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200 साल बाद क्यों चर्चा में आया मोनरो डॉक्ट्रिन? वेनेजुएला पर हमले के बाद ट्रंप ने किया जिक्र

Published: Mon, 05 Jan 2026 02:34 PM (IST)Updated: Mon, 05 Jan 2026 03:38 PM (IST)

वेनेजुएला पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 200 साल पुराने 'मोनरो सिद्धांत' का जिक्र किया। यह सिद्धांत ...और पढ़ें

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप। फोटो - रायटर्स

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप। फोटो - रायटर्स

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वेनेजुएला पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने एक बयान में 'मोनरो सिद्धांत' का जिक्र किया। 200 साल पुराना यह डॉक्ट्रिन कभी अमेरिका की विदेश नीति का अहम हिस्सा हुआ करता था। पिछली 2 शताब्दियों में अमेरिका ने कई बार इसी सिद्धांत का इस्तेमाल करते हुए दूसरे देशों पर शिकंजा कसा है।

अमेरिका फर्स्ट की नीति सही ठहराते हुए ट्रंप ने कहा, "मोनरो सिद्धांत भी यही कहता था। राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के अनुसार, पश्चिमी देशों में अमेरिका का ही बोलबाला होना चाहिए। कई दशकों से पुरानी सरकारों ने इसे नजरअंदाज किया, जिससे हमारी सुरक्षा खतरे में आ गई। मगर, अब हम फिर से अमेरिका को ताकतवर बनाने की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं।"

क्या है मोनरो सिद्धांत?

अमेरिका के 5वें राष्ट्रपति जेम्स मोनरो के कार्यकाल में विदेश नीति का नया डॉक्ट्रिन सामने आया। 1817-1825 तक के कार्यकाल में जेम्स मोनरो ने पश्चिमी देशों पर यूरोप के प्रभुत्व के खिलाफ मोनरो डॉक्ट्रिन पेश किया था। इसका उद्देश्य न सिर्फ यूरोपीय दखलअंदाजी को कम करना था, बल्कि दुनिया में अमेरिका का प्रभुत्व स्थापित करना भी था।

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप। फोटो - रायटर्स

यूरोप के खिलाफ हुआ था इस्तेमाल

1823 में संसद में भाषण के दौरान मोनरो ने कहा था कि पश्चिमी हिस्से के जो भी देश स्वतंत्र हो चुके हैं, यूरोप उनके मामलों में टांग नहीं अड़ाएगा। इसके बदले में अमेरिका ने यूरोपीय युद्धों और उनके आंतरिक मामलों में दखल ने देने का आश्वासन दिया था।

ये एक ऐसा समय था, जब लैटिन अमेरिकी देशों को आजादी मिली थी। मोनरो चाहते थे कि यूरोप दोबारा किसी भी देश पर अपना नियंत्रण हासिल न कर सके और इस पूरे महाद्वीप पर सिर्फ अमेरिका का वर्चस्व स्थापित रहे।

वेनेजुएला पर अमेरिका की नजर

'द मोनरो डॉक्ट्रिन: एम्पायर एंड नेशन इन नाइनटींथ-सेंचुरी अमेरिका' के लेखक सेक्स्टन कहते हैं, "वेनेजुएला हमेशा से मोनरो सिद्धांत के केंद्र में रहा है। 19वीं सदी से ही वेनेजुएला के संबंध कई देशों के साथ खराब रहे हैं। वेनेजुएला ने अक्सर अमेरिका के विरोधी देशों से दोस्ती करने की कोशिश की है। पहले यूरोपीय देशों ने भी वेनेजुएला में दिलचस्पी ली थी, लेकिन मोनरो सिद्धांत लागू होने के बाद लगभग 2 शताब्दियों से यहां अमेरिका का ही बोलबाला है।"

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप। फोटो - पीटीआई

शीतयुद्ध में भी टला संकट

1904 में राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने भी लैटिन अमेरिका में स्थिरता लाने के लिए अमेरिकी सरकार के हस्तक्षेप की बात कही थी। शीत युद्ध के समय भी मोनरो सिद्धांत के कारण 1962 का क्यूबा संकट टल गया था। अमेरिका के कहने पर सोवियत संघ (रूस) ने क्यूबा से परमाणु मिसाइलें हटा ली थीं।

मोनरो की राह पर चले ट्रंप

मोनरो सिद्धांत के तहत ट्रंप ने भी ड्रग तस्करी का आरोप लगाते हुए कैरिबियन सागर और पूर्वी प्रशांत महासागर में सेना तैनात की है। वेनेजुएला के खिलाफ सैन्य एक्शन, मादुरो की गिरफ्तारी समेत अन्य देशों को अल्टीमेटम देने जैसे कदम भी मोनरो सिद्धांत का ही हिस्सा हैं।

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