कुंभ मेला भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा पर्व है। जो सनातन धर्म का परचम पूरे विश्व में फहराता है ।संपूर्ण विश्व से आने वाले श्रद्धालु कुंभ की आलौकिक छटा को देखकर ना केवल अभिभूत होते हैं बल्कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति से प्रभावित भी होते हैं। कुंभ मेले के दौरान अखाड़ा की पेशवाई ,नागा संन्यासियों का शाही स्नान एवं बैरागी संतो के खालसे मुख्य आकर्षण का केंद्र होते हैं। शाही स्नान का अवसर सौभाग्यशाली व्यक्ति को प्राप्त होता है। देवभूमि उत्तराखंड एवं धर्मनगरी हरिद्वार की पावन भूमि पर कुंभ मेले के दौरान गुरु गद्दी के सानिध्य में जो श्रद्धालु भक्त पतित पावनी मां गंगा में स्नान एवं धर्म अध्यात्म का अवसर प्राप्त कर लेता है उसका जीवन स्वयं ही सफल हो जाता है। उसके समस्त पापों का शमन हो जाता है। धर्म नगरी में कुंभ की तैयारियां जोरों पर है ।11 मार्च महाशिवरात्रि पर पहला शाही स्नान होगा इसे लेकर सभी अखाड़े अपनी तैयारियों में जुटे हैं। संतो के आशीर्वाद से कुंभ मेला पूर्व की भांति दिव्य और भव्य होगा ।--

महंत प्रह्लाद दास महाराज, बैरागी अणि 

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रविंद्र पुरी से मिले कैबिनेट मंत्री 

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने शनिवार को पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी पहुंचकर अखाड़ा सचिव श्रीमहंत रविंद्र  पुरी से मुलाकात की। संतों से आशीर्वाद लेते हुए कुंभ की तैयारियों पर चर्चा की। भरोसा दिलाया कि सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएंगी।

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