देहरादून, जेएनएन। उत्तराखंड महिला कांग्रेस की बैठक में महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य ने कहा कि संगठन में सक्रिय होकर धरातल में काम करना होगा। सिर्फ पद लेने के लिए ही सक्रियता नहीं चलेगी। निष्क्रिय पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। 

राजपुर रोड स्थित प्रदेश मुख्यालय में प्रदेश महिला कांग्रेसियों की बैठक में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर चर्चा की गई। साथ ही पदाधिकारियों को स्पष्ट बताया गया कि अब लापरवाही और निष्क्रियता संगठन बर्दाश्त नहीं करेगा। संगठन में एकजुट होकर लक्ष्य के साथ काम करना होगा। उत्तराखंड महिला कांग्रेस प्रभारी परमिंदर कौर ने जिला और ब्लॉक स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया। 

उन्होंने कहा कि पदाधिकारी और कार्यकर्ता कांग्रेस की उपलब्धियां जन-जन तक पहुंचाएं, जिससे लोगों को कांग्रेस की रीति-नीति का पता चले। उन्होंने कहा कि फरवरी प्रथम सप्ताह में कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में बैठकें की जाएंगी। संगठन की गतिविधियों को सुचारू ढंग से संचालित करने के लिए विधानसभावार प्रदेश महिला कांग्रेस पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जो सभी जिलाध्यक्षों, ब्लॉक और नगर अध्यक्षों के काम का ब्यौरा एकत्र करेंगे।   

बैठक में प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरिता आर्य ने कहा कि पदाधिकारी और कार्यकर्ता भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों से जनता को अवगत कराएं। संगठन में नए सदस्यों को जोड़ने का कार्य प्राथमिकता से किया जाए। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष नजमा खान, महानगर अध्यक्ष कमलेश रमन, प्रदेश प्रवक्ता चंद्रकला नेगी, काशीपुर से इंदु मान, रामनगर से आशा बिष्ट, नैनीताल से शशि वर्मा, हल्द्वानी से बबीता उप्रेती, मंजू त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे। 

मेहनत करें कार्यकर्ता, टिकट मिले धनकुबेरों को 

प्रदेश महिला कांग्रेस की बैठक में महिला कार्यकर्ताओं के विरोध के स्वर भी उठे। कार्यकर्ताओं ने प्रदेश पदाधिकारियों से आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन के लिए वह दिन-रात एक करती हैं लेकिन जब नेतृत्व देने की बारी आती है तो धनकुबेर को टिकट बांट दिए जाते हैं। 

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कांग्रेस भवन में आयोजित बैठक में उपस्थित उत्तराखंड महिला कांग्रेस प्रभारी परविंदर कौर और प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य के समक्ष कार्यकर्ताओं ने मुखर होकर अपनी बात रखी। कार्यकर्ताओं ने कहा कि नगर निकाय, पंचायत, विधानसभा व लोकसभा चुनाव में पार्टी की जीत के लिए पांच वर्षों तक कड़ी मेहनत करती हैं, लेकिन जब टिकट देने की बात आए तो धनकुबेर उनपर भारी पड़ जाते हैं। इतना ही नहीं विधायक और पूर्व विधायक की पत्नियों पर भी पार्टी हाईकमान अक्सर मेहरबान हो जाता है, जबकि इन्हें संगठन से कोई लेना-देना नहीं होता। उन्होंने विरोध जताते हुए कहा कि इससे सक्रिय कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है। 

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बैठक में महिला कांग्रेस कार्यकर्ता इमराना परवीन, हरिद्वार जिलाध्यक्ष विमला पांडे, रेनू बिष्ट समेत कई महिलाओं ने वरिष्ठ पदाधिकारियों के समक्ष इस व्यवस्था पर विरोध जताया। महानगर अध्यक्ष कमलेश रमन से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि महिला किसी स्तर पर कम नहीं हैं। उन्हें समान प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। साथ ही सक्रिय महिला कार्यकर्ताओं को नेतृत्व का अवसर देना चाहिए, यह बात वरिष्ठ नेता मजबूती से हाईकमान के समक्ष रखें। 

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Posted By: Raksha Panthari

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