देहरादून, राज्य ब्यूरो। लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड के पांच संसदीय क्षेत्रों में हार के कारणों की समीक्षा करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी की विस्तारित बैठक में ईवीएम मैजिक और मोदी मैजिक पर ठीकरा फोड़ा। कुछ नेताओं ने गुटबाजी और सांगठनिक कमजोरी को भी जिम्मेदार ठहराया। 

लगातार मिल रही हार से परेशानहाल पार्टी के तमाम दिग्गज नेताओं ने अब आगे की सुध लेने के अंदाज में 2022 के विधानसभा चुनाव की चुनौती के लिए अभी से एकजुट होने का संकल्प लेने पर जोर दिया। बैठक में प्रस्ताव पारित कर राहुल गांधी से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर बने रहने का अनुरोध किया गया। 

लोकसभा चुनाव नतीजे आने के बाद अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन में हार के कारणों पर करीब दस घंटे तक मंथन किया। बैठक में ये भी साफ हो गया कि लोकसभा की सभी पांच सीटों पर कांग्रेस को जिसतरह बड़े अंतर से भाजपा के हाथों मात मिली, उसे बड़े नेता अब तक पचा नहीं पाए हैं।

अलबत्ता सभी दिग्गज नेताओं ने ये भी कहा कि पार्टी आगे किसी भी चुनाव में हथियार नहीं डालने वाली। भाजपा को मात देने के लिए सभी ने गुटबंदी, अंदरूनी खींचतान को एक किनारे रख एकजुट होने का आह्वान किया गया। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह समय आत्ममंथन और चिंतन का है। इससे पार्टी के लिए रास्ता निकलेगा। कार्यकर्ताओं को जुटकर नए जोश के साथ संघर्ष करना पड़ेगा। 

उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि काग्रेस में गुटबाजी है। वह कह रहे हैं कि वह खुद प्रीतम गुट में हैं। पार्टी के प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह ने कहा कि काग्रेस अध्यक्ष राहुल गाधी ने साहस दिखा कर राफेल डील का सच सामने रखा तो भाजपा घबरा गई। भाजपा ने पूरा चुनाव राष्ट्रवाद पर केंद्रित कर काग्रेस के विरुद्ध झूठ फैला कर चुनाव जीत लिया। 

उन्होंने कहा कि काग्रेस के सामने कई बार इस प्रकार के संकट आये हैं, किंतु काग्रेस कार्यकर्ताओं के बल पर फिर खड़ी हुई है। इस बार भी और मजबूत हो कर खड़ी होगी। 

बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि पार्टी हार से विचलित हुए बगैर जन सरोकारों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं भविष्य में जीत की तैयारी शुरू करने का काम करें। छह माह पहले हुए पूर्व हुए स्थानीय निकाय चुनावों में काग्रेस ने दो मेयर व सात जिला मुख्यालयों की नगरपालिकाओं में कब्जा किया, लेकिन लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने छद्म राष्ट्रवाद व साम्प्रदायिक मुद्दों को अपने प्रचार का हथियार बना कर चुनाव जीता है। 

अब पार्टी राज्य सरकार की चौतरफा नाकामियों के खिलाफ सड़क और सदन दोनों में अपना संघर्ष जारी रखेगी। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा हृदयेश ने कहा कि काग्रेस एक परिवार है। परिवार में झगड़े भी होते हैं, लेकिन संकट काल में पूरा परिवार एक हो जाता है। आज जो संकट देश और काग्रेस के सामने है, हम सब को एकजुट होकर पार्टी को फिर मजबूती से खड़ा करना है।

प्रदेश सह प्रभारी राजेश धर्माणी ने कहा कि चुनाव से दो माह पहले राज्य में और देश में बीजेपी के खिलाफ माहौल था। मोदी सरकार ने पुलवामा और उसकी प्रतिक्रिया में एयर स्ट्राइक पर पूरा चुनाव केंद्रित कर चुनाव का रुख बदल दिया। अल्मोड़ा सीट से प्रत्याशी व राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा ने कहा कि ईवीएम पर सवाल खड़े किए। 

पौड़ी से प्रत्याशी रहे मनीष खंडूड़ी ने चुनाव में कार्यकर्ताओं व नेताओं से मिले सहयोग को खासतौर पर सराहा। हरिद्वार प्रत्याशी अंबरीष कुमार ने भी पार्टी नेताओं से एकजुट होने को कहा। 

बैठक में उपनेता प्रतिपक्ष करन माहरा, विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, मनोज रावत, फुरकान अहमद, पूर्व विधायक गणेश गोदियाल, पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, दिनेश अग्रवाल, तिलकराज बेहड़, मंत्री प्रसाद नैथानी, हरीशचंद्र दुर्गापाल सहित 22 जिलाध्यक्षों ने भी विचार व्यक्त किए। बैठक का संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने किया। 

कांग्रेस नेताओं में दिखी खींचतान 

प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक में भले ही गुटबाजी को भूलकर एकजुट होने पर जोर दिया गया हो, लेकिन पार्टी के तमाम दिग्गज नेताओं में लोकसभा चुनाव की हार को लेकर एकदूसरे से नाराजगी साफ झलकी। अपनी नसीहत पर नेता खुद ही अमल से कन्नी काटते दिखे। बैठक शुरू होने से पहले ही नेताओं के बीच खींचतान दिखाई दी। 

बैठक में शामिल होने राजीव भवन पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सीधे बैठक स्थल पर पहुंच गए। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के कक्ष में पहले से मौजूद पार्टी के तमाम नेता उनका इंतजार करते रहे। उनके बैठक में पहुंचने के बाद भी पार्टी नेताओं की ओर से कुछ देर बात करने का आमंत्रण भेजा गया, लेकिन उन्होंने इसे अनसुना कर दिया।

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