उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर में धांधली, बाहरी लोग उठा रहे सरकारी योजनाओं का लाभ
ग्राम पंचायतों में परिवार रजिस्टर में अनियमितताएं सामने आई हैं। बाहरी लोग मिलीभगत से नाम दर्ज कराकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। नियमावली का पाल ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। ग्राम पंचायतों में परिवार रजिस्टर से संबंधित मौजूदा नियमावली का भी अनुपालन नहीं हो रहा। मिलीभगत के चलते कोई भी परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करा दे रहा है। पंचायतीराज विभाग की पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि अन्य राज्यों से यहां आकर किराए पर रहे लोग भी परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।
यही नहीं, कई ग्राम पंचायतों में परिवार रजिस्टर में पृष्ठ संख्या तक अंकित नहीं है और कुछ में रजिस्टर पर नाम के कागज चिपकाए गए हैं। और तो और इसमें किसी अधिकारी तक के हस्ताक्षर भी नहीं कराए गए हैं। इन सब स्थितियों को देखते हुए ही सरकार ने परिवार रजिस्टर की जांच कराने का निर्णय लिया है।
पंचायतीराज विभाग की नियमावली के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में स्थायी रूप से निवास कर रहे प्रत्येक परिवार का नाम ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर में दर्ज होना अनिवार्य है। नियमावली में परिवार रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियों के शुद्धीकरण और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया का प्रविधान है। परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को है, जबकि अपील का अधिकार उपजिलाधिकारी के पास निहित है। अलबत्ता, ग्राम पंचायत में स्थायी निवास को लेकर स्पष्टता नियमावली में नहीं है। इसी का फायदा उठाकर मनमाने ढंग से परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज किए जा रहे हैं।
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पिछले वर्ष परिवार रजिस्टर में नाम जोड़ने के लिए आवेदनों की बाढ़ और काफी संख्या में आवेदन निरस्त होने के बाद परिवार रजिस्टर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मिलीभगत से नाम दर्ज होने की ओर ध्यान गया। पंचायतीराज विभाग के सूत्रों के अनुसार इस सिलसिले में जब पड़ताल की गई तो इसमें तमाम चौंकाने वाली बातें सामने आईं। गांवों में अन्य राज्यों से आकर रह रहे कई व्यक्तियों ने परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराकर अपने आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड बनवा लिए। कई लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि नाम दर्ज करने के मामले में मौजूदा नियमों की भी अनदेखी होती आई है। नियमानुसार सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर कराए बिना मनमर्जी से नाम दर्ज किए गए हैं। यद्यपि, नियमावली में खामी यह भी रही है कि इस प्रक्रिया की निगरानी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। इस सबको देखते हुए अब परिवार रजिस्टर से संबंधित नियमावली में संशोधन किया जाना आवश्यक है। इसे लेकर कसरत प्रारंभ कर दी गई है।

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