CIA की स्ट्रैटजी, 15 हजार सैनिक और... US Army ने मादुरो के 'अभेद्य किले' से कैसे किया गिरफ्तार? Inside story
अमेरिका के 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने की अंदरूनी कहानी बताई है। महीनों की ...और पढ़ें

US Army ने मादुरो के 'अभेद्य किले' से कैसे किया गिरफ्तार?

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के वेनेजुएला पर चलाए गए ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ की दुनियाभर में चर्चा हो रही है। इस ऑपरेशन को एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के तौर पर देखा जा रहा है तो, वहीं अमेरिका इसे स्पेशल फोर्सेस की असाधारण सफलता और ट्रंप के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा रहा है।
ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व
'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' नाम के इस ऑपरेशन में, मादुरो को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज द्वारा वेनेजुएला से निकालकर अमेरिका ले जाया गया, ताकि उस पर फेडरल ड्रग ट्रैफिकिंग के आरोप लगाए जा सकें। CIA के सीक्रेट मिशन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, CIA की एक टीम अगस्त में वेनेजुएला में दाखिल हुई थी, ताकि मादुरो के बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठा की जा सके।
मादुरो को ट्रंप प्रशासन ने नार्को-टेररिस्ट घोषित किया था। NYT की रिपोर्ट के अनुसार, कराकस में अमेरिकी दूतावास बंद होने की वजह से अधिकारियों ने बिना डिप्लोमैटिक कवर के काम किया।
इससे पहले, ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्होंने CIA को वेनेजुएला में गुप्त कार्रवाई करने की अनुमति दी है। जब पूछा गया कि क्या एजेंसी को 'मादुरो को खत्म करने' का निर्देश दिया गया था, तो राष्ट्रपति ने जवाब दिया कि इसका जवाब देना 'बेतुका' होगा।
चप्पे-चप्पे पर रखी गई नजर
एजेंसी ने मादुरो के एक करीबी से मिली खुफिया जानकारी को कराकस के ऊपर उड़ने वाले स्टील्थ ड्रोन से मिली निगरानी के साथ मिलाकर उनके डेली रूटीन की पूरी जानकारी तैयार की। इन सभी इनपुट से अमेरिकी एजेंसियों को मादुरो के डेली रूटीन का विस्तार से पता लगाने में मदद मिली।
CIA की टीम ने मदुरो के रूटीन जिसमें वह क्या खाते थे और यहां तक कि उन्होंने कौन से पालतू जानवर पाले थे, इसकी जानकारी इकट्ठा की। अधिकारियों ने कहा कि यह जानकारी आखिरकार मिलिट्री ऑपरेशन की प्लानिंग में मील का पत्थर साबित हुई।
मिलिट्री रिहर्सल और टारगेटिंग की थीं चुनौतियां
जैसे-जैसे इंटेलिजेंस इकट्ठा होती गई, डेल्टा फोर्स कमांडो ने केंटकी में जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड द्वारा बनाए गए मदुरो के कंपाउंड की फुल-स्केल कॉपी पर संभावित एक्सट्रैक्शन की रिहर्सल शुरू कर दी। ड्रिल में तेज़ी से एंट्री करने, मजबूत स्टील के दरवाजों को तोड़ने और कुछ ही मिनटों में स्ट्रक्चर को खाली करने पर ध्यान दिया गया।
NYT के अनुसार, मिशन में कई बड़ी चुनौतियां थीं। मदुरो अक्सर छह से आठ लोगों के साथ रहता था और देर शाम को तय करते थे कि वह कहां रुकेंगे? इसका मतलब था कि अमेरिकी प्लानर्स को रात होने से कुछ ही समय पहले तक उनकी लोकेशन की पक्की जानकारी नहीं होती थी, जिससे टारगेटिंग के फैसले मुश्किल हो जाते थे।
ऑपरेशन से पहले अमेरिका ने मदुरो पर दबाव बढ़ा दिया था। ऑपरेशन से एक हफ्ते पहले, CIA ने वेनेज़ुएला के एक पोर्ट पर ड्रोन हमला किया। अमेरिकी मिलिट्री ने महीनों तक कैरिबियन और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में एक कानूनी रूप से विवादित अभियान चलाया, जिसमें दर्जनों नावें नष्ट हो गईं और कम से कम 115 लोग मारे गए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मादुरो ने वेनेज़ुएला के तेल तक पहुंच देकर अमेरिकी हमले को टालने की कोशिश की।
मौसम की वजह से ऑपरेशन में देरी
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 25 दिसंबर को ही सेना को आगे बढ़ने की इजाजत दे दी थी, लेकिन आखिरी समय तय करने का काम पेंटागन के अधिकारियों और स्पेशल ऑपरेशंस प्लानर्स पर छोड़ दिया था। छुट्टियों का समय अनुकूल माना गया, क्योंकि कई वेनेजुएला के अधिकारी और सैन्यकर्मी छुट्टी पर थे। ऑपरेशन से कुछ दिन पहले, अमेरिका ने इलाके में अतिरिक्त स्पेशल ऑपरेशंस एयरक्राफ्ट, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्लेन, रीपर ड्रोन, सर्च-एंड-रेस्क्यू हेलीकॉप्टर और फाइटर जेट तैनात किए।
मौसम खराब की वजह से ऑपरेशन में कई दिनों की देरी हुई। ट्रंप ने मार-ए-लागो में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए कहा कि खराब मौसम के चलते ऑपरेशन में चार दिन की देरी हुई। जैसे ही हालात बेहतर हुए, कमांडरों ने टारगेट करने के मौकों पर नजर रखी। ट्रंप ने शुक्रवार रात 10.46 बजे मार-ए-लागो से हालात पर नजर रखते हुए आखिरी मंजूरी दी।
कैसे हुई ऑपरेशन की शुरुआत?
ऑपरेशन औपचारिक रूप से शुक्रवार शाम 4.30 बजे के आसपास शुरू हुआ। अगले कई घंटों तक, उन्होंने मौसम की स्थिति और मादुरो के ठिकाने पर नजर रखी गई।
ट्रंप ने शाम मारा-लागो में बिताई, जहां उनके सहयोगियों ने उन्हें बताया कि फाइनल अप्रूवल के लिए बाद में उनसे संपर्क किया जाएगा। उन्होंने फोन पर ऑर्डर दिया और फिर प्रॉपर्टी पर एक सुरक्षित कमरे में सीनियर नेशनल सिक्योरिटी अधिकारियों के साथ शामिल हुए, और ऑपरेशन को लाइव होते देखा।
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि वेनेजुएला के अंदर, ऑपरेशन एक साइबर हमले से शुरू हुआ जिसने काराकास के बड़े हिस्सों में बिजली काट दी, जिससे विमानों और हेलीकॉप्टरों को कम पता चलने पर पहुंचने में मदद मिली।
150 से ज्यादा अमेरिकी एयरक्राफ्ट ने किले को घेरा
20 बेस और नौसैनिक जहाजों से ड्रोन, फाइटर और बॉम्बर सहित 150 से ज़्यादा अमेरिकी विमानों ने उड़ान भरी। शनिवार की सुबह, अमेरिकी युद्धक विमानों ने वेनेजुएला के रडार और वायु रक्षा ठिकानों पर हमला किया।
हमलों के दौरान नागरिकों और सैन्य कर्मियों सहित कम से कम 40 लोग मारे गए। वायु रक्षा को दबाने के बावजूद, सुबह करीब 2.01 बजे (स्थानीय समय) मादुरो के कंपाउंड के पास पहुंचते ही अमेरिकी हेलीकॉप्टरों पर गोलियां चलाई गईं।
अधिकारियों ने बताया कि एक हेलीकॉप्टर को गोली लगी और लगभग आधा दर्जन अमेरिकी सैनिक घायल हो गए। डेल्टा फोर्स के ऑपरेटर ने विस्फोटकों का इस्तेमाल करके कंपाउंड में घुसपैठ की और कुछ ही मिनटों में मादुरो तक पहुंच गए। ट्रंप ने बाद में फॉक्स न्यूज पर कहा, 'मैंने इसे सचमुच ऐसे देखा जैसे मैं कोई टेलीविजन शो देख रहा था'
बिल्डिंग में घुसने के पांच मिनट के अंदर ही डेल्टा फोर्स ने बताया कि मादुरो को हिरासत में ले लिया गया है। उन्हें और उनकी पत्नी को हेलीकॉप्टर से ले जाया गया और सुबह 4.29 बजे कराकस टाइम के अनुसार कैरिबियन में मौजूद USS इवो जिमा पर ट्रांसफर कर दिया गया। वहां से उन्हें ग्वांतानामो की कड़ी ले जाया गया और फिर न्यूयॉर्क के पास एक मिलिट्री-कंट्रोल्ड एयरपोर्ट पर ले जाया गया।
Pretty amazing! Here is how the United States captured the President of one of the largest countries on earth 👀 pic.twitter.com/GE87b3NbtG
— Matt Wallace (@MattWallace888) January 5, 2026
