नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। साइकिल पर आम सा दिखाई देने वाले शख्‍स को देखकर कहीं आप भी तो धोखा नहीं खा गए। यदि ऐसा है तो अपनी भूल सुधार लिजिएगा। क्‍योंकि यह आम सा दिखाई देने वाला शख्‍स कोई और नहीं बलिक मार्टिन कोएब्‍लर है। मार्टिन पाकिस्‍तान में जर्मनी के राजदूत हैं। आपके लिए यह जानकारी बेहद चौकाने वाली हो सकती है, लेकिन ये सच है। मार्टिन दरअसल अपनी सादगी के लिए पहचाने जाते हैं। उन्‍हें अपनी सरकारी गाड़ी से चलने से बेहतर साइकिल पर चलना ज्‍यादा अच्‍छा लगता है। इसकी वजह ये भी है कि वह इसके जरिए वहां पर भी पहुंच जाते हैं जहां पर गाड़ी से जाना लगभग नामुमकिन होता है। आपको हैरानी इस बात को लेकर भी हो सकती है कि जिस पाकिस्‍तान को अधिकांश देश आतंकी बुलाते हैं वहां पर मार्टिन बिना किसी सुरक्षा घेरे के आम आदमी की तरह इस्‍लामाबाद की गलियों और बाजारों में घूमते दिखाई दे जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ उनके खास व्‍यक्ति होने से अंजान लोग उन्‍हें कोई सैलानी मानकर बड़ी हसरत से देखते हैं।

कई देशों में रह चुके हैं राजदूत
आगे बढ़ने से पहले आपको बता दें कि मार्टिन पाकिस्‍तान से पहले इराक और मिस्र में भी राजदूत रह चुके हैं। इसके अलावा वह लीबिया में संयुक्‍त राष्‍ट्र के स्‍पेशल रिप्रजेंटेटिव भी रह चुके हैं। मार्टिन कांगो समेत अफगानिस्‍तान में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं और यूएन के शांति मिशन में लगे जवानों के प्रमुख भी रह चुके हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि वह जर्मनी समेत अरबी, फ्रेंच, इंडोनेशियन और इंग्लिश भाषा को धारा-प्रवाह में बोलते हैं। यही वजह है कि उन्‍हें पाकिस्‍तान में देखकर लोगों को काफी हैरत होती है।

बहरहाल, हम आपको उनकी साइकिल में दिलचस्‍पी के बारे में बता रहे थे। आपको बता दें कि मार्टिन की आदत है कि वह जहां होते हैं वहां की बारिकी और देसी अंदाज को जीना पसंद करते हैं। इसमें उनकी मदद करती है उनकी पसंदीदा पीको साइकिल।

मशक्‍कत के बाद मिली पसंदीदा साइकिल
इस साइकिल को तलाशने के लिए उन्‍हें काफी मशक्‍कत भी करनी पड़ी। दरअसल, जर्मनी कंपनी की पीको साइकिल पाकिस्‍तान में शोहराब नाम से मिलती है। उनकी पसंदीदा साइकिल का रंग लाल है। काफी मशक्‍कत के बाद उन्‍हें यह साइकिल आखिरकार रावलपिंडी के बाजार में मिल गई। मार्टिन की खुशी का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि उन्‍होंने खुद ट्वीटर इस इस साइकिल के मिलने से हुई खुशी का इजहार किया था। उन्‍होंने ट्वीटर पर लिखा कि आखिरकार उन्हें लाल रंग की पीको बाइक मिल ही गई।

साइकिल मिलने के बाद उन्‍होंने इसे पाकिस्‍तान के ट्रकों पर बने चित्रों की तरह सजाने की ठानी। इसके लिए उन्‍हें कोई हुनरमंद चित्रकार चाहिए था जो उनकी साइकिल को भी उसी तरह से सजा सके। इसकी ही तलाश उन्‍हें हाजी परवेज के पास ले गई, जहां उनकी ये हसरत भी पूरी हो गई। परवेज ट्रकों की पेंटिंग के उस्ताद हैं। परवेज ने साइकिल के पैडल कवर को खूबसूरत चित्रों से रंग दिया। चित्र में वही चीजें बनाई गई हैं जो आम तौर पर पाकिस्तान के ट्रकों पर दिखती हैं।

खुशी पर किया ट्वीट
अपनी साइकिल को अपनी पसंद से सजाने के बाद उन्‍होंने ट्वीट कर लिखा कि उनकी पसंदीदा साइकिल ट्रक आर्ट के साथ अब पूरी तरह से तैयार है। वह पहले से ज्‍यादा प्‍यारी लग रही है और पिंडी की गलियों में वह काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं। उन्‍होंने लोगों से ये तक पूछा कि उन्‍हें और उनकी साइकिल पर बनी आर्ट के बारे में वह क्‍या सोच रहे हैं, उन्‍हें बताएं।

आपको हैरत होगी कि मार्टिन की यह जिंदादिली और लोगों से मिलने का अंदाज सभी को इस कदर भाया कि सोशल मीडिया पर उन्‍हें बधाई देने वालों का तांता लग गया। सभी ने उनकी जमकर तारीफ की। उनकी तारीफ करने वालों में भारत से लेकर ब्रिटेन तक के लोग शामिल थे। खुद जर्मनी दूतावास के बने फेसबुक पेज पर भी लोगों ने उन्‍हें बधाई संदेश भेजे हैं। कई लोगों ने उनके हुनर की तारीफ करने के अलावा उन्‍हें ईको फ्रैंडली भी बताया है। एक जर्मन राजदूत की खुलेआम साइकिल की सवारी से पाकिस्‍तान को भी अपनी छवि बदलने का मौका मिल गया है।

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Posted By: Kamal Verma

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