देहरादून, राज्य ब्यूरो। प्रदेश सरकार खनन में राजस्व बढ़ाने के लिए वर्ष 2016 की उत्तराखंड स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, मोबाइल स्टोन क्रशर, मोबाइल स्क्रीनिंग प्लांट, हॉट मिक्स प्लांट, रेडिमिक्स प्लांट अनुज्ञा नीति 2016 के स्थान पर नई नीति ले आई है। इस नीति में नए स्टोन क्रशर के लाइसेंस अब पांच साल की जगह 10 साल के लिए होंगे। इसके लिए पहले से दोगुना फीस यानी मैदानी के लिए 20 लाख और पर्वतीय के लिए 10 लाख रुपये जमा करने होंगे। नए स्टोन क्रशर नदी तट से तीन किमी की दूरी पर बनेंगे, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में यह दूरी 250 मीटर रखी गई है। इसके अलावा स्क्रीनिंग प्लांट, मोबाइल स्टोन क्रशर, मोबाइल स्क्रीनिंग प्लांट, हॉट मिक्स प्लांट व रेडिमिक्स प्लांट के शुल्क में भी बदलाव किया गया है। पुराने लाइसेंस धारकों पर यह व्यवस्था लागू नहीं है। उन्हें लाइसेंस के नवीनीकरण के दौरान इन नई शर्तों को अनुपालन करना होगा।

प्रदेश में खनन राजस्व प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर वर्ष 2016 में स्टोन क्रशर नीति जारी की थी। इस नीति में काफी व्यवहारिक कठिनाई आ रही है। सरकार को इससे राजस्व मिलने में भी कमी आई है। इसे देखते हुए अब नई नीति बनाई गई है, जिसे बुधवार को कैबिनेट ने अपनी मंजूरी प्रदान की। इस नीति के तहत यह व्यवस्था की गई है कि स्टोन क्रशर अथवा स्क्रीनिंग प्लांट के स्थल का चयन व जांच संबंधित जिले के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनने वाली छह सदस्य समिति करेगी। क्रशर अथवा प्लांट लगाने के लिए आवेदक के पास अपना पट्टा होना चाहिए अथवा अन्य निजी पट्टाधारक के साथ अनुबंध करना होगा।

इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि खनन सामग्री उसी पट्टे से ली जाएगी। इन्हें कच्चे माले के संबंध में भी पूरी जानकारी का हिसाब रखना होगा। साथ ही पट्टे में अनुमानित खनन सामग्री को 80 फीसद क्रश करना होगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों का अनुपालन करते हुए अब मैदानी क्षेत्र में स्टोन क्रशर अथवा स्क्रीनिंग प्लांट नदी से तीन किमी की दूरी पर बनेंगे। पहले यह दूरी 500 मीटर थी। इसके अलावा स्कूल, धार्मिक स्थान व शैक्षणिक संस्थाओं और अस्पतालों से दूरी पहले के समान ही 300 मीटर रखी गई है। पर्वतीय स्थानों पर स्टोन क्रशर अथवा स्क्रीनिंग प्लांट के मामले में नदी से न्यूनतम दूरी 500 मीटर रखी गई है। शेष मानक मैदानी मानकों के 50 फीसद रखे गए हैं। अन्य मानकों में इनके चारों तरफ दीवार लगाने, धूल के कणों का कम उत्सर्जन होना, फव्वारे लगाने, टेंपर प्रूफ इलेक्ट्रॉनिक मीटर व डबल एंट्री सिस्टम के तहत समस्त वित्तीय लेखों को रखना अनिवार्य होगा।

परियोजनाओं के लिए मोबाइल स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट

प्रदेश में चल रही विभिन्न सड़क व रेल मार्ग परियोजनाओं के लिए सरकार ने मोबाइल स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट लगाने को मंजूरी दी है। इसके तहत निर्माण क्षेत्र के आसपास ही एक वर्ष के लिए इन्हें स्थापित करने के लिए लाइसेंस दिए जाएंगे। इन्हें कच्चे माल व भंडारण की अनुमति जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति देगी। जरूरत पडऩे पर इनकी समय-सीमा एक वर्ष और बढ़ाई जा सकेगी। परियोजना समाप्त होने पर ये लाइसेंस रिन्यू नहीं होंगे।  पल्वराइजर प्लांट के लिए भी नए नियम

नीति में पल्वराइजर प्लांट एवं इसके परिसर में सोपस्टोन के भंडारण की स्थापना के लिए भी नए नियम बनाए गए हैं। इसकी स्थापना के लिए सभी नियम स्टोन क्रशर वाले लागू होंगे लेकिन इसका क्षेत्रफल न्यूनतम 0.5 एकड़ का रहेगा। इसकी स्थापना व संचालन के लिए पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति लेनी आवश्यक होगी। 

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हॉट मिक्स प्लांट व रेडिमिक्स प्लांट में भंडारण केवल दो वर्ष के लिए

हॉट मिक्स प्लांट व रेडिमिक्स प्लांट में पक्के माल के भंडारण की स्वीकृति दो वर्ष के लिए दी जाएगी। प्लांट स्वामी को इनका मासिक विवरण भी प्रस्तुत करना होगा। ऐसा न करने पर उसे 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा। प्लांट में कच्चा माल अथवा पक्के माल के प्रयोग पर एक रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से राजस्व जमा करना होगा। नीति में क्रशर व प्लांट आदि में नाम परिवर्तन के लिए शुल्क का प्रावधान किया गया है। 

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आवेदन शुल्क की दरें

संयत्र   पर्वतीय       मैदानी

-स्टोन क्रशर, 10 लाख, 20 लाख

-स्क्रीनिंग प्लांट, दो लाख, चार लाख

-हॉट मिक्स प्लांट, 25 हजार

-मोबाइल स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट के लिए 10 टन प्रतिघंटा की क्षमता के लिए 25 हजार, 24 टन तक 50 हजार, 49 टन तक एक लाख और इससे अधिक पर दो लाख रुपये शुल्क रहेगा। 

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