राज्य ब्यूरो, देहरादून। कोरोना महामारी की दूसरी लहर को देखते हुए सरकार ने अहम फैसला लिया है। सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों, डिग्री कालेजों समेत उच्च शिक्षण संस्थाओं में शुक्रवार से 12 जून तक ग्रीष्मावकाश घोषित किया गया है। ये अवकाश उन पर्वतीय क्षेत्रों के डिग्री कालेजों में भी लागू होगा, जहां ग्रीष्मावकाश के स्थान पर शीतावकाश होता है। सरकार के इस फैसले से बढ़ते कोरोना संक्रमण से खौफजदा शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को राहत मिली है। 

इससे पहले बीती तीन मई को शासनादेश जारी कर राज्य के सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कालेजों को अग्रिम आदेशों तक बंद रखने को कहा गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने शासन को पत्र लिखकर कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए बीती पांच मई से 12 जून तक ग्रीष्मावकाश घोषित करने का अनुरोध किया था। शुक्रवार सुबह शासन ने आनन-फानन में आदेश जारी कर सिर्फ 105 सरकारी डिग्री कालेजों के लिए ग्रीष्मावकाश घोषित किया था। इसके बाद शासन ने आदेश संशोधित कर सभी अनुदानित अशासकीय डिग्री कालेजों, राज्य व निजी विश्वविद्यालयों और इनसे संबद्ध समस्त निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में भी ग्रीष्मावकाश लागू किया। 

ग्रीष्मावकाश में मैदानी व पर्वतीय क्षेत्रों के डिग्री कालेजों के पहले और भविष्य में देय अवकाशों का समायोजन किया जाएगा। जिन पर्वतीय क्षेत्रों के कालेजों में शीतावकाश की व्यवस्था है, वहां भी ग्रीष्मावकाश लागू होगा। इस अवकाश की अवधि का समायोजन भविष्य में देय अवकाशों से करने की व्यवस्था की गई है। अवकाश नहीं होने की वजह से डिग्री कालेजों में प्राचार्यों, शिक्षकों व अन्य स्टाफ के कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की जानकारी विभाग को मिल रही है। 

मंत्री ने लिया संज्ञान, आदेश संशोधित 

उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा धन सिंह रावत ने बताया कि उन्हें सिर्फ सरकारी डिग्री कालेजों के संबंध में उक्त आदेश जारी होने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने ग्रीष्मावकाश की व्यवस्था समान तरीके से सभी सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों के साथ ही सहायताप्राप्त अशासकीय डिग्री कालेजों के लिए भी लागू करने के निर्देश दिए। इसके बाद शासन ने संशोधित आदेश जारी किया। डा रावत ने कहा कि सरकार के इस कदम से कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी।

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