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    Bengal News: कलकत्ता हाई कोर्ट ने लश्कर के चार आतंकियों की फांसी की सजा पांच से 10 साल की जेल में बदली

    By Jagran NewsEdited By: Shashank Mishra
    Updated: Mon, 14 Nov 2022 11:42 PM (IST)

    Bengal News बीएसएफ ने 2007 में किया था गिरफ्तार निचली अदालत ने सुनाई थी चारों को फांसी की सजा लेकिन अब कलकत्ता हाई कोर्ट ने लश्कर-ए-तोयबा के चार आतंकियों की फांसी की सजा जेल में बदल दी है।

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    आतंकियों ने जितने दिन जेल में काटे हैं, उसे सजा की मियाद से घटा दिया जाएगा

    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने लश्कर-ए-तोयबा के चार आतंकियों की फांसी की सजा जेल में बदल दी है। न्यायाधीश जयमाल्य बागची व न्यायाधीश अनन्या बंद्योपाध्याय की खंडपीठ ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। मृत्युदंड से बचने वाले इन आतंकियों के नाम शेख नईम, शेख अब्दुल्ला उर्फ अली, मोहम्मद यूनुस और मोहम्मद अहमद राठेर हैं। शेख नईम महाराष्ट्र, शेख अब्दुल्ला और मोहम्मद यूनुस पाकिस्तान और मोहम्मद अहमद राठेर कश्मीर के रहने वाले हैं।

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    शेख नईम की फांसी की सजा 10 साल की जेल जबकि शेख अब्दुल्ला, मोहम्मद यूनुस पाकिस्तान और मोहम्मद अहमद राठेर को पांच साल की जेल में बदली गई है। शेख नईम पर 25,000 रुपये जबकि बाकी तीन पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि इन आतंकियों ने जितने दिन जेल में काट लिए हैं, उसे सजा की मियाद से घटा दिया जाए।

    उस लिहाज से सभी की सजा पूरी हो चुकी है। चूंकि शेख नईम के खिलाफ दिल्ली की अदालत में भी एक मुकदमा चल रहा है इसलिए उसे अभी रिहाई मिलने की उम्मीद नहीं है। शेख अब्दुल्ला और मोहम्मद यूनुस को पाकिस्तान भेजा जा सकता है। मोहम्मद अहमद राठेर को भी जल्द रिहा किया जा सकता है।

    सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने इन चारों को 2007 में बंगाल से लगी बांग्लादेश की सीमा पर पेट्रापोल इलाके के एक परित्यक्त घर से गिरफ्तार किया था। उनके पास से भारी तादाद में विस्फोटक व भारत के कुछ महत्वपूर्ण स्थानों के मानचित्र बरामद हुए थे। उनके खिलाफ 2012 में बनगांव की अदालत में मुकदमा शुरू हुआ था और बाद में फांसी की सजा सुनाई गई थी।

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    उन्होंने इस फैसले को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसपर यह फैसला आया है। खंडपीठ ने कहा कि जो प्रमाण मिले हैं, वह बताते हैं कि ये चारों आतंकी संगठन के प्रमुख सदस्य नहीं बल्कि 'फुट सोल्जर थे। उन्हें लालच दिखाकर अथवा दबाव डालकर आतंकी संगठन की गतिविधियों में शामिल किया गया था। अब उनके आतंकवाद के रास्ते पर लौटने की संभावना भी बहुत कम है।

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