India-China Relation: भारत-चीन का अमेरिका को बड़ा संदेश, एक साथ चलेंगे हाथी और ड्रैगन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग की तियानजिन में हुई मुलाकात में सीमा विवाद के समाधान पर प्रतिबद्धता जताई गई। दोनों नेताओं ने सीधी उड़ान सेवा शुरू करने व्यापारिक संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने माना कि वैश्विक स्थिरता के लिए भारत-चीन की भूमिका महत्वपूर्ण है और मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। मोदी ने चिनफिंग को 2026 में भारत आने का न्योता दिया।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के बाद दो ध्रुवों में बंटी दुनिया के लिए हाथी और ड्रैगन की जुगलबंदी बड़ा संदेश दे रही है। रविवार को चीन के तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई बहुप्रतीक्षित मुलाकात में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का निष्पक्ष, न्यायसंगत और पारस्परिक तौर पर स्वीकार्य समाधान को लेकर प्रतिबद्धता जताई गई।
इसमें दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान सेवा शुरू करने, व्यापारिक संबंधों, वैश्विक मुद्दों और द्विपक्षीय हितों से जुड़े अन्य मुद्दों पर विस्तार से बात हुई। दोनों तरफ के कूटनीतिक सूत्रों ने बैठक को काफी सकारात्मक बताया। दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों ने मुलाकात को भारत-चीन संबंधों को नई दिशा व गति प्रदान करने वाला बताया।
वैश्विक माहौल में स्थिरता लाने के लिए भारत-चीन की भूमिका महत्वपूर्ण
दोनों नेताओं ने माना कि मौजूदा वैश्विक माहौल में स्थिरता लाने के लिए भारत-चीन की भूमिका महत्वपूर्ण है। एक वर्ष के भीतर दुनिया के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले और सबसे तेजी से बढ़नी वाली दो अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के बीच यह दूसरी मुलाकात थी। बैठक के लिए पहले 40 मिनट का समय तय था, लेकिन यह पूरे एक घंटे चली।
डिसइंगेजमेंट के बाद सीमा शांति और स्थिरता का माहौल- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी जापान की यात्रा के बाद शनिवार देर शाम तियानजिन (चीन) पहुंचे, जहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ है। बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'चीन में गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं आपका आभारी हूं। पिछले वर्ष कजान में हमारी मुलाकात ने हमारे संबंधों पर सकारात्मक असर डाला है। सीमा पर डिसइंगेजमेंट के बाद शांति और स्थिरता का माहौल बना हुआ है।'
'हमारे विशेष प्रतिनिधियों (एनएसए अजीत डोभाल व विदेश मंत्री वांग ई) के बीच सीमा प्रबंधन के संबंध में सहमति बनी हैं। कैलास मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हुई है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी फिर शुरू की जा रही हैं। परस्पर विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर हम अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।'
एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय भागीदार के रूप में देखना चाहिए- चिनफिंग
राष्ट्रपति चिनफिंग ने अपने भाषण में भारत-चीन संबंध सुधारने को रेखांकित करने के लिए एक बार फिर हाथी और ड्रैगन के साथ-साथ नृत्य करने की उपमा दी। पिछले दिनों जब उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखा था, तो उसमें भी इसका जिक्र था। हाल में विदेश मंत्री वांग ई ने अपनी भारत यात्रा के दौरान भी यही बात कही थी।
चीन की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति चिनफिंग ने कहा कि 70 वर्ष पहले दोनों देशों के नेताओं द्वारा प्रतिपादित पंचशील सिद्धांतों को संजोना और लागू करना आवश्यक है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति व स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि सीमा विवाद समग्र संबंधों को परिभाषित न करे। दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय भागीदार के रूप में देखना चाहिए।
टैरिफ को लेकर भी हुई बात
माना जा रहा है कि ट्रंप की शुल्क नीति से वैश्विक इकोनमी पर पड़ने वाले असर और इसको लेकर भारत व चीन की अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को लेकर भी दोनों के बीच चर्चा हुई। मोदी ने भी इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए कहा कि भारत सीमा मुद्दे पर निष्पक्ष, तर्कसंगत और दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है।
मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेता मानते हैं कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। भारत और चीन के लोगों के बीच आपसी सम्मान, हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर एक स्थिर संबंध व सहयोग, दोनों देशों के विकास व प्रगति के लिए आवश्यक है, साथ ही 21वीं सदी में एक बहुध्रुवीय विश्व व बहुध्रुवीय एशिया के लिए भी जरूरी है।
पीएम मोदी ने शी चिनफिंग को दिया भारत आने का न्योता
प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने समग्र द्विपक्षीय संबंधों और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों के राजनीतिक दृष्टिकोण से सीमा मुद्दे के निष्पक्ष, तर्कसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के लिए प्रतिबद्धता जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के राष्ट्रपति को वर्ष 2026 में भारत में होने वाले शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया।
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