देहरादून, रीतिका पठानिया। 25 अक्टूबर को धनत्रयोदशी यानि धनतेरस है। इसे लेकर स्वर्णकारों और बर्तन विक्रेताओं ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। साथ ही दुकानों पर सजावट भी शुरू हो गई है। बाजारों में भी चमक देखते ही बन रही है।

पलटन बाजार स्थित बर्तन की दुकान के मालिक राघव ने बताया कि धनतेरस पर अधिकतम ग्राहक पानी के बर्तन, थाली, कटोरी, घंटी और दीपक खरीदना पसंद करते हैं। लोग अपनी मनोकामना के अनुसार इच्छापूर्ति के लिए बर्तन खरीदते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार मार्केट में अलग-अलग डिजाइन के बर्तन उपलब्ध हैं। जिसकी कीमत उनके वजन के अनुसार तय है।

एम्ब्रोड ब्रांड की मूर्ति है खास

राजपुर रोड स्थित कांशी ज्वेलर्स स्टोर के मोहित मैसोन ने बताया कि इस बार इलेक्ट्रोप्लेटिक प्रोसेस से बनी सिल्वर की मूर्तियां खास है। यह सभी मूर्तियां एम्ब्रोड ब्रांड की हैं। जिसकी कीमत चार हजार रुपये से लेकर 20 हजार 143 रुपये तक है। यह मूर्तियां हैवी वेट वाली हैं। इसके अलावा लक्ष्मी और गणेश की 18 ग्राम से एक किलो तक की चांदी से बनाई मूर्तियां भी मार्केट में उपलब्ध हैं। इसकी कीमत बारह सौ रुपये से शुरू होकर 56 हजार रुपये तक है। वही मार्केट में हमेशा की तरह इस बार भी सोने और चांदी के सिक्के और अन्य सिल्वर आइटम उपलब्ध हैं।

ग्राहकों ने की एडवांस बुकिंग

मोहित ने बताया कि अधिक भीड़ होने के कारण इस बार धनतेरस पर सुबह सात बजे से खरीददारी के लिए दुकानें खोल दी जाएंगी। उनकी दुकानें रात आठ बजे तक खरीदारी के लिए खुली रहेंगी। उन्होंने बताया कि चार सौ ग्राम सोने और चांदी की ग्राहकों की ओर से एडवांस बुकिंग कर ली गई है। ताकि उन्हें परेशान न होना पड़े और बिना भीड़ में घूमे उन्हें घर पर ही सामान पहुंच जाए।

धनतेरस पर सौ साल बाद बना महासंगम

पंडित वंशीधर नौटियाल ने बताया कि सौ साल बाद इस बार धनतेरस पर अजब संयोग बन रहा है। इस दिन शुक्र प्रदोष व्रत भी रहेगा, जिस कारण से शुक्र प्रदोष और धनत्रयोदशी का महासंयोग बन रहा है। साथ ही इस दिन ब्रहा और सिद्धि योग भी बन रहा है। इस दौरान भगवान शिव की आराधना करने से भाग्योदय हो सकता है। उनके अनुसार धनतेरस पर यह संयोग सौ साल बाद बन रहा है।

कुछ ऐसी है मान्यता

धनतेरस पर धनवंतरि देव की पूजा होती है। यह मां लक्ष्मी के भाई माने जाते हैं। जब समुद्र मंथन हो रहा था तब सागर की गहराइयों से चौदह रत्न निकाले गए थे। धनवंतरि इन्हीं रत्नों में से एक हैं। ऐसा माना जाता है कि धनतेरस पर मनोकामना के अनुसार खरीदारी करने से लाभ मिलता है। 

आर्थिक लाभ के लिए लोग बर्तन, कारोबार विस्तार और उन्नति के लिए धातु का दीपक, संतान संबंधी समस्या के लिए थाली और कटोरी, स्वास्थ्य और आयु के लिए धातु की घंटी और घर में सुख-शांति और प्रेम के लिए खाना पकाने के बर्तन की खरीदारी की जाती है।

खरीदारी का शुभ मुहूर्त

दोपहर बारह बजे से डेढ़ बजे तक, रात नौ बजे से साढ़े दस बजे तक खरीदारी का शुभ मुहूर्त है। वहीं पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह साढ़े दस बजे से बारह बजे तक का है। इस दौरान खरीदारी करने से बचना चाहिए।

पांच वचनों के साथ जलाएं पांच दीये

ऑल इंडिया वुमेंस कॉन्फ्रेंस की महिलाओं ने दीपावली के उपलक्ष्य में मंगलवार को हिंदी भवन में 'जगमग भारत' कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान पांच वचनों के पांच दीये जलाकर आपसी प्रेम और सौहार्द का संदेश भी दिया। इसके साथ ही कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। जिसमें डांडिया नृत्य का महिलाओं ने खूब आनंद लिया।

महिलाओं ने हाथों में पांच दिये जलाकर इस दीपावली में स्वच्छता, नेत्रदान, सकारात्मकता, साक्षरता और वृद्धों को सम्मान देने का संकल्प लिया। क्लब की अध्यक्ष अरुणा चावला ने कहा कि अपने घर व आसपास स्वच्छता बनाए रखना बहुत जरूरी है। लोग अधिकाधिक नेत्रदान करें, ताकि किसी को आंखों को च्योति मिल सके। सकारात्मकता जीवन में खुशी भर देती है। वहीं साक्षरता अज्ञानता के अंधकार को दूर करती है। वृद्धजनों को सम्मान देने की अपील भी उन्होंने की। 

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इससे पहले नयन कांति मजूमदार के निर्देशन में जुनून डांस ऐकेडमी की बालिकाओं ने रामलीला का मंचन किया। पुष्पा भल्ला ने घूमर नृत्य की प्रस्तुति दी। नीति सक्सेना ने जगमग दीप जलाओ पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं तेजस्वी वर्मा का नृत्य भी सराहा गया। इसके अलावा डांडिया, वेशभूषा और लाइट ऑफ द इवनिंग प्रतियोगिताएं भी हुई। कार्यक्रम में रेणु भटनागर, योगमाया कांबोज, सुमन बंदूनी, नम्रता वर्मा, कविता बत्रा, शैल ढींगरा, मोहिनी हरताल, मंजु हरनाल आदि मौजूद रहे।

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Posted By: Bhanu

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