हल्द्वानी, जेएनएन : भीषण गर्मी के बीच सभी को मानसून का इंतजार है, लेकिन उत्तराखंड के लोगों का इंतजार इस बार थोड़ा लंबा होने वाला है। मौसम विभाग ने प्रदेश में मानसून के आठ दिन देरी से यानी एक जुलाई को आने की संभावना जताई है, जबकि अमूमन यह 22-23 जून तक पहुंचता है। पिछले दस वर्षों में चार बार ऐसा हुआ है, जब मानसून जुलाई में उत्तराखंड पहुंचा।
2010 व 2012 में सर्वाधिक देरी (5 जुलाई) से इसने प्रदेश में दस्तक दी थी। इस बार यह पांचवां मौका होगा जब यह जुलाई में आएगा। दूसरी ओर 2013 में सर्वाधिक जल्दी (15 जून) मानसून पहुंचा था, तब प्रदेश में आपदा ने जमकर कहर बरपाया था। मानसून में देरी की वजह मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में मई तक अलनीनो का असर बना रहा। इसके चलते उत्तर भारत में मानसून में विलंब होगा। उत्तराखंड में मानसून की बारिश सामान्य से चार फीसद तक कम हो सकती है। हालांकि चार फीसद अधिक या कम बारिश को सामान्य श्रेणी में रखा जाता है। प्रदेश में मानसून के दौरान औसतन 1229 मिमी बारिश होती है।

उत्तराखंड में मानसून का आगमन

वर्ष              तिथि

2009          29 जून

2010         05 जुलाई

2011         20 जून

2012        05 जुलाई

2013       15 जून

2014       01 जुलाई

2015       24 जून

2016       21 जून

2017     01 जुलाई

2018     30 जून बीते सप्ताह 14 फीसद कम हुई बारिश भीषण गर्मी के बीच प्री मानसून बारिश की कमी ने भी लोगों की मुसीबत बढ़ाई है। पांच जून को बीते सप्ताह के दौरान प्रदेश में सामान्य से 14 फीसद कम बारिश हुई।

बेहाल : फिर 40 डिग्री पार पहुंचा पारा
तराई-भाबर में सूरज सुबह से ही तल्ख तेवर दिखाने लगा है। चिलचिलाती धूप में सड़कों पर चहल-पहल कम रह रही है। सोमवार को हल्द्वानी का अधिकतम तापमान 40.4 डिग्री और न्यूनतम 26.7 डिग्री रहा। अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री अधिक है। वहीं नैनीताल में अधिकतम व न्यूनतम तापमान क्रमश: 28.1 व 19.0 डिग्री सेल्सियस रहा। मुक्तेश्वर में अधिकतम पारा 29.3 डिग्री व न्यूनतम 16.3 डिग्री पहुंच गया है।

पूर्वानुमान : मौसम में मामूली बदलाव
देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के मुताबिक हल्के बादल छाने के आसार हैं। मैदानी इलाकों में गर्मी से किसी तरह की राहत की उम्मीद नहीं है। पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ जगह हल्की बारिश व ओलावृष्टि हो सकती है।
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