लोक आस्था का महापर्व कुंभ नजदीक है। कुंभ मेले के दौरान मां गंगा में स्नान करने से जन्म जन्मांतर के पापों का शमन होता है। सहस्त्र गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। संत महंतों के आशीर्वाद से कुंभ दिव्य और भव्य ही नहीं पारंपरिक स्वरूप में होगा। कुंभ मेले में पतित पावनी मां गंगा में स्नान कर स्वयं को पुण्य का भागी बनाएं। समुद्र मंथन से निकली अमृत की बूंदे हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में गिरी थी। इसलिए प्रत्येक तीन वर्ष बाद इन चार स्थानों पर कुंभ का आयोजन होता है। अमृत प्राप्ति के लिए देव और दानव में परस्पर 12 दिन निरंतर युद्ध हुआ था। देवताओं के 12 दिन मनुष्यों के 12 वर्ष के तुल्य होते हैं। इसलिए कुंभ भी 12 होते हैं। इनमें चार पृथ्वी और शेष आठ देवलोक में होते हैं। जिन्हें देवगण ही प्राप्त कर सकते हैं।

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मनुष्य को यदि परमात्मा की प्राप्ति करनी है और अपने जीवन को भवसागर से पार लगाना है तो कुंभ मेले के दौरान पतित पावनी मां गंगा में पुण्य की डुबकी लगाएं।प्रत्येक कुंभ मेले की तरह आसन्न कुंभ भी संत महापुरुषों के आशीर्वाद से सकुशल संपन्न होगा। कुंभ मेला ईश्वरीय निमंत्रण है जिसे स्वीकार कर करोड़ों श्रद्धालु हरिद्वार आगमन करते हैं और अपने जीवन को सफल बनाते हैं।

-महंत रामशरण दास महाराज, सचिव ,अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अणि अखाड़ा

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