v style="text-align: justify;">देहरादून, [जेएनएन]: एक कार्यक्रम में शिरकत करने देहरादून आए सांसद और प्रसिद्ध अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने की पीड़ा एक बार फिर छलक आई। उन्होंने कहा कि हर घर में तकरार होती है और फिर सब ठीक हो जाता है, लेकिन मुझे यह कहने में गुरेज नहीं कि राजनीति में वह सम्मान नहीं मिला, जिसका हकदार था। उन्होंने ये भी कहा कि कि मैंने अपने दम पर नाम और शोहरत हासिल की है। 

देहरादून के समर वैली स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने जीवन के सफर पर आधारित पुस्तक का 'एनीथिंग बट खामोश' विमोचन किया। यह पुस्तक लेखिका भारती एस प्रधान ने लिखी है। इस दौरान सिन्हा ने कहा कि आज देश में हालात कैसे हैं, यह फिल्म पद्मावत को लेकर मचे बवाल से समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आसियान देशों को भारत में निवेश के लिए बुलाया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर देश में पद्मावत को लेकर हाय तोबा है। इसका मेहमानों पर क्या प्रभाव पड़ा होगा। 

पुस्तक को लेकर उन्होंने कहा कि यह उनके संघर्ष की गाथा है। कहा कि एक समय वह भी था, जब जेब में पांच सौ रुपये लेकर हीरो बनने के लिए पुणे आए। चेहरे पर कटे के निशान थे और लोग कहा करते थे कि अगर तुम्हें सच में हीरो बनना है तो प्लास्टिक सर्जरी करा लो, लेकिन मैंने हालात से समझौता करने की बजाए उसका सामना किया। कहा कि किताबों में उकेरा अनुभव युवाओं को प्रेरणा देगा। इस अवसर पर पुस्तक की लेखिका भारती एस प्रधान, फेस्ट के आयोजक अनुराग चौहान उपस्थित रहे। 

तंबाकू सेवन करने वालों को बुढ़ापा नहीं आता   

अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह भी पहले तंबाकू का सेवन करते थे, लेकिन एक बार उन्होंने इस पर गंभीरता से विचार किया और अंत में तंबाकू त्यागने का फैसला लिया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि तंबाकू पीने वालों को बुढ़ापा नहीं आता, क्योंकि वे बुढ़ापे तक पहुंच ही नहीं पाते। 

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Posted By: Raksha Panthari