देहरादून, बलवीर भंडारी। जनजाति क्षेत्र की पौराणिक परंपरा से हटकर दो साल नई दीपावली मनाने के बाद जौनसार के खत बाना से जुड़े छह गांवों के लोग इस बार से पहाड़ी बूढ़ी दीपावली मनाएंगे। जिसका लेकर लोगों में जबदरस्त उत्साह है। ग्रामीणों ने विरासतन संस्कृति को जीवित रखने के लिए मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया है। अब पहले की तरह बाना खत के छह गांवों में जौनसारी रीति-रिवाज से बूढ़ी दीपावली का जश्न मनेगा। लोगों ने बूढ़ी दीपावली को मनाने की तैयारी शुरू कर दी है।

कालसी तहसील अंतर्गत जौनसार के खत बाना से जुड़े दधौ, पंजिया, लुंवाठा, बनसार, चापनू व अमराया समेत छह गांवों में हमेशा से पहाड़ी बूढ़ी दीपावली मनाने की परंपरा रही है, लेकिन वर्ष 2017 में पहली बार खत बाना से जुड़े इन छह गांवों के लोगों ने जौनसार की पौराणिक परंपरा से हटकर नई दीपावली मनाने का फैसला किया और दो साल तक देशवासियों के साथ नई दीपावली मनाई। 

खत बाना के लोगों में परंपरा से हटकर नई दीपावली मनाने को लेकर एक राय नहीं होने से ग्रामीण वापस मुख्यधारा में लौट आए। स्याणा टीकम सिंह, शिरगुल-विजट महाराज मंदिर समिति पंजिया के कोषाध्यक्ष आनंद चौहान व संतराम चौहान ने कहा दो साल पहले ग्रामीणों ने नई परंपरा की शुरुआत की थी।

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जिसे इस बार बदल दिया गया है। ग्रामीणों ने कहा जौनसार में सभी लोग पौराणिक परंपरा के अनुसार पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहाड़ी बूढ़ी दीपावली मनाते आ रहे हैं। जौनसार की इस विरासतन संस्कृति को जीवित रखने के लिए सभी ने पहले की तरह बूढ़ी दीपावली मनाने की बात कही है। 

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खत बाना के लोग क्षेत्रवासियों के साथ जौनसारी रीति-रिवाज से 26 नवंबर को छोटी दीपावली व 27 को औंसा रात में बड़ी दीपावली मनाने को पंचायती आंगन में होलियात निकालेंगे। इसके अलावा 28 को बिरुड़ी का जश्न मनेगा और 29 को हिरन नाच के साथ जौनसारी बूढ़ी दीपावली का समापन होगा।

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Posted By: Sunil Negi

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