यहां छात्र-छात्राओं को पहली बार पर्यावरण से एमएससी करने का मौका, जानिए
उत्तराखंड मुक्त विवि को आठ नए स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति मिल गई है।। छात्र-छात्राओं को यूओयू से पहली बार पर्यावरण में एमएससी करने का मौका मिल रहा है।
देहरादून, जेएनएन। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उत्तराखंड मुक्त विवि को आठ नए स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति दे दी है। छात्र-छात्राओं को यूओयू से पहली बार पर्यावरण में एमएससी करने का मौका मिल रहा है। यूओयू में पहले से स्नातक, डिप्लोमा एवं स्नातकोत्तर आदि के 80 प्रोग्राम संचालित किए जा रहे हैं, जो बढ़कर 88 हो गए हैं।
यूजीसी ने 27 जून को जारी आदेश में सभी विषयों को एक जुलाई 2019 से शुरू करने की इजाजत दी है। एमएससी के इन कार्यक्रमों को शुरू करने में विवि के कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी का विशेष योगदान रहा। वह स्वयं दिल्ली गए और यूजीसी के अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठक की। यूओयू के मीडिया प्रभारी डॉ. राकेश रयाल ने बताया कि एमएससी पाठ्यक्रम पूरे राज्य में केवल 15 अध्ययन केंद्रों में प्रस्तावित हैं, जहां पर पहले से ही दूसरे विवि के ये सभी पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हों, सभी अध्ययन केंद्र राजकीय महाविद्यालय या विवि परिसर होंगे। एक विषय में केवल 20 सीटों पर ही प्रवेश दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूओयू को आठ नए पाठ्यक्रम जारी करने से पहले यूजीसी की तीन सदस्य टीम ने विवि का निरीक्षण किया था। निरीक्षण टीम की रिपोर्ट के बाद इन सभी विषयों में विवि को मान्यता मिली। यूओयू के कुलपति ने इससे पहले यूजीसी के अधिकारियों से दिल्ली में मुलाकात की थी।
पीजी में ये है पाठ्यक्रम
एमएससी कैमिस्ट्री, पर्यावरणीय विज्ञान, भूगोल, गणित, भौतिक विज्ञान, जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान इसके अलावा मास्टर ऑफ आर्ट भूगोल को मान्यता मिल गई है।
यूओयू के कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी ने बताया कि एमएससी पर्यावरण पाठ्यक्रम पहली बार यूओयू को मिला है। जबकि अन्य सात कार्यक्रमों को संचालित करने की नए सिरे से मान्यता मिली है। यह मान्यता वर्ष 2022-2023 तक प्रभावी रहेगी। यूओयू से एमएससी करने वाले छात्रों के लिए यह खुशखबरी है।
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