उत्तराखंड रोडवेज बसों की हालत इतनी जर्जर कि यात्रियों को बारिश में खोलना पड़ता है छाता nainital news
काठगोदाम डिपो की साधारण बस जैसे ही हल्द्वानी रोडवेज स्टेशन से दिल्ली के लिए निकली तो एक यात्री ने तुरंत छाता खोल लिया। वजह थी बस की छत से पानी की बौछार होना।
हल्द्वानी, जेएनएन : एक बार फिर परिवहन निगम की खटारा बस बुधवार को यात्रियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई। काठगोदाम डिपो की साधारण बस जैसे ही हल्द्वानी रोडवेज स्टेशन से दिल्ली के लिए निकली तो एक यात्री ने तुरंत छाता खोल लिया। वजह थी बस की छत से पानी की बौछार होना। अब एक मुसाफिर ने तो जैसे-तैसे छाते की मदद से खुद को भीगने से बचा लिया, लेकिन अन्य यात्री परेशान हो गए चालक-परिचालक के सामने नाराजगी का भी जताई, मगर कोई फायदा नहीं हुआ। मजबूरी में लोगों को इसी परेशानी के बीच सफर पूरा किया। वहीं, जिम्मेदारों ने हर बार की तरह जांच कराने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
37 यात्रियों को लेकर निकली थी बस
बस संख्या यूके-07-पीए-1523 दिल्ली रूट पर चलती है। दोपहर तीन बजे करीब 37 यात्रियों को लेकर बस रोडवेज स्टेशन से निकली। इस बीच बारिश की बूंदें पड़ते ही बस की लीक छत से पानी आना शुरू हो गया। बारिश तेज थी तो देखते ही देखते धार बढ़ गई। जिसके बाद रूप सिंह नामक यात्री ने तो तुरंत अपना छाता खोल लिया, लेकिन बाकी यात्री इधर-उधर घूमकर पानी से बचने की कोशिश में जुटे रहे।
हमने ठंड में भीगने का किराया नहीं दिया
कड़ाके की ठंड में शरीर पर पानी पड़ते ही यात्री बैचेन हो गए। उन्होंने चालक-परिचालक से साफ कहा कि 355 रुपये हर मुसाफिर ने भीगने के लिए नहीं दिए हैं। वहीं, बस में सवार बच्चों और महिलाओं को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी।
वर्कशॉप में ओके कैसे हो गई बस
नियम के तहत वर्कशॉप से बस के निकलने से पहले तकनीकी टीम ओके सर्टिफिकेट देती है। ऐसे में वर्कशॉप में तैनात लोगों की ड्यूटी पर ही सवाल खड़ा हो रहा है। रोडवेज के एक कर्मचारी का कहना था कि अफसर कभी वर्कशॉप में झांकें तो इन्हें हकीकत पता चले।
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