देहरादून, राज्य ब्यूरो। एलटी से पदोन्नत प्रवक्ताओं को लंबी तनातनी के बाद राहत मिलने जा रही है। सरकारी इंटर कॉलेजों में रिक्त पदों पर तैनाती में पहली वरीयता उन्हें मिलेगी। इसके बाद शेष बचे पदों पर अतिथि शिक्षकों को तैनाती दी जाएगी। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने इस संबंध में निर्देश दिए हैं। पदोन्नत प्रवक्ताओं की तैनाती को लेकर पहले जारी हो चुके शासनादेश में भी नई व्यवस्था के मुताबिक संशोधन किया जाएगा। शिक्षा सचिव ने शिक्षा निदेशक आरके कुंवर से तैनाती संशोधन से संबंधित प्रस्ताव मुहैया कराने को कहा है। शासन के इस कदम से नियमित शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों की तैनाती को लेकर लंबे अरसे से चल रही खींचतान खत्म होने के आसार हैं। 

दरअसल, वर्ष 2018 में राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रवक्ताओं के पद काफी संख्या में रिक्त थे। यही वजह है कि रिक्त पदों पर बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की गई। इनमें सुगम क्षेत्रों के इंटर कॉलेज भी शामिल हैं। पद रिक्त होने की वजह से इन कॉलेजों में अतिथि शिक्षकों को तैनाती लाभ मिला था। शिक्षा महकमा अब तक अतिथि शिक्षकों को उनके पूर्व तैनाती स्थल पर ही कार्यभार देने का हिमायती रहा है। शासनादेश में भी यह जिक्र किया गया। पदोन्नत प्रवक्ताओं और राजकीय शिक्षक संघ इसका पुरजोर विरोध करता रहा है। 
संघ का कहना है कि रिक्त पदों पर स्थायी शिक्षकों को पदोन्नति में तैनाती में वरीयता मिलनी चाहिए। अब यह तनातनी खत्म हो जाएगी। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने इस संबंध में शुक्रवार को सचिवालय में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में तय किया गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक कदम उठाया जाएगा। रिक्त पदों पर तैनाती को लेकर स्थायी शिक्षकों का पहला हक है। लिहाजा इच्छित स्थानों पर तैनाती में उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद रिक्त रहने वाले पदों पर अतिथि शिक्षकों को तैनाती मिलेगी। 
शासन के इस फैसले से करीब 800 पदोन्नत प्रवक्ताओं के साथ ही करीब 500 अतिथि शिक्षकों की तैनाती में गतिरोध दूर होगा। कुल 1946 पदोन्नत प्रवक्ताओं में 600 तदर्थ प्रवक्ता के तौर पर कार्य कर रहे थे। उन्हीं पदों पर उन्हें तैनाती मिल चुकी है। इसमें से कुछ शिक्षक पदोन्नति से पहले ही उत्तर प्रदेश जा चुके हैं। भूगोल विषय के करीब 100 प्रवक्ताओं की पदोन्नति का मामला अभी विचाराधीन है।
नई शिक्षा नीति पर शिक्षा विभाग में मंथन शुरू
नई शिक्षा नीति को लेकर शिक्षा विभाग में मंथन शुरू हो गया है। शिक्षा निदेशालय, एससीईआरटी और अकादमिक शोध और प्रशिक्षण विभाग के अधिकारी नई नीति को लेकर लगातार बैठकें कर रहे हैं। जल्द शिक्षा विभाग की ओर से पूरी नीति की समीक्षा कर एक प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। प्रस्ताव पर शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा सचिव के साथ भी चर्चा की जाएगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, प्राथमिक शिक्षा निदेशालय, एससीईआरटी और अकादमिक शोध और प्रशिक्षण विभाग के बीच शुक्रवार को भी इस संबंध में बैठक हुई। शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने बताया कि नई शिक्षा नीति के हर बिंदु पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। 

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