अतिथियों के कदम पड़ते ही उनकी आव-भगत में जुटता है उत्तराखंड का यह गांव, कहलाया Adventure Tourism का गढ़
Adventure Tourism Hub उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले का जखोल गांव साहसिक पर्यटन के शौकीनों के लिए स्वर्ग है। ट्रेकिंग कैंपिंग हाइकिंग बर्ड वाचिंग और फोटोग्राफी का आनंद लें। सर्दियों में बर्फ की सफेद चादर और गर्मियों में फूलों से गुलजार रहने वाले इस गांव में आतिथ्य की संस्कृति है। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और लोकनृत्य के साथ स्वागत किया जाता है।

शैलेंद्र गोदियाल, जागरण हरिद्वार। Adventure Tourism Hub: साहसिक पर्यटन के शौकीनों के लिए उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले का जखोल गांव किसी नेमत से कम नहीं। यहां आप टूर के साथ ट्रेकिंग, कैंपिंग, हाइकिंग, बर्ड वाचिंग और फोटोग्राफी का आनंद उठा सकते हैं।
सर्दी हो या गर्मी, राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ साहसिक पर्यटन ग्राम के पुरस्कार से अलंकृत यह गांव हर मौसम में सैर के लिए अनुकूल है। यहां के आठ रोमांचकारी ट्रेक उत्साह से भर देते हैं। शीतकाल में इन पर बर्फ की सफेद चादर बिछी होती है तो अप्रैल से लेकर नवंबर तक फूलों से गुलजार रहते हैं।
घरों से निगाहें हटने का नाम नहीं लेतीं
सांस्कृतिक विरासत एवं परंपराओं को समेटे इस गांव में सेब के बागीचों के बीच बने देवदार की लकड़ी पर सुंदर नक्काशी वाले घरों से निगाहें हटने का नाम नहीं लेतीं। आतिथ्य यहां की संस्कृति में है। पर्यटकों का स्वागत ग्रामीण पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाकर और पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्य के साथ करते हैं। पर्यटक चाहें तो वह भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
सरूताल ट्रेक: तीन किमी लंबा यह ट्रेक जखोल गांव से शुरू होता है। गांव और खेतों के बीच से होकर सरूताल पहुंचने वाला यह ट्रेक ग्रामीण परिवेश के दर्शन भी कराता है। समुद्रतल से 2,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सरूताल में छोटा-सा तालाब है। हर वर्ष अगस्त में सरूताल के पास मेला लगता है।
लेकाटाप ट्रेक: जखोल से लेकाटाप ट्रेक करीब चार किमी है। लेकाटाप से हरकीदून घाटी, केदारकांठा टाप, स्वर्गारोहिणी चोटी, काला नाग चोटी सहित हिमालय की पूरी रेंज दिखती है। साथ में सुपीन घाटी के सुंदर गांव भी नजर आते हैं। लेकाटाप समुद्रतल से 3,000 मीटर ऊंचाई पर है।
विजयटाप ट्रेक: इस ट्रेक पर भरपूर प्राकृतिक शृंगार है। इस ट्रेक पर भितरी गांव से जाते हैं, जो जखोल से थोड़ी ही दूर है। लगभग 13 किलोमीटर लंबे इस ट्रेक की ऊंचाई 3,800 मीटर है।
भराड़सर ताल: सुपीन घाटी के सबसे खूबसूरत स्थलों में शामिल है भराड़सर ताल। सुपीन नदी का उद्गम स्थल इसी क्षेत्र में है। यहां उत्तरकाशी की सुपीन घाटी, रुपीन घाटी के अलावा हिमाचल प्रदेश से श्रद्धालु देव डोलियों को स्नान कराने लेकर आते हैं। भराड़सर की ऊंचाई 4,200 मीटर है और यह ट्रेक 18 किमी लंबा।
देवक्यारा ट्रेक: करीब 13 किमी लंबा यह ट्रेक जखोल के निकट कासला गांव से शुरू होता है। देवक्यारा की ऊंचाई 3,500 मीटर है। इस ट्रेक पर सुंदर सुराल बुग्याल (मखमली घास का मैदान) का भी दीदार होता है।
झंडी टाप: सुपीन घाटी में समुद्रतल से करीब 3,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित झंडी टाप नया पर्यटन स्थल है। करीब आठ किमी लंबे इस ट्रेक पर जखोल से कुछ ही दूर स्थित कासला व फिताड़ी गांव से जाते हैं।
ऐसे पहुंचें
- समुद्रतल से करीब 2,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित जखोल गांव मोरी ब्लाक की सुपीन घाटी में है।
- जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से जखोल की दूरी 190 किमी, जबकि देहरादून से 220 किमी है।
- दोनों ही केंद्रों से यहां के लिए सड़क व संचार की सुविधा उपलब्ध है।
- देहरादून तक सड़क के साथ ही रेल और हवाई यातायात से पहुंचा जाता है।
100 से अधिक होमस्टे
जखोल सुपीन घाटी का सबसे बड़ा गांव होने के साथ ही लोक संस्कृति का केंद्र भी है। घाटी के 22 गांवों के आराध्य देवता सोमेश्वर का इस गांव में खूबसूरत पौराणिक मंदिर है। लगभग 350 परिवार वाले जखोल गांव में 200 परिवार पर्यटन से जुड़े हैं। यहां की पारंपरिक भवन शैली मन मोह लेती है। पर्यटकों के ठहरने के लिए जखोल में पारंपरिक शैली के 100 से अधिक होमस्टे हैं। सभी घर और होमस्टे देवदार की लकड़ी से बने हैं।
पहाड़ी स्वाद
यहां हर घर और होमस्टे में सोंधी महक वाली गंदरायण (चोरु) की चाय, रामदाने का हलुवा, मंडुवा, रामदाना व फाफरे की रोटी, कंडाली का साग, राजमा की दाल, पहाड़ी आलू के गुटके, लाल चावल, भेतू की खीर (भेत्वाड़ी), मंडुवा और चावल का मिक्स पकवान जग्लाड़ी, स्थानीय मशरूम, दाल के पकौड़े, मीठी रोटी और गाय के घी का लाजवाब स्वाद मिल जाएगा। आप मनचाहे व्यंजनों का लुत्फ भी उठा सकते हैं।
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