देहरादून, जेएनएन। पंजाब में ड्रग इंस्पेक्टर की हत्या के बाद अब औषधि नियंत्रण विभाग में सुरक्षा इंतजामों को लेकर मंथन शुरू हो गया है। केंद्र ने सभी राज्यों को इस बाबत पत्र भेजा है। जिसमें कहा गया है कि ड्रग इंस्पेक्टरों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक उपयुक्त तंत्र अमल में लाएं। न केवल फील्ड ड्यूटी बल्कि कार्यालयों में भी व्यवस्था बनाने को कहा गया है। 

स्वास्थ्य औरपरिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव प्रीति सूदन द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि पंजाब में महिला ड्रग्स इंस्पेक्टर की हत्या के बाद औषधि नियंत्रण विभाग के कार्मिकों में अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसने उनके मनोबल पर भी असर डाला है। इस बीच ऑल इंडिया ड्रग्स कंट्रोल ऑफिसर्स कन्फेडरेशन ने भी मांग उठाई है कि देशभर में औषधि नियंत्रण विभाग में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। क्योंकि ड्रग इंस्पेक्टर का जांच व छापेमारी से जुड़ा कार्य है। 

इस दौरान उनका वास्ता आपराधिक प्रवृति के तमाम लोगों से पड़ता है। ऐसे में मानव संसाधन में वृद्धि के साथ ही ऐसा सिस्टम तैयार किया जाए कि कार्मिकों पर किसी तरह की आंच न आए। इस पत्र में कहा गया है कि ड्रग इंस्पेक्टर एक अति संवेदनशील कार्य करते हैं। जिसका ताल्लुक दवा की गुणवत्ता से है। ऐसे में राज्य जल्द इस संदर्भ में आवश्यक कदम उठाएं। इसके तहत सुरक्षा और संसाधन के लिहाज से व्यवस्था बनाने को कहा गया है। 

18 नए ड्रग इंस्पेक्टर मिलेंगे 

प्रदेश में औषधि नियंत्रण विभाग के दिन जल्द बहुरने वाले हैं। मानव संसाधन की कमी झेल रहे विभाग की ड्रग इंस्पेक्टर व अन्य स्टाफ की मुराद पूरी होगी। हाल में सरकार ने औषधि नियंत्रण विभाग का नया ढांचा स्वीकृत किया है। जिसमें ड्रग इंस्पेक्टर के 25 पद स्वीकृत किए गए हैं। जबकि पहले यह संख्या 14 थी। इसके सापेक्ष भी कार्यरत सात ही हैं। ऐसे में 18 नए ड्रग इंस्पेक्टर की भर्ती की जाएगी। आचार संहिता खत्म होते ही इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

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