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    जन-जन की सरकार: अब तक 204 शिविरों में 1.35 लाख व्यक्तियों को सीधे मिला लाभ, शिकायतों का हो रहा निस्तारण

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 09:17 AM (IST)

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर उत्तराखंड में 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' अभियान सफल रहा है। इस अभियान के तहत 13 जनपदों में 204 शिविरों मे ...और पढ़ें

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    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। जागरण

    राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर राज्य में संचालित ''जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार'' अभियान सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और त्वरित समाधान का प्रतीक बनकर उभरा है। सरकार और आमजन के बीच की दूरी को खत्म करने में यह अभियान प्रभावी साबित हो रहा है। प्रदेश के सभी 13 जनपदों में अब तक न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित 204 शिविरों में 1,35,194 व्यक्तियों की सहभागिता इसका उदाहरण है।

    अभियान के तहत आयोजित हो रहे शिविरों के माध्यम से शासन-प्रशासन पहली बार सीधे जनता के द्वार पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीण, पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला अथवा तहसील मुख्यालयों के चक्कर लगाने के झंझट से निजात मिली है। शिविरों में अभी तक 17, 747 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 12,776 का मौके पर निस्तारण किया गया।

    शेष मामलों को भी समयबद्ध कार्ययोजना के तहत संबंधित विभागों को प्रेषित कर निरंतर निगरानी में रखा गया है, जिससे कोई भी शिकायत लंबित न रहे। शिविरों में आय, जाति, निवास, सामाजिक श्रेणी एवं अन्य आवश्यक प्रमाण पत्रों से संबंधित 19, 734 आवेदन प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत 77, 203 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्रदान किया गया।

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    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह उत्तराखंड में शासन की सोच को बदलने वाला अभियान है। सरकार का मानना है कि लोकतंत्र तभी सशक्त होता है, जब सरकार स्वयं जनता तक पहुंचे। अभियान में यह सुनिश्चित किया गया कि अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति भी सरकार की योजनाओं और सेवाओं का लाभ बिना किसी बाधा के प्राप्त कर सके। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विश्वास, समाधान और संवेदनशीलता पर आधारित उत्तराखंड माडल आफ गुड गवर्नेंस है।

    उन्होंने कहा कि इस अभियान से न केवल प्रशासन पर जनता का विश्वास मजबूत हुआ है, बल्कि बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी अंकुश लगा है। सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित होने से समस्याओं के त्वरित समाधान की संस्कृति विकसित हुई है और शासन की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह अभियान राज्य में सुशासन की नई पहचान बन चुका है और यह आने वाले समय में भी राज्य के विकास और जनकल्याण की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।