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    लॉकडाउन में टूट गई फूल कारोबारियों की कमर, शादी-ब्याह टलने व मंदिरों के बंद होने से ठप हुई डिमांड

    By Skand ShuklaEdited By:
    Updated: Thu, 09 Apr 2020 02:55 PM (IST)

    कोरोना वायरस के संक्रमण ने कॉमर्शियल खेती करने वालोें को भी काफी हद तक प्रभावित किया है। सबकुछ ठप हो जाने के कारण फूल कारोबारियों की कमर टूट गई है।

    लॉकडाउन में टूट गई फूल कारोबारियों की कमर, शादी-ब्याह टलने व मंदिरों के बंद होने से ठप हुई डिमांड

    हल्द्वानी, जेएनएन : कोरोना वायरस के संक्रमण ने कॉमर्शियल खेती करने वालोें को भी काफी हद तक प्रभावित किया है। सबकुछ ठप हो जाने के कारण फूल कारोबारियों की कमर टूट गई है। नैनीताल जिले में तकरीबन 50 एकड़ भूमि पर फूलों की खेती होती है। इससे बहुत सारे किसानों और छोटे कारोबारियों की रोजी रोटी चलती है। लेकिन कोरोना के खौफ में जारी लॉकडाउन ने इनको बेबश कर दिया है।

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    विवाह-शादियों का सीजन था और किसानों को उम्मीद थी कि उनके उगाए गए फूलों की अच्छी-खासी कीमत मिलेगी और मुनाफा भी होगा, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन ने इन किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। आलम यह है कि बाजार में जो फूल पहले 100 रुपये प्रति स्टिक खरीदे जाते थे उन फूलों को आज 25 रुपये प्रति स्टिक में भी खरीदने वाला कोई नहीं है।

    दिल्ली, जयपुर, चंडीगढ़ व लखनऊ तक महकते हैं पहाड़ की फूल

    चापी के फूल कारोबारी दुर्गादत्त उप्रेती ने बताया कि हर साल सीजन में पहाड़ से मैदानी इलाकों जैसे दिल्ली, जयपुर, चंडीगढ़, मुंबई, लखनऊ आदि तक ट्रेनों के सहारे फूल भेजे जाते थे। वहीं पिछले वर्ष करीब 10 करोड़ का जिले भर में व्यापार किया गया था। लेकिन इस बार सारा कारोबार ठप हो गया। फूलों की खेती खेतों में ही सूख रही है। वहीं व्यापार चौपट होने से किसानों के सामने रोजी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है।

    फूलों की खेती करने वालों को मिले आर्थिक मदद

    किसान मनोज नेगी ने बताया कि देशभर में लॉक डाउन के चलते फूलों की खेती पर बुरा प्रभाव पड़ा है। प्रदेशभर में मंदिर बंद हैं, विवाह व अन्य सामाजिक समारोहों पर रोक लगी है। ऐसे में जिन किसानों ने अपनी फूलों की पैदावार की थी वह बर्बादी की कगार पर हैं। हालात ये है कि किसानों को फूल फेंकने पड़ रहे हैं। ऐसे में सरकार उनकी भी सुध ले और आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाए।

    शादी-विवाह के मौसम में थी मुनाफे की उम्मीद

    भवाली के फूल कारोबारी मनोज नेगी बताया की ऐसे कई किसान हैं जो फूलों की खेती करते हैं। विवाह-शादियों के सीजन के दौरान इनके द्वारा उगाए फूलों की विशेष मांग रहती है। इससे किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है। इस बार भी फूलों की खेती करने वाले किसानों को उम्मीद थी कि अच्छी कमाई होगी, लेकिन देशभर में फैले कोरोना संक्रमण ने सबकुछ बर्बाद कर रख दिया है।

    फूलों के पौधे अब उखाड़े जा रहे

    किसान चंद्रशेखर सिंह के मुताबिक गुलाब के फूल 70 से 80 रुपये, ग्लाइड के फूल 150 से 200 रुपये प्रति बंडल तथा व्हाइट फूल 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता था। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण फूलों की मांग जीरो हो गई। हालात यह हैं कि कोई पांच रुपये किलो भी फूल लेने को तैयार नहीं है। सिंह ने बताया कि ऐसे में वो अपनी फूलों की फसल को उखाड़ फेंकने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अब बड़े हो चुके पौधों को उखाड़ा जा रहा है और उनकी जगह फिर से छोटे पौधों को लगाया जा रहा है।

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