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    RIMC : देश के पहले सैन्‍य गुरुकुल के स्‍वर्णिम 100 साल, हर बच्‍चा देखता है यहां प्रवेश का सपना

    By Nirmala BohraEdited By:
    Updated: Tue, 15 Mar 2022 02:09 PM (IST)

    RIMC देशभर में सैन्य गुरुकुल की पहचान रखने वाले राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कालेज (आरआइएमसी) अपने स्‍वर्णिम सौ साल पूरे कर चुका है। यहां का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। यही वजह है कि देश का हर बच्‍चा यहां प्रवेश पाने का सपना देखता है।

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    अपने स्‍वर्णिम सौ साल पूरे कर चुका है राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कालेज (आरआइएमसी)

    जागरण संवाददाता, देहरादून। RIMC : देशभर में सैन्य गुरुकुल की पहचान रखने वाले राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कालेज (आरआइएमसी) अपने स्‍वर्णिम सौ साल पूरे कर चुका है। आरआइएमसी भारतीय उपमहाद्वीप का पहला सैन्य शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थान है। यहां का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। यही वजह है कि देश का हर बच्‍चा यहां प्रवेश पाने का सपना देखता है।

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     दूसरे विश्व युद्ध से लेकर बालाकोट आपरेशन तक में भी भूमिका

    यहां से अनुशासित जीवन की सीख, समग्र ज्ञान व कड़ा प्रशिक्षण पाकर कई कैडेट भारतीय सेना के तीनों अंगों में कई ऊंचे ओहदों तक पहुंचे हैं। दूसरे विश्व युद्ध से लेकर बालाकोट आपरेशन तक सैन्य सेवाओं में उनकी नेतृत्व की भूमिका की सराहना की गई है। रिटायर वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल वीएस धनोवा भी आरआइएमसी से पास आउट हुए थे। 

    दूसरे विश्व युद्ध में अदम्य साहस के लिए विक्टोरिया क्रास प्राप्त विजेता लेफ्टिनेंट पीएस भगत भी यहीं से पास आउट हुए थे। आरआइएमसी के सौ साल के गौरवशाली इतिहास में और कई उपलब्धियों का समावेश है। राष्ट्र सुरक्षा में आरआइएमसी से पास आउट हुए कैडेट (छात्र) की भूमिका अहम है। 

    बता दें कि तत्कालीन प्रिंस आफ वेल्स ने 13 मार्च 1922 को देहरादून में आरआइएमसी कालेज की स्थापना की थी। तब इसका नाम रायल इंडियन मिलिट्री कालेज रखा गया था। बाद में किंग एडवर्ड आरआइएमसी नाम से इस कालेज का उद्घाटन किया गया। शुरुआत में यहां भारतीय युवाओं को प्रशिक्षित कर ब्रिटिश भारतीय सेना के अधिकारी संवर्ग के भारतीयकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाता था। 

    देश आजाद होने के बाद से यहां सेना के तीनों अंगों के लिए युवाओं को प्रशिक्षित किया जाने लगा। अब तक यहां से भारतीय थलसेना को छह सेना प्रमुख, 41 सैन्य कमाडर व 163 लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के सैन्य अधिकारी मिल चुके हैं। 

    छात्रों को कक्षा आठवीं में मिलता है प्रवेश

    आरआइएमएसी में साढ़े 11 से 13 आयु वर्ग के छात्र-छात्राओं को आठवीं कक्षा में प्रवेश मिलता है। प्रवेश के लिए अखिल भारतीय स्तर पर परीक्षा आयोजित की जाती है। फिर साक्षात्कार व मेडिकल के बाद मेरिट सूची से प्रवेश के लिए छात्रों का चयन होता है। 

    एक बार में कालेज में पूरे देश से 30 छात्र-छात्राओं (पांच सीट छात्राओं के लिए) का चयन किया जाता है। हर राज्य के लिए कोटा निर्धारित है। बड़ी आबादी वाले राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों से सिर्फ एक ही छात्र का चयन होता है। छात्रों को शिक्षा के साथ ही सैन्य प्रशिक्षण भी दिया जाता है। यहां से 12वीं पास करते ही छात्रों का चयन एनडीए के लिए हो जाता है। जहां तीन साल की मिलिट्री ट्रेनिंग के बाद वह थलसेना, वायुसेना व नौसेना में शामिल होते हैं।

    आरआइएमसी के जनवरी-2022 सत्र में दाखिले का काउंटडाउन शुरू हो गया है। आवेदन की अंतिम तिथि 15 अप्रैल, 2021 है और प्रवेश परीक्षा 5 जून, 2021 को होगी। कालेज में प्रवेश के लिए हर साल दो बार परीक्षा का आयोजन किया जाता है।

    मिलिट्री कालेज में अब छात्राओं को भी एडमिशन का मौका

    आरआइएमसी में आगामी सत्र जुलाई से छात्राएं भी शिक्षा ग्रहण करेंगी। अभी तक यहां केवल छात्रों को ही दाखिला दिया जाता था। 

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