मैं इसे दोहराना चाहता हूं कि पाकिस्तान एक अमन पसंद मुल्क है। भारत बातचीत से कश्मीर मुद्दे का हल निकाले और हमारी अमन पसंदी को हमारी कमजोरी न समझे। हम कभी जंग की तमन्ना नहीं करते, लेकिन जंग थोपी जाए तो रास्ता जेहाद का ही रह जाता है।
ये है सचः कुछ माह पहले ही यूएनएससी ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कर खोल दी थी। हाल में पाक के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी सार्वजनिक तौर पर देश में चल रहे आतंकी शिविरों की बात स्वीकारी थी। आतंकी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान पर अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं।

7. जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने सियासी मामले सुलझाने के लिए रायशुमारी का हक हासिल है, लेकिन भारत ने अपनी हटधर्मी से कश्मीरियों को ये हक कभी इस्तेमाल नहीं करने दिया है।
ये है सचः पाक राष्ट्रपति के दावों के विपरीत वास्तविकता ये है कि जम्मू-कश्मीर में हमेशा से राज्य सरकार रही है और उन्हें पूरे अधिकार प्राप्त थे। अनुच्छेद-370 खत्म करने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद भी वहां विधानसभा का प्रावधान किया गया है। खुद पाकिस्तान अपने आतंकियों द्वारा घाटी के लोगों को मतदान करने से रोकता आया है। हाल के लोकसभा चुनावों में भी पाक आतंकियों ने घाटी में दहशत फैलाने का पूरा प्रयास किया।

8. पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों की हिमायत करता है। भारत ये बात न भूले कि कश्मीर के तीन पक्ष हैं, भारत-पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर की आवाम। ये बात तय शुदा है।
ये है सचः ये लाइन पढ़कर बोलते समय पाकिस्तानी राष्ट्रपति शायद एक वर्ष पहले की घटना को भूल गए, जब पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर के गिलगिट-बाल्टिस्तान के सभी अधिकार छीन लिए थे। विरोध करने पर लोगों पर सैन्य बल का प्रयोग किया गया था। गिलगिट-बल्टिस्तान के लोग अब भी पाकिस्तान में मिलानए जाने के विरोध में हैं।

9. अगर हम पर जंग थोपी गई तो ये जंग केवल दो मुल्को की जंग नहीं होगी, बल्कि पूरी दुनिया इसका असर महसूस करेगी। हम अब भी भारत सरकार को कहना चाहते हैं कि वह होश से काम ले और हालात को उस स्थिति में न ले जाए, जहां से वापसी मुमकिन न हो।
ये है सचः पाकिस्तानी राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को ये दावा करने से पहले भारत-पाकिस्तान के बीच पूर्व में हुए युद्धों का परिणाम देख लेना चाहिये था। खुद पाकिस्तानी संसद में विपक्ष के नेता आसिफ अली जरदारी और सरकार के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी स्वीकार चुके हैं कि दुनिया के बाकी देश तो दूर, मुस्लिम देश भी उनका साथ नहीं दे रहे हैं।

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10. पाकिस्तान राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने अपने भाषण की शुरूआत और अंत दोनों कश्मीर से ही किया। भाषण के अंत में उन्होंने कहा, 'मैं अपने कश्मीरी भाईयों को एक बार फिर ये यकीन दिलाना चाहता हूं कि पाकिस्तान हर फोरम पर इनका मुकदमा भरपूर कुव्वत से लड़ेगा और इनकी हिमायत से कभी भी पीछे नहीं हटेगा।'
ये है सचः मालूम हो कि पाकिस्तान कुछ दिन पहले ही इंटरनेशनल कोर्ट में कुलभूषण जाधव का केस हारा है। कश्मीर मुद्दे पर भी कोई देश उसकी आवाज सुनने को तैयार नहीं है।

11. नौ लाख सैनिकों की मौजूदगी की वजह से कश्मीर इस वक्त दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य क्षेत्र बना हुआ है। यहां अपनी आवाज उठाने का प्रयास कर रहे कश्मीरियों को गिरफ्तार किया जा रहा है। मोबाइल और इंटरनेट जैसी सेवाएं बंद कर भारत ओछे हथकंडे अपना रहा है।
ये है सचः राष्ट्रपति अपनी आवाम से जिस छद्म युद्ध की बात कह रहे हैं, दरअसल उसकी शुरूआत उन्होंने अपने भाषण से ही कर दी है। उन्होंने कश्मीर में नौ लाख सैनिकों की तैनाती का जो दावा किया है, वह एकदम गलत है। कश्मीर को दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य क्षेत्र बताने से पहले वह सीरिया और अफगानिस्तान जैसे तमाम इलाकों को भूल गए हैं।

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Posted By: Amit Singh