देहरादून, जेएनएन। सहसपुर के बेलोवाला गांव में एक युवक ने अपनी मां की हत्या करने के बाद खुद को भी गोली मार ली। इस घटना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। युवक हॉस्टल चलाता था। बताया जा रहा है कि वह नशे का आदी होने के साथ काफी दिनों से डिप्रेशन में था। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें युवक ने लिखा है कि उसका और उसकी मां का अंतिम संस्कार सनातन धर्म के हिसाब से किया जाए।

मूलरूप से हरियाणा का रहने वाला जय पंडित अपनी मां सुशीला देवी के साथ डूंगा ग्राम पंचायत के बेलोवाला गांव में रहता था। घर के पास ही उसका हॉस्टल और डेयरी थी। पुलिस के अनुसार सोमवार को जय का दोस्त अंकित उसके घर आया था। रात में वह जय के घर पर ही रुक गया। मंगलवार सुबह करीब आठ बजे जय ने अंकित को फ्रेश होने के लिए ऊपरी मंजिल के कमरे में भेज दिया और बाहर से कुंडी लगा दी। 

वहीं, घर के नौकर कृष्णा को कुछ देर के लिए यह कहते हुए बाहर जाने को कहा कि उसे अपनी मां से कुछ बात करनी है। इसके बाद जय मुख्य दरवाजे पर ताला डालकर अपने कमरे में गया और अंग्रेजी में सुसाइड नोट लिखा। फिर उसने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से बेड पर बैठी मां के सिर में पीछे से गोली मार दी। इसके बाद जय ने खुद को भी कनपटी से पिस्टल सटाकर गोली मार ली। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। 

वहीं, घर के बाहर टहल रहे नौकर ने लगातार दो गोलियां चलने की आवाज सुनी तो आसपास के ग्रामीणों को सूचना दी। ग्राम प्रधान के पति समेत ग्रामीण मौके पर पहुंचे। उन्होंने अंदर जाकर देखा तो सुशीला देवी बेड पर और जय फर्श पर मृत पड़ा था। 

घटना की सूचना मिलते ही आइपीएस विशाखा अशोक, एसपी देहात परमेंद्र डोभाल, सीओ भूपेंद्र धोनी, कोतवाल सहसपुर राजीव रौथाण, कोतवाल विकासनगर प्रदीप बिष्ट पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और जांच की। इसके साथ ही पुलिस अधिकारियों ने नौकर कृष्णा, जय के जीजा और दोस्त अंकित के बयान दर्ज किए। फोरेंसिक टीम ने मौके से फिंगर प्रिंट आदि एकत्र किए हैं। 

डिप्रेशन में दिया वारदात को अंजाम

आइपीएस विशाखा ने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि युवक शराब व चरस का आदी था। इसके साथ वह डिप्रेशन में भी था। देहरादून के एक निजी अस्पताल में उसका इलाज भी कराया गया था। नशा छुड़ाने के लिए देहरादून के एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया। लेकिन, डिप्रेशन कम नहीं हुआ और उसने अपनी मां को गोली मारने के बाद खुद भी जान दे दी। 

ट्रांसपोर्ट कमिश्नर थे जय के पिता

जय के पिता सुभाष शर्मा हरियाणा में ट्रांसपोर्ट कमिश्नर थे। सेवानिवृत्त होने के बाद वह बेलोवाला में प्रॉपर्टी खरीदकर परिवार समेत यहीं बस गए। वर्ष 2002 में उनकी मौत हो गई थी।

मां के साथ खिंची बचपन की फोटो देखी, फिर चला दी गोली

सोमवार सुबह बेलोवाला में पहले जय पंडित ने अपनी मां के साथ बचपन में खिंची फोटो देखी, अपना बचपन याद किया। उसके बाद अंग्रेजी में सुसाइड नोट लिखकर लिफाफे पर शरीफ लड़का हाइली कांफीडेन्शियल लिखकर मंदिर की धार्मिक पुस्तक में रख दिया और फिर अपनी मां के सिर में गोली मारकर खुद भी अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। पूरे घटनाक्रम के एक मात्र प्रत्यक्षदर्शी घर के नौकर कृष्णा ने मृतक के रिश्तेदारों के समक्ष इस तरह की काफी जानकारी साझा की। 

करीब पच्चीस साल से सुभाष शर्मा के घर के नौकर कृष्णा मूल निवासी सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश का निवासी है। उनका कहना था कि मंगलवार सुबह उन्होंने सुशीला देवी को खाली पेट की दवाई खिलाई। जय पंडित चाय कम ही पीता था, लेकिन जय ने उससे चाय बनाकर लाने को कहा। नार्मल तरीके से बात की। 

उसने यह कहते हुए मकान की ग्रिल का ताला लगा दिया कि मां के साथ कुछ जरूरी बातें करनी है, थोड़ी देर बाद आना। इसके बाद दो गोलियां चली और सब कुछ खत्म हो गया। 2002 में पति सुभाष शर्मा की मौत होने पर सारी जिम्मेदारी सुशीला देवी पर आ गयी थी। नौकर ने कहा कि बीमार रहने के कारण सुशीला देवी ने लेन देन आदि सारी जिम्मेदारी अपने इकलौते पुत्र जय पंडित को ही दे रखी थी। अपने नाम लाइसेंसी पिस्टल भी अपने पुत्र की ही सुपुर्दगी में रखवा दी थी, जो दोनों की मौत का सामान बन गयी। 

चार बहनों का इकलौता भाई था जय

बेलोवाला में मां की हत्या कर खुदकुशी करने वाला जय पंडित चार बहनों का इकलौता भाई था। जय की बड़ी बहन की शादी देहरादून के विपुल वत्स से हुई थी। जबकि तीन अन्य बहनों हिमान्तिका, रज्जू, ङ्क्षबदिया की शादी हरियाणा में हुई थी। देहरादून में होने के कारण विपुल वत्स ही जय का उपचार कराता रहता था। इकलौते भाई जय व मां सुशीला की मौत होने पर आयी चारों बहनों का रो रोकर बुरा हाल रहा। बहनें रोकर यही कह रही थी कि अब वे राखी किसकी कलाई पर बांधेगी।

संपन्न परिवार से ताल्लुक रखता था जय पंडित

हरियाणा में ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद मूल निवासी हरियाणा सुभाष शर्मा बेलोवाला में संपत्ति खरीदकर यहीं पर बस गए थे। करीब पंद्रह बीस बीघे जमीन में मकान के साथ ही आम का बाग, 28 कमरों का हास्टल, डेयरी आदि संचालित थी। पिता की मौत के बाद जय पंडित व उसकी शिक्षक पद से सेवानिवृत्त मां सुशीला ही रहते थे। 

पेंशन भी अच्छी खासी आती थी। बीबीए पास करने के बाद जय पंडित सरिए व सीमेंट का शोरुम खोलना चाहता था। दो दिन पहले उसने इसके लिए संबंधित लोगों से बात भी की थी। आर्थिक रूप से संपन्न व अविवाहित जय पंडित को किसी चीज की कोई कमी नहीं थी।

नशे का आदी होने के साथ ही डिप्रेशन में था जय

थाना सहसपुर क्षेत्र की डूंगा ग्राम पंचायत के बेलोवाला में हुई ह्दयविदारक घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही। मृतक जय के बड़े जीजा विपुल वत्स का कहना था कि जय पंडित नशे का आदी हो गया था। हर समय डिप्रेशन में रहता था। इसके चलते करीब डेढ़ साल पहले सिनर्जी अस्पताल में जय का उपचार कराया गया था, साथ ही राजपुर के एक नशा मुक्ति केंद्र में भी दाखिल कराकर जय का नशा छुड़ाने की कोशिश की थी। 

मादक पदार्थ व शराब का आदी होने के चलते वह डिप्रेशन में रहता था। जय की मानसिक हालत ऐसी थी कि यदि उसने भगवान शिव का सीरियल देख लिया तो वह अपने आपको उसी रूप में देखने लगता था। कभी वह अपने को शिव मानता था तो कभी तमाम शक्तियों से संपन्न। नशा मुक्ति केंद्र में एक दवा के रिएक्शन की वजह से उसे केंद्र से निकाल लिया गया था।

तमाम प्रयास के बाद भी उसकी नशे की आदत नहीं छूट पायी थी। मृतक के जीजा ने बताया कि सोमवार की रात में भी उसने जय से बात की थी, सामान्य तरीके से जय ने बात की। उसकी बात से यह नहीं लगा कि वह मंगलवार को इतना बड़ा कदम उठा लेगा। 

पुलिस क्षेत्राधिकारी भूपेंद्र धोनी के अनुसार प्रथम दृष्टया जांच में आया कि जय व उसके दोस्त ने सोमवार की रात में शराब का सेवन किया था। अभी मामले की जांच की जा रही है।

चंडीगढ़ जाने के लिए मंगाई थी गाड़ी

शिक्षक पद से सेवानिवृत्त सुशीला देवी को चार माह से पेंशन आदि में दिक्कत आ रही थी। इसके लिए मंगलवार सुबह जय पंडित को अपनी मां को लेकर चंडीगढ़ जाना था। उसने चंडीगढ़ जाने के लिए घर पर गाड़ी भी मंगा ली थी। जय पंडित ने थोड़ी देर तक गाड़ी चालक मोनू को इंतजार करने को कहा, लेकिन चंडीगढ़ जाने से पहले ही बड़ा हादसा होने पर पुलिस ने चालक से भी पूछताछ कर जानकारी जुटाई। 

गुलदार के कारण ली थी लाइसेंसी पिस्टल

बेलोवाला में जिस जगह पर जय पंडित का मकान, हास्टल, डेयरी, बाग था, वह इलाका सुनसान है और चारों तरफ झाडिय़ों की वजह से गुलदार आने का खतरा बना रहता था। इसके साथ ही बेलोवाला का क्षेत्र जंगल से सटा होने के कारण गुलदार कई बार दिखाई भी दिया। इसके चलते सुशीला देवी ने लाइसेंसी पिस्टल खरीदा था। किसी को क्या पता था कि गुलदार व आत्मरक्षा को खरीदी जाने वाली पिस्टल एक दिन उन्हीं के मौत का साधन बन जाएगी। 

विधायक सहदेव पुंडीर ने दी सांत्वना

बेलोवाला में का मामला जिसने सुना, वही घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ा। जानकारी लगने पर विधायक सहदेव पुंडीर, भाजपा नेता यशपाल नेगी, सुखदेव फर्सवाण मौके पर पहुंचे और मृतकों के नाते रिश्तेदारों को सांत्वना दी। विधायक ने कोतवाल राजीव रौथान से भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।

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सरिया व सीमेंट का शोरुम खोलने वाला था जय

जय पंडित भाऊवाला में बड़े स्तर पर सरिए व सीमेंट का कारोबार करना चाहता था। इसके लिए उसने संबंधित शोरूम में बात भी कर ली थी। जल्द ही वह अपना कारोबार शुरू करना चाहता था। आर्थिक रूप से संपन्न जय पंडित अपनी ख्वाइश पूरी करने से पहले ही चला गया।

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Posted By: Bhanu

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