नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद-370 को हटाए जाने से बौखलाए पाकिस्‍तानी हुक्‍मरानों ने दुनिया भर में घूमकर भारत के खिलाफ लामबंदी की कोशिशें की लेकिन उन्‍हें किसी भी देश ने सीधी तौर पर भाव नहीं दिया है। यही नहीं संयुक्‍त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 74वें सत्र में दिए गए पाकिस्‍तानी पीएम इमरान खान के भाषण का भी विश्‍व संस्‍था पर कोई असर नहीं हुआ है। इससे पाकिस्‍तानी आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा (Qamar Javed Bajwa) और वजीर-ए-आजम इमरान खान की बेचैनी बढ़ गई थी। असल में पाकिस्‍तानी सरकार ने एक खास एजेंडे के तहत मलीहा लोधी को हटाकर मुनीर अकरम को संयुक्त राष्ट्र में देश का स्थाई प्रतिनिधि नियुक्त किया है। पेश है पेश है विशेषज्ञ प्रो. हर्ष वी. पंत के साथ बातचीत पर आ‍धारित 'मुनीर अकरम के विवादों' के साथ 'पाकिस्‍तान के नए एजेंडे' की पोल खोलने वाली दैनिक जागरण की द‍िलचस्‍प रिपोर्ट... 

गर्ल फ्रेंड ने मुनीर पर लगाए थे मारपीट के आरोप

जिन मुनीर अकरम (Munir Akram) को संयुक्त राष्ट्र में मलीहा लोधी की जगह पाकिस्तान का स्थाई प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है, उनका विवादों से काफी पुराना नाता रहा है। मुनीर अकरम पहले भी छह साल संयुक्‍त राष्‍ट्र में स्थाई प्रतिनिधि रह चुके हैं। साल 2003 में मुनीर अकरम के खिलाफ उनकी गर्ल फ्रेंड मरियाना मिहिक (Marijana Mihic) ने मेनहटन पुलिस में घरेलू हिंसा के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मुनीर अकरम तब पाकिस्‍तान के राजनयिक थे इसलिए न्‍यूयॉर्क की पुलिस ने गर्ल फ्रेंड से मारपीट के आरोप में उन्‍हें गिरफ्तार नहीं किया था। उस वक्‍त पाकिस्‍तान के दबाव में फरवरी 2003 में मामले की जांच ठंडे बस्‍ते में डाल दी गई थी। हालांकि, विश्‍व स्‍तर पर हो रही किरकिरी को देखते हुए पाकिस्‍तान ने 2003 में अकरम को वापस बुला लिया था।

डिप्‍लोमेटिक इम्‍यूनिटी हटाने तक की आ गई थी नौबत 

विदेश मामलों के विशेषज्ञ प्रो. हर्ष वी. पंत, पाकिस्‍तानी राजनयिक मुनीर अकरम (Munir Akram) के बारे में बड़ा दिलचस्‍प वाकया बताते हैं। प्रो. पंत ने बताया कि मुनीर अकरम और उनकी पूर्व गर्ल फ्रेंड मरियाना मिहिक (Marijana Mihic) के विवाद की प्राथमिक जांच में अमेरिकी एजेंसियों को जो सबूत मिले थे, उनमें काफी वजन था। अमेरिकी एजेंसियों ने पाकिस्‍तान से साफ शब्‍दों में कह दिया था कि मुनीर अकरम के खिलाफ आरोपों में इतना दम है कि इनकी डिप्‍लोमेटिक इम्‍यूनिटी (राजनयिक सुरक्षा) हटाने तक की नौबत आ गई है। इसके बाद तो पाकिस्‍तान के शीर्ष स्‍तर पर हड़कंप मच गया था। इससे पहले की अमेरिकी पुलिस मुनीर अकरम की गिरेबां तक पहुंच पाती पाकिस्‍तान ने रातोंरात उन्‍हें वापस बुला लिया था। पाकिस्‍तान शायद समझ गया था कि यदि मुनीर अकरम नपे तो विश्‍व बिरादरी में और भारी किरकिरी होगी।  

...तब आसिफ अली जरदारी ने कर दिया था बर्खास्‍त

मुनीर अकरम (Munir Akram) के पास विदेशों में पाकिस्‍तान के प्रतिनिधि के तौर पर लंबे वक्‍त तक काम करने का अनुभव रहा है। हालांकि, विवादों के कारण भी वह सुर्खियों में भी रहे हैं। उन्‍होंने आसिफ अली जरदारी के कार्यकाल में संयुक्त राष्ट्र में बेनजीर भुट्टो की हत्या का मामला उठा दिया था। इस बात पर आसिफ अली जरदारी भड़क गए थे और उन्‍हें बर्खास्‍त कर दिया था। कराची यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ लॉ की डिग्री हासिल करने वाले मुनीर अकरम ने 1968 पाकिस्‍तान सेंट्रल सुपीरियर सर्विस का इम्‍तिहान पास करके सिविल सर्विस की सेवा ज्‍वाइन की थी। उन्‍होंने संयुक्‍त राष्‍ट्र के जेनेवा मुख्‍यालय में 1995 से 2002 तक काम किया।

पाकिस्‍तानी प्रोपेगेंडा का अहम टूल रहे हैं मुनीर  

प्रो. हर्ष वी. पंत ने बताया कि 1990 के दशक में भारत अंदरूनी राजनीति में उलझा हुआ था। अपने बलबूते बहुमत की सरकारों के न होने से भारत विश्‍व पटल पर कश्‍मीर मसले का बचाव दमदार तरीके से नहीं कर पाता था। यह वह समय था जब पाकिस्‍तान विश्‍व पटल पर भारत के खिलाफ दुष्‍प्रचार के मामले में भारी पड़ता था। तब मुनीर अकरम (Munir Akram) पाकिस्‍तानी प्रोपेगेंडा की अहम कड़ी हुआ करते थे। वह भारत के खिलाफ दुष्‍प्रचार में माहिर थे। उन्‍होंने तब भारत की अंदरूनी कलह का फायदा उठाते हुए विश्‍व समुदाय को पाकिस्‍तान को अपने पक्ष में लामबंद करने में सफलता पाई थी।

मुनीर अकरम को यूएन भेजने के पीछे यह है पाकिस्‍तान का मंसूबा 

प्रो. पंत कहते हैं कि मौजूदा वक्‍त में पाकिस्‍तान पूरी दुनिया में अलग थलग पड़ चुका है। इमरान खान तक कह चुके हैं कि कश्‍मीर मसले पर कोई भी देश उनके साथ खड़े होने को तैयार नहीं है। ऐसे में पाकिस्‍तान का मानना है कि मुनीर अकरम भारत के खिलाफ उसका अहम प्रोपेगेंडा टूल हो सकते हैं। पाकिस्‍तानी हुक्‍मरानों को लगता है कि कश्‍मीर मसले पर भारत के खिलाफ अब प्रोपेगेंडा के जरिए ही कुछ किया जा सकता है। मुनीर अकरम विश्‍व बिरादरी को मोबलाइज करने में तुरुप का पत्‍ता साबित हो सकते हैं। वैसे अब तो समय ही बताएगा कि मुनीर अकरम पाकिस्‍तान के मकसद को कितना कामयाब बना पाते हैं... 

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Posted By: Krishna Bihari Singh

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