देहरादून, राज्य ब्यूरो। प्रदेश सरकार ने कारखाना मालिकों को खासी राहत देते हुए इनकी लाइसेंस फीस में प्रतिशत वर्ष 10 फीसद वृद्धि का प्रावधान समाप्त कर दिया है। अब कारखाना मालिकों को लाइसेंस रिन्यू कराने के बाद पांच साल तक कोई फीस नहीं देनी होगी। पांच साल बाद उन्हें रिन्युअल फीस पांच फीसद बढ़ोतरी के साथ जमा करनी होगी। इसके अलावा सरकार ने कारखानों में बिस्कुट के साथ ही नूडल्स और पाश्ता उत्पादन को तैयार करने को मंजूरी दी है। वहीं, कारखानों में शौचालय की संख्या बढ़ाने के साथ ही महिला कार्मिकों को नेपकिन प्रदान करने की व्यवस्था की है।

कैबिनेट की बैठक में प्रदेश कारखाना नियमावली में संशोधन पर मुहर लगी। इसके तहत कारखाने में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या के हिसाब से इनका रजिस्ट्रेशन शुल्क तय किया गया है। पहले कारखाने से लाइसेंस फीस प्रति वर्ष 10 प्रतिशत बढ़ाई जाती थी। इसमें अब पांच वर्ष बाद केवल पांच प्रतिशत बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा कारखानों में शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। 25 महिलाओं और 25 पुरुषों पर एक शौचालय और हर 25 पर एक शौचालय बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। यानी सौ कार्मिकों पर चार शौचालय होंगे, जिसमें महिला व पुरुषों के अलग-अलग शौचालय होंगे।

अब यूनियन बनाने को तीस प्रतिशत कर्मचारी होना जरूरी

कैबिनेट ने फैक्ट्रियों में बढ़ती यूनियनों और इससे प्रभावित हो रहे कार्यों को देखते हुए व्यावसायिक संघ अधिनियम में संशोधन किया है। इसके तहत कम से कम तीस प्रतिशत अथवा सौ कर्मचारियों पर ही यूनियन बन सकेगी। पहले दस प्रतिशत अथवा सौ कर्मचारियों में यूनियन बनाने का प्रावधान था।

कारखानों में अब नौ घंटे से अधिक ले सकेंगे कार्य

बिस्कुट, नूडल्स व पाश्ता बनाने वाले कारखानों में अब कर्मकारों से नौ घंटे से अधिक कार्य लिया जा सकेगा। कच्चे माल के खराब होने की आशंका को देखते हुए कैबिनेट ने कारखानों को यह राहत दी है। कारखाना अधिनियम में किए गए संशोधन के मुताबिक अब कारखाने में कर्मकारों से प्रति सप्ताह 48 घंटे से अधिक कार्य लिया जा सकेगा। सात दिन बाद साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था के स्थान पर अब दस दिन के भीतर साप्ताहिक अवकाश देने और लगातार पांच घंटे काम करने वाले कर्मकार को आधे घंटे का अवकाश देने का प्रावधान किया गया है।

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राज मिस्त्री का मानदेय 350 से बढ़ाकर 500 रुपये 

शासन ने अब राजमिस्त्रियों के मानदेय को 350 से बढ़ाकर 500 रुपये करने का प्रावधान किया है। दरअसल, यह देखने में आ रहा था कि कम मानदेय के कारण सरकारी कार्यों के लिए राजमिस्त्री नहीं मिल रहे थे। इसे देखते हुए कैबिनेट ने इनके मानदेय बढ़ोतरी पर मुहर लगाई।

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