भारत का ऐतिहासिक आविष्कार, दुश्मन के हमले में छिपे घातक तत्वों को तुरंत पहचानेगी लेगी ये स्वदेशी किट
भारत ने एक स्वदेशी किट विकसित की है जो रासायनिक, जैविक और परमाणु हमलों में खतरनाक तत्वों की पहचान कर सकती है। डीआरडीओ द्वारा विकसित यह किट तरल, ठोस और वाष्प नमूनों को सुरक्षित रूप से एकत्र कर सकती है। यह किट देश की रक्षा क्षमता को बढ़ाएगी और आयात पर निर्भरता को कम करेगी।

केमिकल, बायोलाजिकल और रेडियोन्यूक्लाइड (सीबीआरएन) सैंपल कलेक्शन किट का देहरादून में किया गया प्रदर्शन। जागरण
अश्वनी त्रिपाठी, जागरण, देहरादून। भारत अब सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं के लिए ही नहीं, बल्कि खतरनाक रासायनिक, जैविक और परमाणु आपदाओं के लिए भी तैयार है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ग्वालियर प्रयोगशाला द्वारा विकसित केमिकल, बायोलाजिकल और रेडियोन्यूक्लाइड (सीबीआरएन) सैंपल कलेक्शन किट इसी तैयारी का हिस्सा है। यह पहली स्वदेशी किट है, जो रासायनिक, जैविक व परमाणु हमलों को पहचान कर खतरनाक तत्वों का पता लगाने और रेडिएशन स्तर की सटीक जानकारी देने में सक्षम है।
देहरादून के ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में चल रहे वैश्विक आपदा प्रबंधन सम्मेलन में प्रदर्शित इस किट में 77 विशेष उपकरण हैं, जो तरल, ठोस, पाउडर, वाष्प और मिट्टी से नमूने सुरक्षित रूप से एकत्र कर सकते हैं। इसके लीक-प्रूफ कंटेनर नमूनों को बिना जोखिम लैब तक पहुंचाकर टैगिंग, ट्रैकिंग व फारेंसिक जांच में मदद करते हैं। इसका वजन सिर्फ 32 किलोग्राम है, जबकि अन्य विदेशी किट 42 से 264 किलोग्राम तक भारी होती हैं। यह फील्ड में ले जाने और दूरस्थ क्षेत्रों में उपयोग के लिए अधिक सुविधाजनक है। किट से एक बार में पांच नमूने एकत्र कर सकते हैं। इसके उपयोग के लिए एसओपी भी जारी की गई है। इससे देश की रक्षा क्षमता मजबूत होगी और आयात निर्भरता कम होगी।
किट की खासियत
खतरनाक माहौल में सुरक्षित सैंपलिंग
तेज पहचान क्षमता
कानूनी व वैज्ञानिक जांच के लिए मजबूत प्रमाण
हल्की, सस्ती और फील्ड-फ्रेंडली
इस किट से आएगा बदलाव
रासायनिक तत्वों की मिनटों में पहचान
जैविक तत्वों की जल्दी पहचान, फैलाव से पहले नियंत्रण
रेडियोधर्मी घटनाओं में सटीक रेडिएशन जानकारी
इन खतरनाक तत्वों की कर सकेगी पहचान
रासायनिक तत्व
टैबून: नसों को प्रभावित कर जानलेवा स्थिति पैदा करता है।
सरीन: तेजी से सांस और मांसपेशियों को प्रभावित करता है।
मस्टर्ड: इससे त्वचा, आंख व फेफड़ों में जलन व छाले होते हैं।
फास्जीन: फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाली दम घोटू गैस।
जैविक तत्व
एंथ्रेक्स: फेफड़े, त्वचा और आंतों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
स्मालपाक्स: शरीर पर घाव और तेज बुखार होता है।
ब्रुसेला: बुखार, मांसपेशियों में दर्द और लंबे समय तक परेशानी देता है।
इबोला: रक्तस्रावी बुखार और अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
रेडियोधर्मी तत्व
एसआर-90: इससे हड्डियों और मज्जा को नुकसान।
सीएस-137: विकिरण से ऊतकों और अंगों को नुकसान।
आइ-131: थायराइड ग्रंथि और हार्मोन होते हैं प्रभावित।
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