हल्द्वानी, गणेश पांडे : शहरों के बीच की दूरी अधिक दिखाकर ई-वे बिल की वैधता बढ़ा परिवहन में हेराफेरी करने का खेल भविष्य में नहीं चलेगा। वस्तुओं के परिवहन के लिए जरूरी ई-वे बिल को निकट भविष्य में शहर के पिन कोड से जोड़ा जाएगा। इससे अधिक दूरी बताकर बिल जारी होने की गड़बड़ी पकड़ में आ जाएगी।

50 हजार रुपये से अधिक मूल्य की वस्तुओं का परिवहन करने पर ई-वे बिल की जरूरत होती है। काउंसिल के पास शिकायतें पहुंची हैं कि ई-वे बिल की वैधता बढ़ाकर परिवहन में हेराफेरी होती है। बता दें कि 100 किमी तक वस्तु का परिवहन करने के लिए जारी ई-वे बिल की वैधता 24 घंटे होती है। इसके बाद हर 100 किमी की दूरी पर यह वैधता 24-24 घंटे बढ़ती जाती है। यानी एक हजार किमी दूरी पर सामान परिवहन करने के लिए ई-वे बिल की वैधता 10 दिन होती है।

गड़बड़ी : एक ही बिल का कई बार उपयोग

जीएसटी काउंसिल के पास पहुंची शिकायत के मुताबिक सामान लेने वाला व भेजने वाला ई-वे बिल जारी कराने के लिए शहर के बीच की दूरी बढ़ाकर बताता है, जिससे बिल की वैधता अवधि बढ़ जाती है। एक ही बिल को कई बार उपयोग में लाकर नंबर दो का माल परिवहन होता है।

समाधान : पिन कोड से स्वत: जुड़ जाएगी दूरी

गड़बड़ी रोकने के लिए जीएसटी पोर्टल में पिन कोड जोडऩे का नया प्रावधान लाने की योजना है। ई-वे बिल जारी करने के लिए पोर्टल पर शहर की जानकारी भरते समय पिन कोड देना होगा। पिन कोड के आधार पर शहरों के बीच की दूरी खुद जोड़ देगा व इसी दूरी के अनुसार ई-वे बिल की वैधता तय होगी।

आंकड़ा : रोजाना 80 हजार बिल होते हैं जारी

उत्तराखंड में रोजाना 80 हजार से एक लाख ई-वे बिल जारी होते हैं। काउंसिल के डाटा के अनुसार देशभर में हर दिन औसतन 20 लाख ई-वे बिल बनते हैं। सूत्रों की मानें तो काउंसिल के पास यह भी शिकायत है कि कई जगह सामान का मूल्य 50 हजार से कम बताकर ई-वे बिल से बच लिया जाता है। इसके लिए भी प्रावधान लाने की योजना है।

ई-वे बिल को रिटर्न से लिंक किया गया है

विनय प्रकाश ओझा, असिस्टेंट कमिश्नर राज्य कर ने बताया कि ई-वे बिल को रिटर्न से लिंक किया गया है। दो रिटर्न दाखिल न करने पर पोर्टल ई-वे बिल जनरेट नहीं करेगा। दूरी के वेरीफिकेशन के लिए काउंसिल कोई प्रावधान लाती है तो इससे गड़बड़ी रुकेगी।

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Posted By: Skand Shukla

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