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    अगले विस सत्र में पेश होंगे दोनों अंब्रेला एक्ट, पढ़िए पूरी खबर

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    Updated: Wed, 30 Oct 2019 03:27 PM (IST)

    सरकारी विश्वविद्यालय अब परिनियमावली बनाने में मनमानी या देरी नहीं कर सकेंगे। उन्हें छह माह या निर्धारित समय अवधि के भीतर परिनियमावली को बनाना होगा। ...और पढ़ें

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    अगले विस सत्र में पेश होंगे दोनों अंब्रेला एक्ट, पढ़िए पूरी खबर

    देहरादून, रविंद्र बड़थ्वाल। प्रदेश में सरकारी विश्वविद्यालय अब परिनियमावली बनाने में मनमानी या देरी नहीं कर सकेंगे। उन्हें छह माह या निर्धारित समय अवधि के भीतर परिनियमावली को बनाना होगा। सरकारी विश्वविद्यालयों के लिए प्रस्तावित अंब्रेला एक्ट में ये प्रावधान शामिल किया गया है। अंब्रेला एक्ट के मसौदे को उच्च शिक्षा महकमे ने शासन को सौंप दिया है। अब इसे विश्वविद्यालयों को भेजकर हफ्तेभर में सुझाव मांगे गए हैं। उधर, निजी विश्वविद्यालयों ने पृथक अंब्रेला एक्ट पर अपने सुझाव शासन को नहीं भेजे हैं। शासन ने उन्हें रिमांडर भेजकर हफ्तेभर में अनिवार्य रूप से सुझाव देने को कहा है। सुझाव नहीं देने की स्थिति में इसे उनकी सहमति के तौर पर माना जाएगा। खास बात ये है कि आगामी विधानसभा सत्र में दोनों अंब्रेला एक्ट के मसौदे को रखा जाएगा। 

    प्रदेश सरकार ने सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के लिए अलग-अलग अंब्रेला एक्ट के ड्राफ्ट तैयार कर लिए हैं। अंब्रेला एक्ट अस्तित्व में आने के बाद नए बनने वाले सरकारी विश्वविद्यालयों के लिए अलग से एक्ट लाने की जरूरत नहीं होगी। अलबत्ता, नए एक्ट में परिनियमावली को लेकर सरकारी विश्वविद्यालय या उच्च शिक्षा महकमे की लापरवाही पर शिकंजा कस दिया गया है। कई सरकारी विश्वविद्यालयों का एक्ट अस्तित्व में आने के बावजूद परिनियमावली बनाने में वर्षो गुजार दिए गए। इस वजह से विश्वविद्यालयों के शैक्षिक प्रशासन में कई दिक्कतें भी पेश आ चुकी हैं। 
    अंब्रेला एक्ट मॉडल परिनियमावली का प्रावधान किया गया है। साथ ही विश्वविद्यालयों को छह माह या निर्धारित समय के भीतर मॉडल परिनियमावली को अपनाने या संशोधित परिनियमावली बनाने पर निर्णय लेना होगा। अंब्रेला एक्ट में यूजीसी रेग्युलेशन 2018 को अनिवार्य तौर पर लागू किया गया है। विश्वविद्यालयों को नई नियुक्तियों और पदोन्नति समेत यूजीसी रेग्युलेशन के प्रावधानों पर अमल करना होगा। खास बात ये है कि अंब्रेला एक्ट में शिक्षा की गुणवत्ता पर फोकस है। यूजीसी, एआइसीटीई, एनसीटीई, एमसीआइ समेत तमाम केंद्रीय नियामक संस्थाओं के मानकों को भी अंब्रेला एक्ट के दायरे में रखा गया है। 
    केंद्र सरकार की नई उच्च शिक्षा नीति में प्रस्तावित उच्च शिक्षा आयोग के गठन के मद्देनजर अंब्रेला एक्ट में प्रावधान किए गए हैं। उधर, निजी विश्वविद्यालयों के लिए बनाए गए अंब्रेला एक्ट को लेकर उच्च शिक्षा महकमे को सुझाव नहीं मिले हैं। अब सरकारी और निजी दोनों ही विश्वविद्यालयों को हफ्तेभर में सुझाव देने को कहा गया है, अन्यथा इसे विश्वविद्यालयों की सहमति के तौर लिया जाएगा। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के लिए अलग-अलग अंब्रेला एक्ट के ड्राफ्ट बन चुके हैं। इन्हें विधानसभा में अगले सत्र में पेश किया जा सकेगा।
    अपर सचिव निजी विवि में सरकार के प्रतिनिधि निजी विश्वविद्यालयों के लिए अंब्रेला एक्ट का प्रस्ताव सरकार ने तैयार कर लिया है। इस प्रस्ताव को निजी विश्वविद्यालयों को भेजकर उनके सुझाव मांगे गए हैं। निजी विश्वविद्यालयों में सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर अपर सचिव स्तर का एक अधिकारी नामित किया जाएगा। यह अधिकारी विश्वविद्यालयों की गतिविधियों पर नजर भी रखेगा, ताकि वे फीस तय करने या अन्य मामलों में मनमानी न कर सकें। निजी विश्वविद्यालयों के लिए अंब्रेला एक्ट में यह प्रावधान किया गया है।