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    'हेस्को' का साथ मिला तो महिलाओं ने गांव में इस तरह पहुंचाया पानी

    By Raksha PanthariEdited By:
    Updated: Mon, 07 Jan 2019 08:55 AM (IST)

    कालसी प्रखंड स्थित सुदूरवर्ती सलगा गांव की महिलाओं ने श्रमदान से गांव तक डेढ़ किमी लंबी पेयजल लाइन बिछाकर सामाजिक विकास की अनूठी मिसाल कायम की है।

    'हेस्को' का साथ मिला तो महिलाओं ने गांव में इस तरह पहुंचाया पानी

    साहिया(देहरादून), दीवान तोमर। देहरादून जिले के कालसी प्रखंड स्थित सुदूरवर्ती सलगा गांव की महिलाओं ने श्रमदान से गांव तक डेढ़ किमी लंबी पेयजल लाइन बिछाकर सामाजिक विकास की अनूठी मिसाल कायम की है। इस कार्य में हेस्को (हिमालयी पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संगठन) ने उनका पूरा साथ निभाया। नतीजा, गांव में वर्षों से चला आ रहा पानी का संकट भी दूर हो गया और अब इस पेयजल लाइन से करीब 500 की आबादी अपनी प्यास बुझा रही है।   

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    जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर के सलगा गांव में पिछले तीन साल से पीने के पानी का गंभीर संकट बना हुआ था। दरअसल, देखरेख न होने के कारण न केवल दशकों पूर्व गांव के लिए बनी पेयजल लाइन जर्जर हो चुकी थी, बल्कि जलस्रोत पर भी पानी की मात्रा काफी घट गई थी। ऐसे में ग्रामीणों को डेढ़ किमी दूर चरगाड़ा खड्ड से पानी ढोना पड़ता था। लेकिन, इसमें पूरा दिन पानी का इंतजाम करने में जाया हो जाता था। ग्रामीणों ने पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए कई बार तहसील और जिला प्रशासन से भी गुहार लगाई, लेकिन तंत्र की बेरुखी के चलते स्थिति ज्यों की त्यों बनी रही। 

    ऐसी स्थिति में हेस्को संस्था के संस्थापक पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ग्रामीणों की मदद के लिए आगे आए। हेस्को ने उन्हें सलगा गांव में नई पेयजल लाइन बिछाने के लिए पाइप और अन्य सामान उपलब्ध कराया। जबकि, गांव की महिलाओं ने श्रमदान कर डेढ़ किमी दूर चरगाड़ा खड्ड से नई पेयजल लाइन बिछाने का कार्य किया। पूर्व प्रधान देवी सिंह, मानसी नेगी, तुलसी नेगी और हेस्को से जुड़े प्रमोद व निरमा नेगी ने बताया कि गांव में पीने का पानी आने से सभी लोग काफी खुश हैं। लोगों ने पंचायत के विकास में सहयोगी बनी हेस्को संस्था के प्रयासों की भी सराहना की है। 

    उन्नत बीज और खाद के साथ बकरियां भी दीं 

    पेयजल लाइन बिछने से गांव के 34 परिवारों को अब पीने के पानी के लिए भटकना नहीं पड़ रहा। हेस्को संस्था की ओर से इन सभी परिवारों को परपंरागत खेती, बेमौसमी सब्जी उत्पादन, बागवानी व पशुपालन के लिए उन्नत किस्म के बीज व खाद के साथ ही प्रति परिवार तीन-तीन बकरियां भी उपलब्ध कराई गई हैं। हेस्को से जुड़े प्रमोद व निरमा नेगी ने बताया कि संस्था की ओर से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के गुर भी सिखाए जा रहे हैं। 

     

    हर स्तर पर सहयोग कर रहा हेस्को 

    हेस्को के संस्थापक डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने बताया कि पंचायत के विकास को गति देने और ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार के लिए संस्था की ओर से हर स्तर पर सहयोग किया जा रहा है। साथ ही लोगों को उन्नत खेती का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। 

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