नई दिल्ली। रायटर्स। चीन-ताइवान के बीच लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इस बीच ताइवान के रक्षा मंत्री चिउ कुओ-चेंग ने चीन को लेकर एक बड़ा दावा किया है। रक्षा मंत्री ने बुधवार को कहा कि चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य में एक अनौपचारिक मध्य रेखा को पार किया है।

चीन की इस हरकत ने ताइवान के साथ सैन्य गतिविधियों पर हुए मौन समझौते को नष्ट कर दिया है। ताइवान की संसद से चिउ ने कहा कि अगर चीन ने 'रेड लाइन' को पार किया तो ताइवान को प्रतिक्रिया देने पर मजबूर होना पड़ेगा।

चीन-ताइवान के बीच का विवाद

गौरतलब है कि अगस्त में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद चीन ने लगातार सैन्य अभ्यास कर ताइवान पर दबाव बनाने की कोशिश की थी। चीन जहां ताइवान को अपना प्रांत मानता है, वहीं ताइवान का कहना है कि वह कभी चीन का अंग नहीं रहा।

इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने भी चीन को लेकर एक बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि चीन ताइवान जलडमरूमध्य में यथास्थिति को बदलना चाहता है। एक मीडिया ब्रीफिंग में अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि कुछ समय के लिए यह स्पष्ट हो गया है कि एक पक्ष है जो यथास्थिति को बदलना चाहता है।

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मध्य रेखा पर हुआ था मौन समझौता

जानकारी के लिए बता दें कि मध्य रेखा को चीन और ताइवान के बीच एक मौन समझौता माना जाता है जिसे बुधवार को चीन ने नष्ट कर दिया। चीन ने आधाकारिक तौर पर कभी भी मध्य रेखा को मान्यता नहीं दी।

एक अमेरिकी जनरल ने 1954 में शीतयुद्ध के दौर में साम्यवादी चीन और अमेरिका समर्थित ताइवान के बीच यह रेखा खींची थी। हालांकि, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने समझौते का हमेशा सम्मान किया। लेकिन अब चीन के रेड लाइन को पार करने से ताइवान पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

क्या है मध्य रेखा

ताइवान की खाड़ी करीब 180 किलोमीटर चोड़ी है और इसका सबसे पतला हिस्सा और मध्य रेखा ताइवान के पानी से करीब 25 किलोमीटर दूर है। ताइवान अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ताइवान की जलसीमा के पास चीन की मौजूदगी ताइवान की सेना पर दबाव डाल रही है। इससे चीनी घेराबंदी और भी आसान हो जाएगी।

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चीन नहीं देता मध्य रेखा को मान्यता

चीन ने मध्य रेखा को लेकर कहा कि उसके सशस्त्र बलों को ताइवान के आसपास काम करने का अधिकार है क्योंकि यह चीनी क्षेत्र है। ताइवान ने चीन के संप्रभुता के दावों को खारिज करते हुए कहा कि चीन ने कभी ताइवान पर शासन नहीं किया है और केवल ताइवान के 23 मिलियन लोगों को अपना भविष्य तय करने का अधिकार है।

Edited By: Nidhi Avinash

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