देहरादून, [जेएनएन]: नगर निगम चुनाव में उतरे 95 पार्षद प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्होंने चुनाव खर्च का ब्योरा जमा नहीं कराया। ऐसे प्रत्याशियों को संबंधित रिटर्निंग अधिकारी ने नोटिस जारी कर जबाब मांगा है। प्रत्याशियों के खर्च का ब्योरा अब पांच नवंबर को जांचा जाएगा। इसके बाद भी जानकारी उपलब्ध न कराने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 

निकाय चुनाव में महापौर प्रत्याशी हों या पार्षद प्रत्याशी सभी को अपने प्रतिदिन के चुनाव खर्च का ब्योरा लेखा टीम को उपलब्ध कराना है। नामांकन से लेकर अब तक किए गए खर्च का ब्योरा प्रत्याशियों ने मंगलवार को निर्वाचन की लेखा टीम को देना था। 

पार्षद पद के 415 प्रत्याशियों में से 95 प्रत्याशी ऐसे रहे, जिन्होंने लेखा टीम को कोई जानकारी नहीं दी। इसमें भाजपा, कांग्रेस, आप सहित अन्य पार्टियों के साथ ही निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं। अब ऐसे प्रत्याशियों को संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों ने नोटिस जारी कर उनसे जबाब तलब किया है। 

जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी एसए मुरूगेशन ने सभी प्रत्याशियों से अपील की है कि वह समय से अपना चुनाव व्यय लेखा टीम के पास जमा करा दें। कहा कि जिन प्रत्याशियों ने प्रथम बार में व्यय ब्योरा जमा नहीं कराया है, वे पांच नवंबर को चुनाव खर्च का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराएं। 

वार्ड--------------------ब्योरा जमा न करने वाले प्रत्याशी

एक से 15-------------------------13

16 से 30------------------------ 13

31 से 45--------------------------05

46 से 60-------------------------15

61 से 75--------------------------23

76 से 90-------------------------18

91 से 100------------------------08

आयोग को पांच साल बाद डाक से भेजा खर्च का ब्योरा

वर्ष 2013 में ऋषिकेश नगर निकाय से सभासद पद पर चुनाव लड़ने वाली प्रत्याशी रजनी ध्यानी ने करीब पांच साल बाद अपने चुनाव खर्च का ब्योरा डाक से राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा। इसे अस्वीकार करते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट ने रजनी ध्यानी के चुनाव लड़ने पर लगाए गए छह साल के प्रतिबंध को बरकरार रखा। प्रतिबंध का आदेश आयोग ने वर्ष 2015 में जारी किया था और तभी से यह अवधि भी गिनी जाएगी।

आयोग के आदेश के अनुसार, रजनी ध्यानी ने अपने चुनाव खर्च का ब्योरा 20 अक्टूबर को पंजीकृत डाक से भेजा, जो आयोग को 25 अक्टूबर को प्राप्त हुआ। आयोग ने कहा कि प्रत्याशी को परिणाम घोषित होने के 30 दिन के भीतर खर्च को ब्योरा देना होता है। 

ब्योरा न देने पर जिला निर्वाचन अधिकारी ने नोटिस भी भेजा था। इसके बाद आयोग ने भी रजनी ध्यानी को तलब किया था, मगर वह उपस्थित नहीं हुईं। उन्हें कई अवसर देने के बाद भी जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो 20 मार्च 2015 को उनके चुनाव लड़ने पर छह साल का प्रतिबंध लगा दिया गया।

चुनाव खर्च में हेराफेरी करने वालों पर नजर

निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव के लिए विभिन्न वस्तुओं के रेट निर्धारित करने के बाद भी प्रत्याशी इसमें हेराफेरी कर रहे हैं और अपने चुनाव खर्च में निर्धारित रेट से बहुत कम खर्च दिखा रहे हैं। चुनाव खर्च में हेराफेरी करने वाले ऐसे प्रत्याशियों से अब लेखा टीम जबाब तलब करेगी। इसके लिए सभी प्रत्याशियों को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है।

विदित है कि निर्वाचन आयोग ने चुनाव के दौरान प्रत्याशियों के लिए चाय से लेकर फूलमाला और सुई-धागे तक के रेट निर्धारित किए हैं। यह रेट प्रत्याशियों से सलाह-मशविरा करने के बाद ही तय किए जाते हैं। 

प्रत्याशियों की ओर से अब तक का चुनाव खर्च का जो ब्योरा लेखा टीमों के सामने रखा गया, उससे साफ है कि निर्वाचन आयोग के नियम-कायदे प्रत्याशियों के लिए मायने नहीं रखते। इसीलिए जिस चाय का रेट निर्वाचन आयोग की ओर से दस रुपये निर्धारित किया गया है। उसे महापौर प्रत्याशी से लेकर पार्षद प्रत्याशी चार से पांच रुपये दिखा रहे हैं। 

इसके साथ ही कुर्सी, मेज, खाने, पानी, टोपी, बैनर आदि में भी प्रत्याशियों ने खूब हेराफेरी की है। प्रत्याशियों की ओर से की इस चालाकी का लेखा टीम ने संज्ञान लिया है। टीम अब ऐसे प्रत्याशियों से जवाब तलब कर रही है। इसके लिए प्रत्याशियों को नोटिस जारी किए जाने की तैयारी की जा रही है। 

जिला निर्वाचन अधिकारी एसए मुरूगेशन ने कहा कि चुनावी खर्च में हेराफेरी की बात को गंभीरता से लिया जा रहा है। लेखा टीम को इसके लिए प्रत्याशियों को नोटिस भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

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Posted By: Bhanu

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