रुद्रप्रयाग, बृजेश भट्ट। इस बार देश-दुनिया से केदारनाथ धाम आने वाले यात्री पहाड़ी व्यंजनों का लुत्फ भी उठा सकेंगे। इसके लिए प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। यात्रियों को हाट बाजार में पहाड़ी व्यंजनों के साथ पहाड़ी संस्कृति के भी दर्शन कराए जाएंगे। इससे जहां देश-दुनिया में पहाड़ी व्यंजनों का ब्रांडिंग होगी, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। वहीं, प्रशासन केदारनाथ में यात्रा की तैयारियों में जुटा है।  

केदारनाथ यात्रा आगामी नौ मई से शुरू हो रही है। इसके लिए प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। तय हुआ है कि इस बार यात्रियों को भोजन में स्थानीय उत्पादों से बने पहाड़ी व्यंजन परोसे जाएंगे। इसके लिए केदारनाथ बेस कैंप में हाट बाजार बनाया गया है। सभी दुकानें प्रशासन की ओर से स्थानीय युवाओं व व्यापारियों को आवंटित की गई हैं। 

इसके पीछे ध्येय यात्रियों को पहाड़ की संस्कृति एवं परंपराओं से परिचित कराना है। इसके अलावा पहाड़ में तैयार होने वाले विभिन्न उत्पादों और पारंपरिक वस्त्रों की बिक्री के लिए भी केदारनाथ में हाट बाजार लगाया जाएगा। 

बता दें कि रुद्रप्रयाग जिले में दो हजार से अधिक महिला समूहों के साथ महिला मंगल दल व अन्य संगठन गांव-गांव जाकर पहाड़ी उत्पाद एकत्र कर रहे हैं। इसके लिए प्रशासन की ओर सोनप्रयाग व केदारनाथ में कलेक्शन सेंटर बनाए भी बनाए गए हैं। 

साथ ही केदारघाटी के होटलों को अपने मेन्यू में पहाड़ी व्यंजन शामिल करने के लिए प्रशासन की ओर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जा रहे हैं। जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल के अनुसार हाट बाजार में स्थानीय उत्पादों से तैयार व्यंजनों की बिक्री से सीधे-सीधे स्थानीय काश्तकार लाभान्वित होंगे। साथ ही पहाड़ी उत्पादों की मांग बढऩे से परंपराओं का संरक्षण भी होगा। 

पहाड़ी व्यंजनों का मेन्यू तैयार 

यात्रा सीजन के लिए प्रशासन की ओर से पहाड़ी व्यंजनों का मेन्यू तैयार कर लिया गया है। इसमें मंडुवे की रोटी, लहसुन की चटनी, गहत की दाल व फाणू, उड़द की दाल का चैंसू, झंगोरे की खीर, लाल भात (चावल) जैसे पारंपरिक व्यंजन शामिल हैं। इसके अलावा धाम में मिलने वाला प्रसाद भी स्थानीय उत्पादों से ही तैयार किया जाएगा। 

केदारनाथ मंदिर परिसर में तेजी से चल रहा बर्फ हटाने का कार्य

केदारनाथ मंदिर परिसर से बर्फ हटाने का कार्य मंदिर समिति के कर्मचारी जुटे हुए हैं, धाम में लगातार मौसम खराब होने के कारण बर्फ हटाने में दिक्कतें आ रही हैं। वहीं समिति के विश्राम गृहों की साफ-सफाई रंग-रोगन, यात्री शैडों की मरम्मत, मंदिर परिसर में विद्युत व पेयजल की बहाली का कार्य भी मंदिर समिति द्वारा किया जा रहा है। 

मंदिर समिति के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी ने कहा कि केदारनाथ में मंदिर समिति का 43 सदस्यीय अग्रिम दल यात्रा तैयारियों में जुटा हुआ है। कपाट खुलने तक व्यवस्थाओं को सुचारू कर दिया जाएगा। धाम में विगत दिनों रुक-रुककर बर्फबारी हो रही है, इसके बावजूद मंदिर समिति का अग्रिम दल मंदिर परिसर एवं आसपास से बर्फ हटाने में जुटा हुआ है। 

मंदिर समिति का कार्यालय, भंडार, पुजारी निवास हेतु बने फेब्रिकेटेड हट पूर्णत: क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर से दस दिन के भीतर बर्फ हटाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन पिछले तीन दिनों से हुई जोरदार बर्फबारी के कारण कार्य में व्यवधान हो रहा है। 

वहीं मंदिर परिसर में विद्युत आपूर्ति सुचारु करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं, मंदिर समिति के पावर हाउस के आस पास से बर्फ हटाई जा रही है, और पावर हाउस की चे¨कग की जा रही है। मंदिर समिति की क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन को भी ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है। 

प्रशासन की टीम भी केदारनाथ पैदल मार्ग से बर्फ हटाने का कार्य कर रही है। अब तक 15 किमी पैदल मार्ग से बर्फ हटा दी गई है, और पंद्रह किमी पैदल मार्ग पर आवाजाही सुचारू कर दी गई है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी हरीश चन्द्र ने बताया कि अब मात्र एक किमी पैदल मार्ग से बर्फ हटाई जानी है, यदि मौसम ठीक रहा तो दो दिन के भीतर बर्फ हटा दी जाएगी।

बर्फबारी से जीएमवीएन की 21 हट्स को नुकसान

बर्फबारी से केदारनाथ धाम में जीएमवीएन और जिला प्रशासन की 21 हट्स पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन सभी हट्स को अब नए सिरे से बनाने की कवायद चल रही है। इसके लिए दस सदस्यीय इंजीनियरों की टीम केदारनाथ धाम रवाना होगी। इसके अलावा चारधाम यात्रा रूट पर भी बंगलों के नुकसान और मरम्मत का काम कपाट खुलने से पहले पूरा किया जाएगा।

गढ़वाल मंडल विकास निगम की चार टीमें 15 अप्रैल को चारों धाम में बर्फबारी से हुए नुकसान का आकलन करने गई थीं। सभी टीमें वापस लौट आई हैं। टीमों ने जो रिपोर्ट एमडी को सौंपी है, उसमें नुकसान का विस्तृत ब्यौरा दिया गया। एमडी ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि केदारनाथ धाम के लिंचौली में निगम की 21 में से 17 और जिला प्रशासन की करीब चार हट्स को नुकसान हुआ है।

इसके अलावा केदारनाथ धाम में कुछ हट्स के बरामदे और छतों को नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि केदारनाथ धाम में हट्स बनाने के लिए इंजीनियर और मजदूरों की टीमें बना दी हैं। प्रथम चरण में बर्फ हटाने का काम शुरू होगा। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। इधर, बर्फ ज्यादा होने से भोजवासा तक टीम नहीं पहुंच पाई है। 

वहीं, गंगोत्री धाम से आगे कई जगह बर्फ से रास्ता भी टूट गया है। इस कारण टीम को आधे रास्ते से वापस लौटना पड़ा। जबकि गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ धाम में कोई नुकसान नहीं हुआ है।

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Posted By: Bhanu

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