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    RIMC: मिलिट्री कालेज में अब छात्राओं को भी एडमिशन का मौका, जानें RIMC में दाखिले की स्‍टेप बाय स्‍टेप प्रक्रिया

    By Sumit KumarEdited By:
    Updated: Sun, 13 Mar 2022 08:59 PM (IST)

    आगामी सत्र जुलाई से आरआइएमसी में छात्राएं भी शिक्षा ग्रहण करेंगी। अभी तक यहां केवल छात्रों को ही दाखिला दिया जाता था। राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कालेज ...और पढ़ें

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    राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कालेज (आरआइएमसी) इस साल अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है।

    जागरण संवाददाता, देहरादून : राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कालेज (आरआइएमसी) इस साल अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। इस अहम पड़ाव पर संस्थान के नाम एक नया आयाम जुडऩे जा रहा है। आगामी सत्र जुलाई से आरआइएमसी में छात्राएं भी शिक्षा ग्रहण करेंगी। अभी तक यहां केवल छात्रों को ही दाखिला दिया जाता था। दरअसल, राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कालेज में प्रवेश के लिए हर साल दो बार प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है। जून और दिसंबर में होने वाली इस परीक्षा में अभी तक देशभर से 25 छात्रों को प्रवेश दिया जाता था।

    अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित प्रवेश परीक्षा के आधार पर छात्रों को कक्षा आठ में प्रवेश मिलता था। जिसके लिए आबादी के हिसाब से राज्यवार कोटा निर्धारित है। उप्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के लिए दो-दो सीटें तय हैं, जबकि उत्तराखंड को एक सीट मिलती है। इसी क्रम में अब उक्त 25 सीट के अलावा पांच छात्राओं को भी आरआइएमसी मेें दाखिला दिया जाएगा। जुलाई में आने वाले नए बैच में छात्राएं भी शामिल होंगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गत वर्ष दिसंबर में छात्राएं पहली बार प्रवेश परीक्षा में शामिल हुई थीं। वहीं, नेशनल डिफेंस एकेडमी ने भी बेटियों के लिए द्वार खोल दिए हैं।

    बता दें कि सेना में महिलाएं चिकित्सा, शिक्षा, कानून, सिग्नल, इंजीनियरिंग सहित विभिन्न शाखाओं में सेवा दे रही हैं। अब सेना पुलिस में भी महिलाओं की भर्ती की जा रही है। इन बदलाव से युवतियां भी उसी प्रक्रिया से होकर सेना में आएंगी, जिस प्रक्रिया से युवक गुजरते हैं।  

    स्वर्णिमा थी आरआइएमसी से पहली महिला अफसर

    आरआइएमसी में छात्राओं के दाखिले के द्वार अब खुले पर इसकी नींव बहुत पहले ही पड़ गई थी। आरआइएमसी कमांडेंट कर्नल अजय कुमार ने बताया कि 1992 में टेस्ट के रूप में संस्थान के ही एक फैकल्टी की बेटी स्वर्णिमा थपलियाल को यहां दाखिला दिया गया। आरआइएमसी से पासआउट वह पहली महिला अधिकारी थीं। स्वर्णिमा की तरह ही अब कई और लड़कियां सेना में अफसर बनने का अपना सपना पूरा कर सकेंगी।

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