हरिद्वार, [जेएनएन]: पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण महाराज को अध्यात्म चेतना संघ की ओर से 'गीता रत्न' सम्मान से अलंकृत किया गया। अध्यात्म चेतना संघ के संस्थापक करुणेश मिश्र ने आचार्य बालकृष्ण को यह सम्मान भेंट किया।

इस मौके पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि गीता में कर्म को ही धर्म मानने की प्रेरणा दी गई है। उन्होंने कहा कि गीता में योगेश्वर श्रीकृष्ण ने कहा है कि परमात्मा ने प्रत्येक मनुष्य को किसी न किसी उद्देश्य के लिए जन्म दिया है। हमें अपने कर्म को अपना धर्म मानकर अपने कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए, यही सब वेदों, दर्शनों, उपनिषदों व गीता का सार है। 

आचार्य ने कहा कि कर्म की इच्छा से रहित होकर किसी प्रलोभन या भय के बिना कर्तव्य कर्म का पालन करने वाला ही सच्चा सन्यासी व सच्चा योगी है, अग्निहोत्रादि कर्मकांड की क्रियाओं को छोड़ने वाला अथवा कर्तव्य कर्म से पलायन करने वाला योगी नहीं है। हमें यह मानना चाहिए कि परमात्मा ने हमें किसी विशेष कार्य के लिए धरती पर भेजा है।

अपने कर्तव्य पथ पर चलते हुए अपने हमें जन्म को सार्थकता प्रदान करनी चाहिए। इस अवसर पर करुणेश मिश्र ने कहा कि अध्यात्म चेतना संघ की ओर से प्रतिवर्ष एक महानुभाव का चयन कर गीता रत्न सम्मान से अलंकृत किया जाता है। आचार्य बालकृष्ण जनहित में किये जा रहे वृहद कार्यों को देखते हुए इस वर्ष यह सम्मान उन्हें दिया जा रहा है।

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Posted By: Sunil Negi