नई दिल्‍ली [स्‍पेशल डेस्‍क]। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे के बीच 27 अप्रैल को शांति वार्ता होनी है। इसके अलावा मई में किम और डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच वार्ता होनी तय है। यह दोनों ही वार्ता बेहद अहम हैं, लेकिन इन दोनों वार्ताओं में एक देश अहम भूमिका निभाने वाला है। इस देश का नाम है 'चीन'। चीन, उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा कारोबारी देश है। अकेले 90 फीसद का कारोबार उत्तर कोरिया चीन से करता है। चीन से उसको हर जरूरी चीजों की आपूर्ति की जाती है। इस लिहाज से यहां के भविष्‍य को लेकर होने वाली वार्ता में चीन की अहम भूमिका होनी तय है।

किम के लिए चीन काफी अहम

गौरतलब है कि चीन के लिए ही उत्तर कोरिया अहम नहीं है बल्कि उत्तर कोरिया के लिए भी चीन काफी अहम है। ऐसा इसलिए भी है क्‍योंकि प्रतिबंधों के बावजूद चीन उसका साथ हर मौके पर देता रहा है। हालांकि चीन इस बात को भी कहता रहा है कि वह किम के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ है। चीन से उत्तर कोरिया का करीबी रिश्‍ता इस बात से भी समझा जा सकता है क्‍योंकि पिछले माह (25 मार्च से 28 मार्च) ही किम जोंग उन ने बीजिंग की यात्रा की थी। उनकी इस यात्रा का मकसद मून और ट्रंप से होने वाली आगामी वार्ता से पहले रणनीति बनाना ही था। किम के सत्ता में आने के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा भी थी। उन्‍होंने चीन की यात्रा भी इसलिए ही की थी क्‍योंकि वह उसकी अहमियत को पहचानते हैं।

निशस्‍त्रीकरण को तैयार किम

किम की इस यात्रा की जानकारी देते हुए चीन ने कहा था कि उत्तर कोरिया, कोरियाई प्रायद्वीप में शांति लाने, तनाव कम करने के साथ-साथ निशस्‍त्रीकरण के लिए भी पूरी तरह से तैयार है। इसके लिए दक्षिण कोरिया समेत अमेरिका को भी सकारात्‍मक रवैया अपनाना होगा। आपको बता दें कि चीन संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद का स्‍थायी सदस्‍य होने के साथ-साथ उत्तर कोरिया का पड़ोसी देश भी है। दोनों के बीच करीब 1420 किमी लंबी सीमा है। चीन की सरकार भी इस बात को मानती है कि वह आगामी वार्ता में अहम भूमिका निभा सकती है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन वार्ता के जरिए कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्‍थापित करने और तनाव कम करने को लेकर प्रतिबद्ध है।

चीन की जिलिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और को-इनोवेशन सेंटर फॉर कोरियन पेनिनसुला स्‍टडीज के रिसर्च फेलो वांग शेंग का कहना है कि किम और शी की बैठक के दौरान परमाणु निश्‍स्‍त्रीकरण के साथ-साथ चीन की भूमिका को लेकर भी सहमति बनी थी। इस दौरान यह आरोप भी लगे कि चीन कहीं न कहीं उत्तर कोरिया की छवि को कम कर रहा है और आगामी वार्ता को लेकर हार्डलाइन खींचने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका-दक्षिण कोरिया का रवैया

वांग का कहना है कि किम ने बीजिंग यात्रा के दौरान इस बात को साफ कर दिया था कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति को लेकर यदि दक्षिण कोरिया और अमेरिका सकारात्मक रवैया अपनाएंगे तभी यहां पर तनाव कम हो सकेगा। इसके लिए दोनों देशों को बेहतर वातावरण बनाना होगा, ये उनकी जिम्‍मेदारी है। इस बैठक के दौरान इस पर भी सहमति बनी कि आगामी वार्ता के दौरान उत्तर कोरिया की जरूरतों को भी ध्‍यान में जरूर रखा जाएगा। वांग मानते हैं कि मुश्किल हालातों में भी चीन उत्तर कोरिया की मदद कर सकता है। उनके मुताबिक कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्‍थापना को लेकर चीन की भूमिका को किसी भी सूरत से नकारा नहीं जा सकता है।

अमेरिका चीन में तनाव

उनके मुताबिक मौजूदा समय में चीन और अमेरिका के संबंधों में आए तनाव के बाद भी चीन उत्तर कोरिया की मदद को अग्रसर है। इसकी वजह यह भी है कि चीन अपने पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाने का हमेशा से ही हिमायती रहा है। वांग भी मानते हैं कि यदि आगामी वार्ता में दोनों देश सकारात्मक रवैया अपनाते हुए मेज पर बैठेंगे तो मुमकिन है कि यहां पर शांति स्‍थापित हो सके। इसके लिए यह भी जरूरी है कि दोनों एक दूसरे को सम्‍मान दें और उनकी जरूरतों का ख्‍याल भी रखें। इसके अलावा आपसी विश्‍वास और आपसी हित भी इस वार्ता में अहम कड़ी साबित होंगे। इनके अलावा परमाणु निश्‍स्‍त्रीकरण के मुद्दे पर भी दोनों देशों को गंभीरता से विचार करना जरूरी होगा।

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Posted By: Kamal Verma

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