बेटियां पर्वत से लेकर सागर तक लिख रही हैं अपनी कामयाबी की इबारत
उत्तराखंड की बेटियां आज पहाड़ों के ऊंचे शिखर से लेकर समुद्र की उफनती लहरों पर अपनी कामयाबी की इबारत लिख रही हैं।
देहरादून, [सुकांत ममगाईं]: नई सोच, नया सवेरा। बेटियां आज पहाड़ों के ऊंचे शिखर से लेकर समुद्र की उफनती लहरों पर अपनी कामयाबी की इबारत लिख रही हैं। वह उस मुकाम पर हैं जिसे देख अच्छे-अच्छे भी रश्क करें। ये वह बेटियां हैं जिन्हें परिवार से संबल मिला तो उन्होंने सफलता के ऊंचे फलक पर उड़ान भरी। ये लाडली शक्ति का जीवंत प्रतीक हैं और प्रेरणा की मूरत भी। आइये इनके जज्बे को सलाम करें।
सागर की लहरों पर लिखी हौसलों की दास्तां
उत्तराखंड की बेटियों ने सागर की लहरों पर भी अपनी हौसले की दास्तां लिखी है। आइएनएसवी तारिणी पर सवार होकर पांच देशों की सागर परिक्रमा पूर्ण करने और लगभग 21,600 समुद्री मील की दूरी तय करने वाली टीम तारिणी का नेतृत्व पौड़ी की लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने किया। इस टीम में दून की लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता भी शामिल रहीं। वह हाल में कौन बनेगा करोड़पति में भी अपने ज्ञान का उजियारा बिखेर चुकी हैं। उनकी टीम ने इस शो में 12 लाख 50 हजार रुपये जीते। इस पूरी रकम को नेवी की एक संस्था इंडियन नेवल बेनेवायलेंट ऐसोसिएशन (आइएनबीए) को डोनेट कर दिया।
उफनती लहरों पर क्लीन गंगा का संदेश
माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली प्रथम भारतीय महिला उत्तरकाशी निवासी पद्मश्री बछेंद्री पाल स्वच्छ गंगा अभियान पर निकली हैं। बछेंद्री पाल 40 सदस्यीय टीम का नेतृत्व कर रही हैं। मिशन नमामि गंगे के तहत वह राफ्टिंग के जरिए हरिद्वार से पटना तक की यात्रा करेंगी। इस अभियान के तहत गंगा की सफाई को लेकर आम लोगों और छात्रों को जागरूक किया जाएगा। अभियान दल 1500 किमी राफ्टिंग करते हुए 30 अक्तूबर को पटना पहुंचेगा। गंगा को बचाने निकले इस दल में आइआइटियन, रेडियो जॉकी, पर्यावरण कार्यकर्ता और पर्वतारोही शामिल हैं।
सात शिखरों को अपने कदमों में झुकाया
दून की जुड़वा बहनों ताशी नुंग्शी ने दुनिया के सात शिखर अपने कदमों में झुकाए हैं। उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड व लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है। आइस हॉकी व एथलेटिक्स खिलाड़ी ताशी-नुंग्शी ने पर्वतारोहण की शुरुआत 2009 में उत्तरकाशी स्थित नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर की। वह माउंट एवरेस्ट के साथ ही दुनिया के सात ऊंचे शिखर पर चढ़ाई का गौरव हासिल कर चुकी हैं। वह कहती हैं कि कुछ ऐसा कर दिखाने की ख्वाहिश थी कि लोग उन्हें देख कहें कि बेटी होना भी जरूरी है।
राजनीतिक विरासत छोड़ चुनी सैन्य वर्दी
उत्तराखंड के नौजवानों ने देश सेवा को हमेशा से दूसरी नौकरियों पर तरजीह दी है। प्रदेश की सैन्य परम्परा का हिस्सा बनने में अब लड़कियां भी पीछे नहीं हैं। ताज्जुब यह कि अपनी राजनीतिक विरासत को पीछे छोड़ वह फौजी वर्दी को चुन रही हैं। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की बेटी डॉ. श्रेयशी निशंक सेना में आर्मी मेडिकल कोर का हिस्सा बनी हैं। वहीं प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत की बेटी नमिता पंत सेना के जेएलजी ब्रांच (जज एडवोकेट जनरल) में अफसर बनी हैं।
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