देहरादून, केदार दत्त। उत्तराखंड में भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है, उसका क्या उपयोग हो रहा है और कहां कितनी भूमि खाली है, इसे लेकर अब सही तस्वीर सामने आ सकेगी। इस क्रम में 59 साल के लंबे इंतजार के बाद प्रदेश की संपूर्ण भूमि का सर्वे कराया जा रहा है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद राजस्व परिषद इसकी तैयारियों में जुट गई है। सर्वे आफ इंडिया से यह सर्वे कराने की तैयारी है, जिसके लिए परिषद आग्रह करने जा रही है। कोशिश ये है कि आगामी मार्च से वैज्ञानिक ढंग से यह सर्वे प्रारंभ कर दिया जाए। 

उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड में जमीनों का आकार गड़बड़ाया हुआ है। भूमि की बेतहाशा खरीद-फरोख्त इसकी मुख्य वजह है। बड़ी संख्या में गांवों के शहरों का हिस्सा बनने और शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में एक ही भूमि को कई-कई प्रयोजन के लिए खरीदे और बेचे जाने से भी दिक्कत बढ़ी हैं। ऐसे में भूमि का ठीक से पता नहीं चल पा रहा। इसके अलावा भूमि संबंधी अभिलेख भी अपडेट नहीं हो पा रहे हैं। कई जगह जंगल और राजस्व की भूमि का पता नहीं चल पा रहा है। इन दिक्कतों से पार पाने के लिए सरकार ने संपूर्ण उत्तराखंड की भूमि का सर्वे कराने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा। 

आयुक्त और सचिव राजस्व परिषद बीएम मिश्र के मुताबिक केंद्र ने सर्वे को मंजूरी देने के साथ ही इस कार्य के लिए प्रशिक्षण मद में 50 लाख की राशि भी जारी कर दी है। उन्होंने बताया कि अविभाजित उत्तर प्रदेश में वर्ष 1960 में भूमि का सर्वे हुआ था, मगर अब यहां भूमि की स्थिति बदल गई है। लगभग सभी जगह तमाम ऐसे इलाके हैं, जहां भूमि का सही ढंग से पता नहीं चल पा रहा है। इसी के मद्देनजर राज्य में भूमि सर्वे कराने की ठानी गई है। मिश्र के मुताबिक परिषद इस कोशिश में जुटी है कि सर्वे ऑफ इंडिया से राज्य की भूमि का वैज्ञानिक ढंग से सर्वे करा लिया जाए। इस बारे में सर्वे ऑफ इंडिया को पत्र भेजा जा रहा है। 

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परिषद का प्रयास है कि अगले साल मार्च से यह सर्वे शुरू कर दिया जाए, ताकि भूमि की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके। उन्होंने कहा कि इस पहल से भूमि अभिलेख भी दुरुस्त हो जाएंगे। साथ ही यह पता चल जाएगा कि किस भूमि का क्या आकार है और उसका क्या उपयोग हो रहा है। जाहिर है कि इससे खाता खतौनियां भी अपडेट हो जाएंगी। पहाड़ों में एरियल सर्वे राजस्व परिषद के आयुक्त और सचिव ने बताया कि राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में सर्वे में आने वाली दिक्कतों के मद्देनजर वहां एरियल सर्वे होगा। इसके अलावा दुर्गम क्षेत्रों में ड्रोन की मदद भी ली जाएगी।

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