भविष्य में प्रदूषण के खिलाफ जंग लड़ेगी पेड़ों की सेना, 300 हेक्टेयर से ज्यादा वन क्षेत्रों में होगा प्लांटेशन
वन विभाग भविष्य में बढ़ते प्रदूषण के खतरे से निपटने के लिए हरियाली बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। पश्चिमी वृत्त के पांचों वन प्रभागों में करीब 20 ...और पढ़ें

पश्चिमी वृत्त के पांचों वन प्रभागों में करीब दो हजार हेक्टेयर में जंगल की हरियाली बढ़ाने के लिए प्लांटेशन पर फोकस। प्रतीकात्मक
जागरण संवाददाता, रामनगर। बढ़ते शहरीकरण व घटते हरित क्षेत्रों की वजह से भविष्य में पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बढ़ेगा। तेजी से हवा जहरीली होती जा रही है। ऐसे में वन विभाग ने इस समस्या से निपटने के लिए भविष्य में प्रदूषण के खतरे को देखते हुए हरियाली बढ़ाने पर फोकस किया है।
तेजी से लगते उद्योग, बढ़ते परिवहन सुविधा, तेजी से बढ़ते खनन, ढांचागत सुविधाओं का निर्माण, वनों की कटाई व शहरीकरण के फैलते जाल पर्यावरण प्रदूषण की वजह मानी जाती है। ऐसे में वन विभाग का मानना है कि अधिक से अधिक क्षेत्रों में हरियाली फैलाकर ही भविष्य के प्रदूषण के खतरों से निपटा जा सकता है। वन विभाग की ओर से तराई पश्चिमी वन प्रभाग, रामनगर वन प्रभाग, हल्द्वानी वन प्रभाग, तराई केंद्रीय वन प्रभाग, तराई पूर्वी वन प्रभागों में अधिक से अधिक प्लांटेशन लगाने की तैयारी चल रही है।
करीब दो हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र में पौधे लगाकर जंगल की हरियाली बढ़ाई जाएगी। एक ही प्रजाति के बजाय मिश्रित प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। वन विभाग के वन सरंक्षक पश्चिम वृत्त साकेत बडोला ने बताया कि वन प्रभागों ने अपने-अपने क्षेत्रों में प्लांटेशन के लिए जगह का भी चयन कर लिया है। इसके अलावा लोगों को पर्यावरण से जोड़ने, जागरूक करने व हरियाली बढ़ाने के लिए तराई पूर्वी वन प्रभाग के अंतर्गत खटीमा में सिटी फारेस्ट विकसित करने जा रहा है। इसके अलावा तराई केंद्रीय केंद्र वन प्रभाग के संजय वन में सुधार किया जा रहा है। वहां माडल नरसरी बनाई जा रही है। ताकि हरेले में लोगों को पौधे वितरित किया जा सके।
यह भी कर रहे पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी
रामनगर: क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए कई सालों से काम कर रही कल्पतरु वृक्ष मित्र संस्था ढाई हेक्टेयर वन क्षेत्र में पौधों को लगाने से लेकर पेड़ होने तक उनका संरक्षण करती है। शादियों में निशुल्क पौधे वितरित करने के बाद अब समिति अब पौधों को प्रसाद के रूप में वितरित करेगी। संस्था के अध्यक्ष अतुल मेहरोत्रा ने बताया कि रामायण व भागवत कथा में पौधे दिए जाएंगे।व्यास पीठ के समीप पौधे रखने के बाद परायण के दिन व्यास के हाथों प्रसाद के साथ ही पौधे भी वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा किसी की मृत्यु होने पर उनकी राख को मिटटी में मिलाकर स्मृति में एक पौधा लगाया जाएगा। इससे पर्यावरण के प्रति लोग जागरूक होंगे।
पर्यावरण सखियां भी निभा रही भूमिका
रामनगर: कार्बेट से लगे वन क्षेत्रों में वेस्ट वारियर्स की पहल से गांव की 25 महिलाएं पर्यावरण सखी बनकर पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही है। ताकि गंदगी, कूड़ा करकट जंगल के आसपास न फैल सके। गांव की पर्यावरण सखियां 12 ग्राम पंचायतों के घरों से अजैविक कूड़ा एकत्र कर एमआरएफ सेंटर में उसका पृथकीकरण करती हैं।
संस्था से जुड़ी मिताली ने बताया कि इस साल कूड़ा एकत्रीकरण करने के लिए गांवों का विस्तार किया जाएगा। साथ ही अब घरों व होटलों से उत्पादित होने वाले गीले कूड़े को भी पर्यावरण सखियां एकत्र कर उसका निस्तारण करेगी। पर्यावरण सखियों को घर-घर से कूड़ा उठाने पर मिलने वाले शुल्क, कूड़ा बिक्री से मेहनताना मिलता है। उसमें संस्था भी वित्तीय मदद करती है।

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