ऋषिकेश, जेएनएन। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में पहली लाइव रोबोटिक यूरोलॉजी कॉन्फ्रेंस विधिवत शुरू हो गई। जिसमें रोबोटिक विधि से कैंसर के दो जटिल सर्जरी भी सफलतापूर्वक की गई। कांफ्रेंस में देश-विदेश से जुटे विशेषज्ञों ने व्याख्यानमाला प्रस्तुत की और अपने अनुभव साझा किए। 

एम्स ऋषिकेश में शुक्रवार को प्रथम लाइव रोबोटिक यूरोलॉजी कांफ्रेंस में संस्थान के निदेशक प्रो. रवि कांत ने कहा कि अच्छा चिकित्सक बनने के लिए बुद्धिमत्तागुणक आइक्यू से अधिक भावनात्मक गुणक पर ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है। उन्होंने बताया कि संस्थान में अभी तक रोबोटिक सर्जरी मुख्यरूप से पांच विभागों यूरोलॉजी, गाइनीकोलॉजी, ईएनटी, पीडियाट्रिक सर्जरी एवं जरनल सर्जरी विभाग द्वारा की जा रही है। इस अवसर पर एम्स निदेशक ने पीजीआई चंडीगढ़ के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एके मंडल सहयोग देने के लिए सम्मानित किया। 

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कॉन्फ्रेंस में विशिष्ट अतिथि निदेशक एसजीपीजीआइ लखनऊ डॉ. राकेश कपूर ने कहा कि रोबोट जैसी तकनीक का उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से करना चाहिए। इस अवसर पर एम्स के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर मित्तल ने बताया कि शुक्रवार को एक मूत्राशय कैंसर और एक प्रोस्टेट कैंसर ग्रस्त मरीज की रोबोटिक पद्धति से जटिल सर्जरी की गई। उन्होंने बताया कि इस सर्जरी को अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक सर्जन प्रो. डेविड गिल्लाट और नेशनल फैकल्टी डा. सुधीर रावल ने अंजाम दिया। साथ ही दोनों चिकित्सकों ने व्याख्यान के जरिए अपने अनुभव साझा किए।

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इस अवसर पर डीन एकेडमिक प्रो. सुरेखा किशोर, एमएस डॉ. ब्रह्मप्रकाश, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. मनोज गुप्ता, प्रो. किम जैकब मैमन, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. विकास कुमार पंवार, डॉ. शिवचरण नावरिया, डॉ. तुषार नारायण आदित्य, डॉ. सतीश, डॉ. दीपक और एनेस्थिसिया डॉ. निश्चित ने सहयोग किया।

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