बागेश्वर, जेएनएन : चरस तस्करी के मामले में बागेश्वर के विशेष सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी ने एक अभियुक्त को दस साल की सश्रम करावास की सजा सुनाई है। अभियुक्त पर एक लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता चंचल पपोला ने मामले की पैरवी की। मामले के अनुसार 21 सितंबर 2018 की रात करीब 2.45 बजे एक व्यक्ति को जजी तिराहे पर नदीगांव की ओर से अमसरकोट की तरफ जाते देखा गया था। व्यक्ति के हाथ में नीले रंग का झोला था। युवक के पास से 1.011 किलो चरस प्राप्त हुई थी।

 

दस गवाह कराए गए परीक्षित

बरामद माल को विधि विज्ञान से परीक्षण करवाया गया। जिसमें बरामद माल का चरस होना सिद्ध हुआ। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से एसआइ महेंद्र प्रसाद सहित दस गवाह परीक्षित कराए गए। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से परीक्षित कराए गए साक्षियों के साक्ष्य व विधि विज्ञान प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर अभियुक्त पुष्कर सिंह निवासी बाछम, कपकोट को दोषी पाते हुए दस साल का सश्रम करावास और एक लाख रुपये का जुर्माने से दंडित किया गया।

 

अल्मोड़ा जेल भेजा गया अभियुक्त

चरस तस्करी के अभियुक्त को आरोप सिद्ध होने के बाद अल्मोड़ा जेल भेजने के आदेश पारित किए गए।  गवाहों को परीक्षित कराने व पैरवी में जिला शासकीय कार्यालय नवीन लाल और पैरोकार जितेंद्र तिवारी का विशेष सहयोग रहा।

 

चरस तस्करी का गढ़ रहा है पहाड़

कुमाऊं के पर्वतीय जिलों के रास्ते चरस तस्करी के मामले पकड़ में आते रहे हैं। नेपाल सीमा से लगे होने के कारण देश के बाहर चरस भेजने की कई घटनाएं सामने आई है। प्रतिबंधित चरस को नशे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। जानकारों की मानें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चरस की कीमत लाखों में है।

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Posted By: Skand Shukla

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